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लघुकथा- निंदक नियरे राखिए… (Short Story- Nindak Niyare Rakhiye…)

मुझसे लगभग आधी उम्र की, कंप्यूटर पढ़ाने वाली अध्यापिका मुझे हिंदी सिखाएगी? मैंने स्वर को संयत रखते हुए पूछ लिया, "कहानी में क्या नहीं पसंद आया?"
"कहानी का अंत! पति किसी दूसरी औरत के लिए पत्नी को छोड़कर विदेश चला जाता है. १५ साल बाद घर लौटता है, वो भी दूसरी औरत की मृत्यु के बाद… और पत्नी माफ़ कर देती है? क्या संदेश जा रहा है?"

कहानी समाप्त होते ही स्टाफ रूम में बैठे सभी अध्यापक "वाह… वाह…" कर उठे, लेकिन मैं संतुष्ट नहीं हुई, कारण था मिस श्यामला का तटस्थ चेहरा और उसकी कलफ लगी साड़ी की तरह ही अकड़ी हुई गर्दन!
"क्या हुआ? शायद तुमको कहानी पसंद नहीं आई." पता नहीं क्यों, उसकी प्रशंसा सुनने के लिए मैं बेचैन थी.
"जी मैडम! मुझे बिल्कुल पसंद नहीं आई."
मुझसे लगभग आधी उम्र की, कंप्यूटर पढ़ाने वाली अध्यापिका मुझे हिंदी सिखाएगी? मैंने स्वर को संयत रखते हुए पूछ लिया, "कहानी में क्या नहीं पसंद आया?"

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"कहानी का अंत! पति किसी दूसरी औरत के लिए पत्नी को छोड़कर विदेश चला जाता है. १५ साल बाद घर लौटता है, वो भी दूसरी औरत की मृत्यु के बाद… और पत्नी माफ़ कर देती है? क्या संदेश जा रहा है?"
"सही संदेश जा रहा है! स्त्री सहनशीलता और त्याग का प्रतीक है… परिवार को टूटने से बचा रही है…" मैंने समझाया.
"और पुरुषों के लिए ये संदेश जा रहा है कि कुछ भी करके आओ, माफ़ी मिल ही जाएगी. क्षमा चाहती हूं मै, लेकिन वाहवाही बटोरने से ज़्यादा समाज के प्रति दायित्व समझने की कोशिश कीजिए…"
ऐसी कटु आलोचना, वो भी इतनी अक्खड़ता से? दिनभर दिमाग़ ख़राब रहा… घर पहुंचते ही कामवाली ने एक पार्सल थमाया. नागपुर की संतरा बर्फी के साथ एक छोटा-सा पत्र.
"आशा जी, आप मुझे नहीं जानतीं, लेकिन आपने ही मुझे उबारा है. सारी विषम परिस्थितियों से निपटने का हौसला आपकी कविता 'संघर्ष के बाद जीत है…' से मिला, मेरा चयन बैंक में पी ओ के लिए हो गया है. धन्यवाद और मिठाई स्वीकार करें!"

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आंखें भर भी आईं और खुल भी गईं. तुरंत फोन उठाकर श्यामला को संदेश लिखा, "प्रिय श्यामला! वाकई एक लेखक का दायित्व मैं पूरी तरह से नहीं समझ पाई थी. कहानी का अंत बदल रही हूं… अब नायिका १५ साल बाद लौटे पति को क्षमादान नहीं देगी, उसको देखकर दरवाज़ा बंद कर देगी!"

Lucky Rajiv
लकी राजीव

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