हैप्पी मैरिड लाइफ के लिए इन ग़लतियों से बचें (Dos and donts for happy married life)

हैप्पी मैरिड लाइफ की चाह हर कपल की होती है. शादीशुदा ज़िंदगी में कई बार ऐसे पल आते हैं, जब रिश्तों में पहले जैसी ताज़गी नहीं आ पाती. रिश्तों में नयापन लाना मुश्किल नहीं है, लेकिन इसके लिए दोनों को अपनी ओर से भी ज़रूरी प्रयास करने पड़ते हैं. ऐसा न करने पर उनके बीच की दूरियां बढ़ने लगती हैं. (Dos and donts for happy married life) वैवाहिक जीवन तभी खुशहाल बना रह सकता है, जब पति-पत्नी के बीच प्यार सलामत रहे.

Dos and donts for happy married life

बदलते व़क्त के साथ प्रोफेशनल लाइफ के बीच लगभग हर कपल इस एहसास को अपने जीवन में कायम रखने के लिए संघर्ष करता है, लेकिन सभी के लिए ऐसा करना आसान नहीं होता है. तब रिश्ते में कम होता प्यार और बढ़ती समस्याओं की वजह से कई कपल डाइवोर्स का डिसीजन लेते हैं, लेकिन क्या वाकई यह सही रास्ता है. आमतौर पर देखा गया है कि संयम की कमी और अधूरी उम्मीदें ही तलाक़ के बढ़ते मामलों के लिए ज़ि़म्मेदार है, लेेकिन समय रहते अगर इन समस्याओं को हल कर लिया जाए, तो आपका रिश्ता हमेशा बना रह सकता है, खुशहाल.

मेच्योेरिटी लेवल
रिश्ते में पैदा होनेवाले तनाव और मनमुटाव का कारण बताते हुए मैरिज कांउसलर डॉ. ओवैस अकरम फारूखी कहते हैं कि आजकल कपल्स के बीच सब्र नहीं होता. वे अपने रिश्ते को मेच्योर होने का व़क्त देना ही नहीं चाहते. उन्हें हर चीज़ परफेक्ट चाहिए, जो कि व्यावहारिक स्तर पर संभव नहीं हो पाती, लेकिन यह कोई बड़ी समस्या नहीं है. रिश्ते में आनेवाली इस तरह की द़िक्क़तों को आसानी से हल किया जा सकता है. इसके लिए बस आपको अपने भीतर झांकना होगा और हर वह कोशिश करनी होगी, जिससे आपकी शादीशुदा ज़िंदगी खुशहाल बनी रहेे. इसलिए अपना मेच्योरिटी लेवल डेवलप करें. इससे छोटी-छोटी बातों पर आपके बीच मनमुटाव भी नहीं होगा.

ना हो कम्यूनिकेशन गैप
भागदौड़भरी ज़िंदगी में पति-पत्नी मुश्किल से एक-दूसरे के साथ व़क्त बिता पाते हैं, जो कि किसी भी नए रिश्ते के लिए बेहद ज़रूरी होता है. ऐसे हालात में रिश्ते में इश्यू बढ़ते हैं, जो बिना कम्यूनिकेशन के नामुमकिन है. अधिकतर वर्किग कपल घर से 8 से 10 घंटे दूर रहते हैं. ऐसे में किसी भी मसले पर एक-दूसरे की राय लेने का इन्हें व़क्त ही नहीं मिल पाता. कम्यूनिकेशन किसी भी रिश्ते का आधार है. शादी के लिए तो यह ख़ासतौर पर ज़्यादा महत्वपूर्ण है. अपनी प्राथमिकताएं समझें और एक-दूसरे से बात करें. इसलिए कहा जाता है कि नए कपल्स को एक दूसरे के साथ शादी से पहले भी कुछ व़क्त बिताना चाहिए. जब ऐसा नहीं होता, तो इनमें से ज़्यादातर के बीच रोमांस पनप ही नहीं पाता. इसलिए एक दूसरे को क्वालिटी टाइम दें.

सपोर्ट करें
कई बार पति-पत्नी के बीच बेमतलब की ग़लतफ़हमियां आ जाती हैं और न सुलझ पाने की सूरत में बढ़ने लगती हैं. ऐसे में ज़रूरी है कि अपने पार्टनर पर भरोसा करें.

