12th के बाद चुनें सही करियर ( Career Option After 12th )

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बारहवीं के बाद अक्सर स्टूडेंट्स समझ नहीं पाते कि वो किस दिशा में आगे बढ़ें ताकि उनका भविष्य सुरक्षित और सफल रहे. पैरेंट्स की सुनें या दोस्तों की, किसी प्रोफेशनल की सलाह लें या बड़े भाई की पढ़ाई को फॉलो करें, इस तरह की बातें आपको भी परेशान कर देती होंगी. आपकी इस उलझन को सुलझाने के लिए हमने बात की करियर काउंसलर मालिनी शाह से.

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कंज़्यूमर साइकोलॉजी
भारत मेें कंज़्यूमर साइकोलॉजी बड़ी ही तेज़ी से उभर रहा है. ये एक नए तरह का करियर है. विदेशों में ये बहुत पहले से पॉप्युलर है, लेकिन भारत में इसका क्रेज़ कुछ समय से बढ़ रहा है. आप भी अगर इस क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं, तो आपका भविष्य सुनहरा हो सकता है.

क्या है कंज़्यूमर साइकोलॉजी?
मार्केट में जाने के बाद सामान ख़रीदते समय कंज़्यूमर के दिमाग़ में क्या चल रहा होता है, उसके बारे में पता लगाना ही कंज़्यूमर साइकोलॉजी कहलाता है. बड़ी-बड़ी कंपनियां मार्केट में अपना प्रॉडक्ट लॉन्च करने से पहले इस तरह के प्रोफेशनल्स को कंपनी में रखती हैं ताकि उन्हें ग्राहकों के दिमाग़ के बारे में पता चल सके.

शैक्षणिक योग्यता
कंज़्यूमर साइकोलॉजी में करियर बनाने के इच्छुक व्यक्ति का बारहवीं पास होना ज़रूरी है. इस क्षेत्र में आप आसानी से सेटल हो सकते हैं और भविष्य में अपने जॉब से संतुष्ट हो सकते हैं.

क्या हैं कोर्सेस?
– कंज़्यूमर बिहेवियर साइकोलॉजी
– रिसर्च सर्वे मेथड
-ऑर्गनाइज़ेशनल साइकोलॉजी
– ब्रांड इमेज
– टारगेट मार्केट
– मोटीवेटिंग कंज़्यूमर
– डिसीज़न मेकिंग साइकोलॉजी

डिग्री कोर्सेस
कंज़्यूमर साइकोलॉजी में करियर बनाने के लिए आप डिग्री कोर्स कर सकते हैं. इसके बाद आप पोस्ट ग्रैज्युएशन भी कर सकते हैं. मास्टर करने के बाद आप आगे पीएचडी भी कर सकते हैं.

तकनीकी शिक्षा
इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए कंप्यूटर का ज्ञान होना आवश्यक है. साथ ही नई-नई तकनीक के बारे में भी अपडेट रहने की आवश्यकता होती है.

व्यक्तिगत विशेषता
इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए लोगों के बीच रहना और दूसरों के बारे में जानकारी निकालने की कला आनी चाहिए. साथ ही धैर्य भी ज़रूरी है.

प्रमुख संस्थान
इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए आप इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, बैंगलोर और इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, इंदौर से पढ़ाई कर सकते हैं. इसके अलावा बहुत से कॉलेज डिप्लोमा कोर्स भी कराते हैं.

रोज़गार के अवसर
इस क्षेत्र में रोज़गार के बहुत अवसर हैं. आप अपने घर से भी फ्रीलांस के तौर पर काम कर सकते हैं. कई कंपनियां ऐसे एक्सपर्ट्स को हायर करती हैं. बड़ी-बड़ी कॉर्पोरेट कंपनियां इस तरह के लोगों को फुल टाइम के लिए भी रखती हैं. देश के साथ ही विदेश में भी आप इस नौकरी का भरपूर फ़ायदा उठा सकते हैं.

