दक्षिण दिशा की तरफ पैर करके क्यों नहीं सोना चाहिए? (Sleeping Positions: What Is The Best Direction And Position To Sleep In?)

दक्षिण दिशा की तरफ पैर करके सोना मना क्यों है? ये सवाल अक्सर आपके मन में भी आता होगा. आप अपने मन में कौंध रहे इस सवाल को कई लोगों से पूछते भी होंगे, लेकिन लोगों के पास सही जानकारी न होने के कारण आपको अपने सवाल का जवाब नहीं मिल पाता होगा. यदि हम हमारी धार्मिक मान्यताओं के बारे में रिसर्च करें, तो पाएंगे कि हमारी धार्मिक मान्यताएं वैज्ञानिक आधार पर बनाई गई हैं, ताकि धार्मिक मान्यताओं का पालन करते हुए हमें उनका वैज्ञानिक लाभ भी मिल सके. ऐसी ही धार्मिक मान्यताओं में से एक है दक्षिण की तरफ पैर करके न सोना. दक्षिण दिशा की तरफ पैर करके सोने के लिए मना क्यों किया जाता है? आइए, हम आपको बताते हैं.

sleeping direction

दक्षिण की तरफ पैर करके न सोने के पीछे ये धार्मिक मान्यता है
हमारे बुजुर्ग जब भी किसी नई जगह पर या किसी करीबी के घर सोने जाते हैं, तो सोने से पहले ये ज़रूर देखते हैं कि कहीं उनके पैर दक्षिण दिशा की तरफ़ तो नहीं हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार दक्षिण की तरफ पैर करके कभी नहीं सोना चाहिए. ऐसी धार्मिक मान्यता है कि हमें यशस्वी बनाने वाले पितरों का संबंध दक्षिण दिशा से है, इसलिए दक्षिण की तरफ़ पैर करके नहीं सोना चाहिए. इससे उनका अपमान होता है, जिससे हमारी यश-कीर्ति बढ़ने में बाधा आती है.

यह भी पढ़ें: कीर्तन और आरती में ताली क्यों बजाते हैं? (Spiritual And Health Benefits Of Clapping While Aarti And Kirtan)

 

सोने की पोजीशन से जुड़ी अन्य धार्मिक मान्यताएं:

1) शास्त्रों के अनुसार, सोने से पहले चित्त शांत रखना चाहिए.

2) सोने से पहले ईश्‍वर का ध्यान करना चाहिए और इस अनमोल जीवन के लिए आभार प्रकट करना चाहिए.

3) शास्त्रों के अनुसार, शाम के समय ख़ासकर गोधूलि बेला में कभी नहीं सोना चाहिए.

4) भोजन करते ही सो नहीं जाना चाहिए. सोने से दो घंटे पहले भोजन कर लेना चाहिए.

5) रात में जल्दी सोने और सुबह जल्दी उठने की आदत डालनी चाहिए, इससे तन और मन दोनों स्वस्थ और निरोगी रहते हैं.

यह भी पढ़ें: चरणामृत और पंचामृत में क्या अंतर है? (What Is The Difference Between Charanamrit And Panchamrit)

 

दक्षिण की तरफ पैर करके न सोने के पीछे ये वैज्ञानिक महत्व है
जब हम उत्तर की तरफ़ सिर करके सोते हैं, तब हमारा शरीर पृथ्वी की चुंबकीय तरंगों की सीध में आ जाता है. शरीर में मौजूद आयरन दिमाग़ की ओर संचारित होने लगता है. इससे अल्ज़ाइमर व दिमाग़ संबंधी बीमारियां व ब्लडप्रेशर होने की संभावना बढ़ जाती है. इसका एक महत्वपूर्ण आधार यह भी है कि आप अपने पूर्वजों, पितरों व बड़ों को मान-सम्मान दें.