INTERVIEW: संगीत की कोई सरहद नहीं होती- ग़ुलाम अली (Music has no boundaries- Ghulam Ali)

1ग़ज़ल गायक ग़ुलाम अली की बेहतरीन नज़्मों और दिल को छू लेने वाली ग़ज़लों के दीवाने केवल पाकिस्तान में नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में हैं. ग़ुलाम अली की ग़ज़ल गायिकी का जादू सरहद पार भारतीय प्रशंसकों में सिर चढ़कर बोलता है और उनका भी कहना है कि संगीत की कोई सरहद नहीं होती और न कभी हो सकती है. अपने बेटे आमिर अली के नए अलबम ‘नहीं मिलना’ की लॉन्चिंग के मौके पर दिल्ली आए ग़ुलाम अली ने एक विशेष बातचीत में आधुनिक संगीत में सुधार की बात पर ज़ोर दिया.

ग़ुलाम अली से जब पूछा गया कि आपकी ग़ज़लों के भारत में बहुत प्रशंसक हैं, आपको क्या लगता है कि आपके बेटे को भी लोग उसी तरह से पसंद करेंगे, इस पर उन्होंने कहा, “यह आमिर के काम पर निर्भर करेगा. आमिर जितना अच्छा काम करेंगे, लोग उन्हें उतना पसंद करेंगे, फिर चाहे वह भारत हो या पाकिस्तान.”7ग़ुलाम अली बताते हैं, “मुझे संगीत की दुनिया में 60 साल से अधिक हो चुके हैं, लेकिन मैं अब भी ख़ुद को शागिर्द समझता हूं. मैं ऐसे कई रागों, सुरों और शास्त्रीय संगीत को सीखने का प्रयास करता रहता हूं, जिसे मैंने पहले नहीं सुना होता है. मैं उस चीज के पीछे पड़ जाता हूं और उसे लगातार सीखने की कोशिश करता रहता हूं.”

ग़ुलाम अली से जब पूछा गया कि क्या आपके प्रसंशक भारत में पाकिस्तान से अधिक हैं, तो इस पर उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, “मुझे भारत और पाकिस्तान दोनों देशों में ही प्यार मिलता है. यहां लोग ज़्यादा हैं, इसलिए यहां का प्यार भी ज़्यादा है.”

आधुनिक और पाश्चात्य संगीत के बीच ग़ज़लों के प्रशंसकों की घटती संख्या को स्वीकारते हुए ग़ुलाम अली ने बताया, “ज़ाहिर तौर पर ग़ज़लों के प्रशंसकों की संख्या कम हो रही है, लेकिन ग़ज़ल गायिकी और शास्त्रीय संगीत के माहौल में बढ़ने वाले बच्चे ग़ज़लों से अछूते नहीं हैं. भारत और पाकिस्तान में विदेशी संगीत का बोलबाला तेज़ी से बढ़ रहा है, लेकिन विदेशों में भी ग़ज़लों के दीवाने मिल जाते हैं.”8रैप, हिप-हॉप और तड़क-भड़क वाले संगीत से ग़ुलाम अली इत्तेफाक नहीं रखते. उनका कहना है कि इन गीतों का सिरा ही गलत होता है. ग़ुलाम अली बताते हैं, “इस तरह के गीत-संगीत के सिरे नहीं होते हैं और उनका कंपोजीशन भी अटपटा ही रहता है. शुद्ध संगीत दिल को छू लेने वाला होता है.”

उन्होंने कहा, “गायक, गीतकार, संगीतकार और संगीत से जुड़े तमाम लोगों को अच्छा संगीत देने की कोशिश करनी चाहिए. आजकल गीत लिखते वक़्त गीतकार का ध्यान अंग्रेज़ी और दूसरी भाषाओं की ओर अधिक होता है. गीत लिखने के लिए बहुत ही समझदारी होनी चाहिए.”6श्रोताओं तक कर्णप्रिय संगीत पहुंचाने और बनावट से भरे संगीत को दूर रखने के लिए ग़ुलाम अली का क्या सुझाव है?, पूछने पर उन्होंने कहा, “फिल्मी गीतों को आसान बनाकर लोगों के बीच पेश किया जा रहा है, जिससे उन्हें सुनने वालों की संख्या बढ़ रही है, लेकिन जो लोग गीतों को समझते हैं, वे इस तरह के संगीत को नहीं पसंद करते. हमेशा ही हल्की बात अधिक प्रसिद्ध होती है, लेकिन मेरे अनुसार वह शुद्ध संगीत नहीं है.”

उन्होंने कहा, “संगीत को पेश करने से पहले उसे सीखना और समझना बहुत ज़रूरी है. मैं अपने स्तर से इस तरह के संगीत को रोकने की कोशिश करता हूं और अपनी हद तक हर कोई इसे रोक सकता है.”

इस समय भारत-पाकिस्तान के संबंध उतार-चढ़ाव के दौर से गुज़र रहे हैं, लेकिन संगीत देशों की दूरियों को दूर कर रहा है. सरहदों को पार कर दोनों देशों में बह रही संगीत की बयार पर ग़ुलाम अली कहते हैं, “आवाज की कोई सरहद नहीं होती और संगीत को किसी सीमा में बांधा नहीं जा सकता.”

जब उनसे पूछा गया कि आपके भारत आने का बार-बार विरोध होता रहा है, इस पर आपका क्या कहना है, तब ग़ुलाम अली ने कहा, “किसी को यह नहीं सोचना चाहिए कि कौन गा रहा है, बल्कि यह सोचना चाहिए कि क्या गा रहा है. मैं जब टेलीविजन पर गाता हूं, तो मुझे पूरी दुनिया सुनती है. मुझे विरोधों की परवाह नहीं है.”