इंफ्लुएंसर, जिनके सोशल मीडिया के चमक के पीछे छुपी होती है मेहनत, संघर्ष और जुनून, जो उन्हें एक अलग पहचान देती है. आइए, मल्टी टैलेंटेड गुंजन सैनी से रु-ब-रु होते हैं.

"मुश्किलों से लड़ के मुझे निकाल लेती है.. गिरती हूं हर दिन मैं दोस्त, पर मेरी कविताएं मुझे संभाल लेती हैं..." क्या ख़ूब कहा है गुंजन सैनी ने. कविता, गीत, अभिनय न जाने कितना कुछ संजोया है उन्होंने. उनकी सफ़र की एक झलक.
भोपाल से ग्रेजुएशन करने के बाद नर्सिंग के लिए अप्लाई किया. फिर मास्टर डिग्री के लिए मुंबई आना हुआ. लेकिन क़िस्मत में तो कुछ और ही लिखा था.
साल 2018 में कंटेंट क्रिएटर के रूप में शुरुआत की, पर सही मायने में पहचान 2022-23 से मिली, जब जॉब छोड़कर पूरी तरह से इस काम में इंवॉल्व हो गई. एक साल का इंटर्नशिप भी किया.

मेरा यह मानना है कि इंस्टाग्राम के आने से हम जैसे इंफ्लुएंसर को काफ़ी फ़ायदा हुआ है. आज मुझे इस बात की बेहद ख़ुशी है कि मैं बहुत कुछ एक्सपेरिमेंट भी कर रही हूं. कविताएं, स्टोरी टेलिंग वगैरह करने का संतुष्टि भरा अनुभव रहा.
इस क्षेत्र में अपने इतने सालों के अनुभव से मैंने यह भी जाना कि आप कहां पर शूट कर रहे हैं, ये काफ़ी मायने रखता है. ख़ूबसूरत इंसान के साथ-साथ अच्छी जगह का भी होना बहुत ज़रूरी होता है. साथ ही आसान भाषा में अपनी बात कहना, जिससे लोग जुड़ सकें. यह सब मैजिकली वर्क करता है.
लाइव शो भी करती हूं. देशभर में काफ़ी शोज़ किए. अब विदेश में करने का इरादा है. मेरा ‘आबरा का डाबरा’ काफ़ी मशहूर हुआ. मेरी यह दिली ख़्वाहिश है कि मेरे मिलियन फॉलोअर्स हों.
- ऊषा गुप्ता

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