Dos and donts for happy married life

एक-दूसरे को बदलने की कोशिश न करें
अगर पत्नी अपने पति की बेस्ट फ्रेंड बन सके, तो इससे अच्छा और कुछ नहीं होता. इसके लिए आपको अपने खोल से निकलना होगा. दोस्तों की चाहतें, ख्वाहिशें अलग होती हैं. ज़रा सोचिए, आप जब अपने दोस्तों  से मिलते हैं, तो वो पल कितने सुकून और मज़े से बिताते हैं. अपने जीवनसाथी के साथ भी आपको यही करना होेगा. दोस्त बनने की पहली शर्त है कि एक-दूसरे को बदलने की कोशिश ना करें, एक-दूसरे की बात शेयर करें, मदद करें और एक दूसरे के साथ की सराहना भी करें और कोेई किसी पर हावी ना हो.

ज़्यादा रोकटोक न करें
अगर आपको लग रहा है कि ज़िंदगी में कहीं स्थिरता आ गई है, तो कुछ ऐसा काम कीजिए, जो आपको पसंद हो या आपने पहले कभी नहीं किया हो, या आपने पहलेे कभी नहीं किया हो. दोस्तों के साथ कहीं घूम आइए. किसी हॉबी क्लास में दाख़िला लीजिए. अगर आपके पति अपने दोस्तों के साथ शाम बिताना चाहें, तो उन्हें रोकें नहीं. यह ज़रूरी नहीं कि आप हर जगह साथ जाएं. एक-दूसरे को स्पेस दीजिए और ब्रेक लीजिए. मनमुटाव अपने आप दूर होते जाएंगे.

अपने लुक्स को नज़रअंदाज़ करना
कहीं ऐसा तो नहीं कि आप भी शादी के बाद अपना उस तरह ख़्याल नहीं रखतीं, जैसे शादी के पहले रखती थीं. ना आप अपने पहनने का ख़्याल रखती हैं और ना ही बढ़ती हुई चर्बी का. याद कीजिए, शादी के बाद के दिनों में आप दोनों कैसे दिखते थे. अगर ज़िंदगी में रोमांस बनाए रखना है, तो मन के साथ-साथ शरीर को भी चुस्त रखना होगा.

Dos and donts for happy married life

हर व़क्त शिकायत करना
कहीं ऐसा तो नहीं है कि आप दिन-रात बस अपनी समस्याओं के बारे में ही बात करते रहते हैं और आपका पार्टनर बस सुनता रहता है. अब आप उनकी भी सुनना शुरू कीजिए. आपके पार्टनर के पास भी  बहुत कुछ होगा, आपसे कहने को. घर की समस्याओं और बच्चों के अलावा भी बहुत कुछ वे आपसे शेयर करना चाहते होंगे. अक्सर पत्नियों की हर व़क्त की शिकायत की आदत से पति परेशान रहते हैं, जिससे रिश्ते में दूरियां बढ़ सकती हैं.

एक-दूसरे की पसंद-नापसंद को तवज्जो न देना
‘आप अपने भाई को फाइनेंशियली सपोर्ट क्यों कर रहे हैं,’ ‘मेरे लिए यह साड़ी क्यों लेेकर आए’, ऐसी हज़ार बातें हैं, जिनसे आप दोनों सहमत नहीं होते. आपकी तरह उन्हें भी आपकी कुछ बातें पसंद नहीं आती होंगी. मनमुटाव की बजाय बीच का रास्ता निकालें. अगर कोई बात आपको अच्छी नहीं लग रही, तो मन में रखने की बजाय उनसे कहें और सुनें भी. हो सकता हैं उनकी पसंद और शौक़ अलग हों.,

डॉ. ओवैस अकरम फारूखी मैरिज कांउसलर एवं मनोचिकित्सक, मेट्रो हॉस्पीटल, दिल्ली के अनुसार, “कोई भी शादी परफेक्ट नहीं होती है और इसे सही तरी़के से चलाने के लिए पति-पत्नी दोनों को ही साथ चलना होता है. अगर एक पहिया डगमगाएगा, तो दूसरे पर भी इसका असर पड़ता है. ज़रूरी है कि दोनों ही एक मेच्योरिटी लेवल का परिचय दें, तभी कोई भी शादी चल पाती है. पति और पत्नी दोनों को ही इसमें प्रयास करने होंगे. स़िर्फ एक-दूसरे पर इल्ज़ाम देने से अच्छा है कि दोनों पुरानी बातों पर ना जाकर एक नई शुरुआत करें.”

 

 

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