पॉप्युलर करियर ऑप्शन
– मार्केटिंग कंसल्टेंट
– स्ट्रैटेडिक ब्रांडिंग कंसल्टेंट
– पब्लिक रिलेशन मैनेजर
– मार्केटिंग एग्ज़ीक्यूटिव्स

सैलरी
शुरुआत में आप 8,000 से 12,000 तक कमा सकते हैं. अनुभव बढ़ने के साथ ही सैलरी पैकेज भी बढ़ता रहता है. 2-3 साल के अनुभव के बाद आप बड़ी कंपनियों के साथ जुड़कर अच्छा-खासा पैसा कमा सकते हैं.

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हॉस्पिटल मैनेजमेंट
बदलते समय के साथ स्वास्थ्य क्षेत्रों में कई नए सेक्टर भी सामने आए हैं. इन्हीं सेक्टरों में से एक है हॉस्पिटल मैनेजमेंट. लोगों को बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए अस्पताल के मैनेजमेंट पर ख़ास ध्यान रखा जाने लगा है. स्वास्थ्य सेवाओं की व्यवस्था के लिए प्रबंधन में प्रशिक्षित प्रोफेशनल्स की मांग बढ़ गई है. आप भी अगर मेडिकल लाइन में रुचि रखते हैं, तो ये क्षेत्र आपके करियर के लिए बेहतर विकल्प हो सकता है.

क्या करते हैं?
हॉस्पिटल मैनेजमेंट में करियर बनाने वालों को हॉस्पिटल की सुविधाओं से जुड़ी सारी व्यवस्थाओं पर नज़र रखनी होती है. अस्पताल के प्रबंधन का भी ख़्याल रखना होता है. इसके साथ ही हॉस्पिटल मैनेजमेंट में करियर बनाने वाले वित्तीय नियोजन से लेकर कर्मचारियों की सुविधा तक का ख़्याल रखते हैं.

शैक्षणिक योग्यता
इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए कम से कम बारहवीं पास होना बहुत ज़रूरी है. इसके बाद अगर आप चाहें, तो हेल्थ केयर सर्विसेज़ में ग्रैज्युएशन और पोस्ट ग्रैज्युएशन भी कर सकते हैं.

कोर्स के दौरान
हॉस्पिटल मैनेजमेंट की पढ़ाई के दौरान प्रबंधकीय कौशल, प्रबंधन सिद्धांत, अकाउंटिंग और बिज़नेस कम्युनिकेशन का प्रशिक्षण, हॉस्पिटल सेवाओं की मार्केटिंग जैसी बातें भी सिखाई जाती हैं ताकि पढ़ाई के बाद आप अच्छे और सही तरी़के से अपने क्षेत्र में काम कर सकें.

संबंधित कोर्सेस
इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए आर्ट्स और साइंस दोनों स्ट्रीम के लोग उपयुक्त हैं. इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए बैचलर ऑफ हॉस्पिटल मैनेजमेंट और एमबीए इन हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन जैसे कोर्स कर सकते हैं.

प्रमुख संस्थान
– इंडियन सोसाइटी ऑफ हेल्थ एडमिनिस्ट्रेशन, बैंगलोर.
– आर्म्ड फोर्सेज़ मेडिकल कॉलेज, पुणे.
– इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ एंड मैनेजमेंट स्टडीज़, नई दिल्ली.
– टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज़, मुंबई.
– ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज़, नई दिल्ली.
– अपोलो इंस्टीट्यूट ऑफ हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन, हैदराबाद.

रोज़गार के अवसर
विभिन्न सरकारी और निजी अस्पतालों में, सार्वजनिक स्वास्थ्य विभागों में, फिटनेस सेंटर में, दवा कंपनियों में, हेल्थ सेक्टर फर्म में नौकरी के सुनहरे अवसर होते हैं. साथ ही विदेश में भी इस क्षेत्र में बहुत स्कोप है.

सैलरी
फ्रेशर के तौर पर शुरुआत में जूनियर हॉस्पिटल मैनेजर की पोस्ट मिलती है, जिसकी मासिक आय 8,000 से 12,000 तक होती है. अनुभव मिलने के बाद ये कमाई बढ़कर 40,000 प्रति माह हो जाती है.

