Close

क्या पुरुष भी रख सकते हैं करवा चौथ का व्रत? (Can men also observe the Karva Chauth fast?)

करवा चौथ का नाम सुनते ही मन में सजी-धजी महिलाएं, हाथों में रची मेहंदी, पूजा की थाली और चांद का इंतज़ार करती सुहागिनों की तस्वीर उभर आती है. परंपरागत रूप से इस दिन विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं. लेकिन बदलते समय में एक सवाल तेजी से चर्चा में है- क्या पति भी अपनी पत्नी के लिए करवा चौथ काव्रत रख सकते हैं?

क्या पति के व्रत रखने की मनाही है?

करवा चौथ की परंपरा मुख्य रूप से महिलाओं केव्रत से जुड़ी रही है. हालांकि ऐसा कोई सर्वमान्य धार्मिक नियम नहीं है कि पति अपनी पत्नी के लिए व्रत नहीं रख सकते. आज कई पति अपनी पत्नी के प्रति प्रेम और साथ निभाने की भावना व्यक्त करने के लिए इस दिन व्रत रखते हैं. कुछ पति पत्नी के साथ पूरा दिन बिना भोजन और पानी के रहते हैं, जबकि कुछ अपनी सेहत और दिनचर्या के अनुसार फलाहार या सामान्य भोजन करते हुए भी इस अवसर को ख़ास बनाते हैं.

दरअसल, किसी भी धार्मिक परंपरा को निभाने का तरीक़ा परिवार, क्षेत्र और व्यक्तिगत आस्था के अनुसार अलग-अलग हो सकता है.

आख़िर क्यों बदल रही है यह परंपरा?

पहले करवा चौथ को मुख्य रूप से पत्नी के समर्पण और पति की लंबी उम्र की कामना से जोड़कर देखा जाता था. आज पति पत्नी दोनों नौकरी करते हैं, घर और बच्चों की ज़िम्मेदारियां साझा करते हैं और जीवन की चुनौतियों का साथ मिलकर सामना करते हैं. ऐसे में कई पुरुष भी महसूस करते हैं कि अगर उनकी पत्नी उनके लिए पूरे दिन उपवास रख सकती है, तो वे भी अपनी भावनाओं को किसी प्रतीकात्मक तरीक़े से व्यक्त कर सकते हैं.

हालांकि पति का व्रत रखना ज़रूरी नहीं कि पत्नी के व्रत का जवाब हो. यह उसकी अपनी इच्छा और प्रेम की अभिव्यक्ति हो सकती है. रिश्ते में प्रेम साबित करने के लिए किसी पर भी व्रत रखने का दबाव नहीं होना चाहिए.

व्रत से ज़्यादा ज़रूरी है एक-दूसरे का ख़्याल

मान लीजिए, पत्नी सुबह से भूखी-प्यासी है और पति उसके सामने बैठकर आराम से भोजन कर रहा है. ऐसे में पत्नी को अकेलापनमहसूस हो सकता है. इसके विपरीत, यदि पति उसके साथ रहने, पूजा की तैयारी में मदद करने और चांद निकलने तक उसका साथ देने का फ़ैसला करता है, तो पत्नी को भावनात्मक सहारा मिल सकता है.

यह भी पढ़ें: करवा‌ चौथ- प्रेम, विश्वास और समर्पण से जुड़ा भारतीय संस्कृति का अनूठा पर्व (Karwa Chauth – A unique festival in Indian culture, rooted in love, trust and devotion)

यह ज़रूरी नहीं कि पति भी निर्जला व्रत रखे. वह अपनी पत्नी के लिए सरगी तैयार कर सकता है, घर के कामों में हाथ बंटा सकता है या शाम को उसके पसंदीदा तरीक़े से त्योहार मना सकता है. कई बार प्रेम का सबसे ख़ूबसूरत रूप यही होता है कि हम अपने साथी की कठिनाई को समझें और उसे कम करने की कोशिश करें.

सेहत का भी रखें ध्यान

अगर पति या पत्नी किसी बीमारी से पीड़ित हैं, नियमित दवाएं लेते हैं या लंबे समय तक भूखे-प्यासे रहने से उन्हें परेशानी हो सकती है, तो व्रत रखने से पहले चिकित्सकीय सलाह लेना ज़रूरी है. केवल परंपरा निभाने या साथी को ख़ुश करने के लिए अपनी सेहत को जोख़िम में डालना उचित नहीं है.

आख़िरकार, करवा चौथ का असली अर्थ केवल चांद देखकर व्रत खोलना नहीं, बल्कि एक दूसरे के प्रति प्रेम, विश्वास और ज़िम्मेदारी को महसूस करना भी है. पति व्रत रखे या न रखे, यदि वह अपनी पत्नी की भावनाओं का सम्मान करता हैऔर जीवन के हर उतार-चढ़ाव में उसके साथ खड़ा रहता है, तो यही किसी भी रिश्ते की सबसे बड़ी ख़ूबसूरती है.

– नीरज कुमार मिश्रा

यह भी पढ़ें: कहानी- वही चांद (Short Story- Wahi Chand)

Karva Chauth

Photo Courtesy: Freepik

Share this article