बदलापुर, जॉनी गद्दार के बाद एक बार फिर श्रीराम राघवन ने साबित कर दिया कि थ्रिलर-सस्पेंस मूवी बनाने में उन्हें महारात हासिल है. अंधाधुन फिल्म की कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है, परत-दर-परत आश्चर्य, रोमांच, रहस्य, बेचैनी भी बढ़ती चली जाती है. बहुत दिनों बाद सशक्त कथा-पटकथा और निर्देशन का संगम देखने को मिला. फ्रेंच शॉर्ट फिल्म द पियानो ट्यूनर पर आधारित फिल्म की जान है आयुष्मान खुराना और तब्बू.

आयुष्मान ने एक नेत्रहीन संगीतकार के रूप में ग़ज़ब का अभिनय किया है. राधिका आप्टे ने उनका बख़ूबी साथ निभाया है.
किस तरह राधिका व आयुष्मान मिलते हैं, फिर राधिका उन्हें अपने पिता के पब में पियानो प्लेयर का जॉब दिलवा देती हैं. कहानी में ट्विस्ट तब आता है, जब तब्बू के पति तब्बू को सरप्राइज़ देने जाते हैं और उनका मर्डर हो जाता है. फिर तब्बू और उनका प्रेमी लाश को ठिकाने लगाने में अचानक घर पहुंचे अंधे आयुष्मान की भी मदद लेते हैं. फिर शुरू होता है- लालच, धोखा, फरेब का मायाजाल और इससे जुड़ा हर कलाकार उसमें फंसता चला जाता है.
बहुत दिनों बाद ग्रे शेड में तब्बू ने बेहद प्रभावशाली अभिनय किया है. उनकी भूमिका डर, चिढ़, घबराहट, ग़ुस्सा सब कुछ पैदा करती है. आयुष्मान का क़िरदार पूरी फिल्म में रहस्य से भरपूर रहता है. कभी लगता है कि ऐसा हो सकता है, तो कभी लगता है नहीं यह ठीक नहीं है. साथी कलाकारों में अनिल धवन, जाकिर हुसैन, अश्विनी कालसेकर ने भी बेहतरीन अभिनय किया है. अमित त्रिवेदी, रफ़्तार, गिरीश नकोड का संगीत यूं तो अधिक बांधे नहीं रखता, पर कहानी को फ्लो में भी ले जाता है.
लवयात्री
प्यार के सफ़र में न जाने कितने मंज़र मिले..
कुछ दर्द से बंधे, कुछ दिल से मिले…
कुछ ऐसा ही महसूस होता है लवयात्री को देखकर. अब यह दर्शकों पर ही निर्भर है कि वे क्या सोचते हैं. सलमान ख़ान के बैनर तले बनी लवयात्री प्यार करनेवालों को पसंद आ जाए, इतना ही बहुत है. हीरो आयुष शर्मा की नवरात्री में हीरोइन वारिना हुसैन से मुलाक़ात, दोस्ती, प्यार, फिर घरवालों का विरोध… वही आम-सी कहानी. संगीत और कुछ सीन्स अच्छे बन पड़े हैं. आयुष-वारिना की यह पहली फिल्म है, पर दोनों ही ख़ास प्रभावित नहीं कर पाए. रोनित रॉय, राम कपूर ने अपनी भूमिका के साथ न्याय किया है.
– ऊषा गुप्ता