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न्यूट्रिशनिस्ट
आज की भागदौड़ भरी ज़िंदगी ने लोगों के रहन-सहन और खान-पान पर बहुत प्रभाव डाला है. व्यस्तता के चलते लोग प्रायः अपने खान-पान का ध्यान नहीं रख पाते, जिससे आगे चलकर उन्हें कई दिक्क़तों का सामना करना पड़ता है. ऐसे में न्यूट्रिशनिस्ट का रोल बहुत अहम् होता है, जो लोगों को सही डायट के ज़रिए फिट रहने में मदद करता है. बारहवीं के बाद अगर आप बहुत ज़्यादा पढ़ाई नहीं करना चाहते, तो आहार विशेषज्ञ यानी फूड न्यूट्रिशनिस्ट/डाइटीशियन बन सकते हैं.

क्या करते हैं न्यूट्रिशनिस्ट?
डाइटीशियन विज्ञान का एक हिस्सा है, जहां इस बात का ख़्याल रखा जाता है कि आपका आहार आपके स्वास्थ्य के अनुकूल हो. डाइटीशियन आपकी उम्र, बीमारी आदि का ध्यान रखते हुए इस बात को सुनिश्‍चित करते हैं कि किस तरह का आहार आपको हेल्दी रख सकता है. इसके साथ ही आहार को किस तरह तैयार किया जाए, जो पूरी तरह से आपके अनुरूप हो, इस बात का ध्यान भी डाइटीशियन रखते हैं.

शैक्षणिक योग्यता
न्यूट्रिशनिस्ट बनने के लिए बारहवीं पास होना ज़रूरी है. बारहवीं में होम साइंस विषय लेने वालों को प्राथमिकता मिलती है. आगे की पढ़ाई के लिए 2 साल का न्यूट्रिशियन डिग्री कोर्स कर सकते हैं. इसके अलावा आप बीएसी (होम साइंस), एमएससी (फूड एंड न्यूट्रिशियन) में भी डिग्री ले सकते हैं.

प्रमुख संस्थान
– दिल्ली यूनिवर्सिटी, दिल्ली.
– इंदिरा गांधी नेशनल ओपन यूनिवर्सिटी, दिल्ली.
– बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी, झांसी, उत्तर प्रदेश.
– कोलकाता विश्‍वविद्यालय, कोलकाता.
– गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, अमृतसर, पंजाब.
– कानपुर यूनिवर्सिटी, उत्तर प्रदेश.
– महात्मा गांधी चित्रकूट ग्रामोदय विश्‍वविद्यालय, सतना, मध्य प्रदेश.
– जी. बी. पंत यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, पंतनगर, उत्तराखंड.
– मुंबई यूनिवर्सिटी, मुंबई.
– नागपुर यूनिवर्सिटी, नागपुर.

रोज़गार के अवसर
न्यूट्रिशन एक उभरता हुआ क्षेत्र है. इसमें जॉब की भरपूर संभावनाएं हैं. हॉस्पिटल, हेल्थ, कैंटीन, नर्सिंग केयर, कॉलेज और यूनिवर्सिटी में टीचर के रूप में आप काम कर सकते हैं. इसके अलावा केटरिंग डिपार्टमेंट, फाइव स्टार होटल, फूड मैन्युफैक्चरिंग रिसर्च लैब, चाइल्ड हेल्थ केयर सेंटर, ब्यूटी क्लीनिक, फिटनेस सेंटर और सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में भी आप अपना सुनहरा भविष्य बना सकते हैं. न्यूज़ पेपर, मैग़ज़ीन, टीवी चैनल आदि जगह भी आप काम कर सकते हैं.

सैलरी
इस फील्ड में सैलरी भी काफ़ी आकर्षक है. यदि आप ट्रेनी डाइटीशियन के रूप में करियर की शुरुआत करते हैं, तो आपकी न्यूनतम आय 10,000 रुपए प्रति माह होगी. 2-3 साल का अनुभव होने के बाद आप 25,000 रुपए से ज़्यादा हर माह कमा सकते हैं. फेमस होने के बाद सैलरी बहुत ज़्यादा हो जाती है.

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फार्माकोलॉजी
फार्मेसी एक ऐसा सेक्टर है, जिसमें मंदी के दौरान भी जॉब की कोई कमी नहीं रहती. बारहवीं के बाद ये एक अच्छा विकल्प है. करियर के लिहाज़ से ये एक शानदार सेक्टर है. यदि आपकी दिलचस्पी चिकित्सा क्षेत्र में है, तो फार्मेसी सेक्टर आपके लिए उपयुक्त होगा.

शैक्षणिक योग्यता
साइंस स्ट्रीम के साथ बारहवीं पास होना इस क्षेत्र के लिए ज़रूरी है. बारहवीं के बाद सीधे डिप्लोमा कोर्स करके आप इस क्षेत्र में करियर बना सकते हैं. बहुत से विश्‍वविद्यालय अंडर ग्रैज्युएट कोर्स के अलावा एम फार्मा कोर्स भी करवाते हैं. बारहवीं के बाद 2 साल का डी फार्मा कोर्स या चार साल का बी फार्मा कोर्स भी कर सकते हैं.

व्यक्तिगत योग्यता
फार्मेसी की दुनिया में आगे बढ़ना चाहते हैं, तो आपकी साइंस और ख़ासकर लाइफ साइंस तथा दवाइयों के प्रति दिलचस्पी होनी चाहिए. इससे जुड़े रिसर्च के क्षेत्र में काम करने के लिए आपकी दिमाग़ी क्षमता भी बेहतर होनी चाहिए. मेंटल स्किल के अलावा कम्युनिकेशन स्किल भी बेहतर होनी चाहिए.

तकनीकी योग्यता
वैसे तो इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए किसी ख़ास तरह की टेक्निकल नॉलेज की ज़रूरत नहीं होती, लेकिन कंप्यूटर का बेसिक ज्ञान होना बहुत ज़रूरी है ताकि इस क्षेत्र से जुड़ी जानकारी आप नेट के माध्यम से ले सकें.

कोर्स के दौरान
डी फार्मा और बी फार्मा कोर्स में दवा के क्षेत्र से जुड़ी उन सभी बातों की थ्योरेटिकल और प्रैक्टिकल जानकारी दी जाती है, जिनका प्रयोग आमतौर पर इस क्षेत्र के लिए उपयोगी होता है. इसके साथ ही फार्माकोलॉजी, इंडस्ट्रियल केमिस्ट्री, हॉस्पिटल एंड क्लीनिकल फार्मेसी, हेल्थ एज्युकेशन आदि विषयों के बारे में भी बताया जाता है.

प्रमुख संस्थान
– नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फार्मास्युटिकल एज्युकेशन एंड रिसर्च, पंजाब.
– कॉलेज ऑफ फार्मेसी, दिल्ली.
– बॉम्बे कॉलेज ऑफ फार्मेसी, मुंबई.
– गर्वमेंट मेडिकल कॉलेज, केरल.
– गुरु जंबेश्‍वर विश्‍वविद्यालय, हिसार, हरियाणा.
– बिड़ला इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी, पिलानी.
– बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी, उत्तर प्रदेश.
– राजीव गांधी यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज़, बैंगलोर.

रोज़गार के अवसर
दुनिया की बेहतरीन फार्मास्युटिकल कंपनियां भारत में अपना कारोबार कर रही हैं. इनके अलावा रैनबेक्सी, एफडीसी, कैडिला आदि कंपनियों में आप काम कर सकते हैं. फुल टाइम के अलावा आप पार्ट टाइम जॉब भी कर सकते हैं. आप अगर किसी के यहां नौकरी नहीं करना चाहते, तो अपना ख़ुद का मेडिकल स्टोर भी खोल सकते हैं. क्लीनिकल रिसर्च आउटसोर्सिंग सेक्टर में भी सुनहरा भविष्य है. नर्सिंग होम, अस्पतालों में भी आप काम कर सकते हैं.

सैलरी
शुरुआत में आपको 10 से 15,000 रुपए तक की नौकरी मिलती है, लेकिन बाद में अनुभव बढ़ने के साथ ही आपकी आमदनी भी बढ़ जाती है.

                                                                        – श्वेता सिंह

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