कहानी- लाखों में…1 (Story Series- Lakhon Mein…1)

नैना ने झटके से अपना वॉर्डरोब खोला. एक सरसरी नज़र डालकर पट बंद करके वहीं बैठ गई. दिल धड़का. वह तो नील को छोड़कर मम्मी के घर जाने के लिए कपड़े लेने आई है. इन सबसे बेख़बर वह गिटार की धुन में खोया हुआ है. सोच के तो आई थी कि अपना सामान पैक करके उसके मुंह पर सीधा बोलूंगी, ‘लो, जा रही हूं मायके, अब तुम गिटार के साथ फुर्सत में दिल बहलाओ,’ पर यहां आकर महसूस हुआ कि परले दर्जे के लापरवाह के ऊपर पूरा घर कैसे छोड़ जाए. वह तो गिटार में डूब जाएगा और चोर घर साफ़ कर जाएंगे.

‘’नैना,  तेरा चुनाव ही ग़लत था. अबकी बार नील को बोल आना कि अब उसकी ज़िंदगी में वापस नहीं आऊंगी…”

“वापस नहीं आऊंगी का क्या मतलब है मम्मी? घर है मेरा, जब मर्ज़ी है आऊंगी-जाऊंगी और आप तो पार्क में ही इंतज़ार करना, घर मत आना.”

“सुन, फोन करूंगी, अपने पास ही रखना.” रागिनी की आवाज़ पर बिना प्रतिक्रिया दिए वह तेज़ी से अपने अपार्टमेंट की ओर बढ़ गई.

बैठक का दरवाज़ा अभी भी अधखुला था. जिस तरह से वह छोड़ गई थी, बिल्कुल वैसे यानी कि नील ने सर उठाकर देखने की ज़हमत भी नहीं उठाई कि उसकी बीवी उसे छोड़कर मायके चली गई थी.

नील आंखें मूंदे गिटार के तारों को छेड़ रहा था और वह सामने खड़ी उसे घूर रही थी. हैरानी हुई कि कोई इस दर्जे तक असंवेदनशील कैसे हो सकता है. वह दो किलोमीटर दूर स्थित अपने मायके भी हो आई और वह अभी भी उसी मुद्रा में बैठा गिटार के तारों को टुनटुना रहा था. गिटार की धुन में ये भी नहीं जान सका कि वह चार घंटे से घर पर नहीं है.

डायनिंग टेबल के पास ‘मैं मम्मी के घर जा रही हूं’ की पर्ची उसे मुंह चिढ़ा रही थी यानी कि इस पर्ची को अभी तक नील ने देखा भी नहीं. नैना ने पर्ची निकालकर उसके टुकड़े कर दिए, फिर ग्लास से पानी भरकर पीया और ग्लास ज़ोर से टेबल पर पटक दिया. आवाज़ सुनकर गिटार पर फिरती उंगलियां रुक गईं. आंखें खोलकर उसने नैना को देखा और बड़े इत्मीनान से बोला, “चाय लाओ, थक गया हूं… बदन अकड़-सा गया है.” उसने अंगड़ाई ली. अपना मोबाइल डायनिंग टेबल पर छोड़कर नैना दनदनाती हुई बेडरूम में चली आई. बाहर से आकर अपना मोबाइल डायनिंग टेबल पर छोड़ना उसकी आदत में शुमार था.

नैना ने झटके से अपना वॉर्डरोब खोला. एक सरसरी नज़र डालकर पट बंद करके वहीं बैठ गई. दिल धड़का. वह तो नील को छोड़कर मम्मी के घर जाने के लिए कपड़े लेने आई है. इन सबसे बेख़बर वह गिटार की धुन में खोया हुआ है.

सोच के तो आई थी कि अपना सामान पैक करके उसके मुंह पर सीधा बोलूंगी, ‘लो, जा रही हूं मायके, अब तुम गिटार के साथ फुर्सत में दिल बहलाओ,’ पर यहां आकर महसूस हुआ कि परले दर्जे के लापरवाह के ऊपर पूरा घर कैसे छोड़ जाए. वह तो गिटार में डूब जाएगा और चोर घर साफ़ कर जाएंगे.

“नैना, मम्मीजी का फोन आ रहा है.” नील की आवाज़ से वह चौंकी, वह उसका मोबाइल लिए खड़ा था.

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नैना ने जैसे ही फोन पर ‘हेलो’ कहा,  रागिनी की उत्तेजना भरी आवाज़ आई, “सुन, इस बार उसकी भोली शक्ल पर तरस मत खाना. ग़लती सुधारने का मौक़ा मिला है, तो उसे गंवाना ठीक नहीं.”

“मम्मी, मैं आपको बाद में फोन करती हूं.” अचरज हुआ कि उसकी मम्मी उसका घर तुड़वाने में इतनी हड़बड़ी क्यों कर रही हैं.  और ये ग़लती सुधारने की क्या बात कर रही हैं, कहीं उसकी शादी तुड़वाकर अपनी सहेली के देवर के बेटे से करने की तो नहीं सोच रही हैं? हे ईश्‍वर! उसकी मम्मी नील की फिल्मी खड़ूस सास निकली.

उसने अपना सर पकड़ लिया. नील उसे यूं परेशान देखकर उसके क़रीब बैठ गया. फिर उसका हाथ सहलाते हुए कहने लगा, “क्या हुआ, मम्मी का फोन क्यों आया था? वहां सब ठीक तो है न?”

“हां, सब ठीक है. तुम जाओ और गिटार बजाओ.” यह सुनकर वह उसके क़रीब बैठ गया और उसके हाथों को सहलाते हुए बोला,  “मैं जानता हूं कि इन दिनों मैं तुम्हें ज़रा भी समय नहीं दे पाया, पर यकीन मानो, इस बार कुछ ऐसा बजाना चाहता हूं, जो लोगों के मन को छू जाए. कल का दिन बहुत ख़ास है. कल मेरे गिटार ने मिस्टर थॉमस को इम्प्रेस कर दिया, तो वो यूरोप जानेवाले वेव्ज़ ग्रुप के लिए मुझे सिलेक्ट कर सकते हैं. यूरोप ट्रिप मेरी तरफ़ से तुम्हारे लिए जन्मदिन का तोहफ़ा होगा.” उसकी बात पर नैना ने कोई प्रतिक्रिया  नहीं दी, तो वह बोला, “तुम बहुत थकी लग रही हो. चाय बनाकर लाता हूं.”

“नहीं, मैं बनाती हूं.” कहते हुए वह उठ गई.  नील की बातों और भावनाओं से वाकिफ़ होकर सहसा उसे ग्लानि हुई.

चाय के खदबदाते पानी के साथ एक चलचित्र-सा घूम गया. आज रविवार का दिन- सुबह छह बजे से लेकर दोपहर तीन बजे तक नील  गिटार में खोया रहा. ऊबी हुई-सी पहलू बदलते उसने नील को आवाज़ लगाई, पर नील के कानों तक उसकी आवाज़ मानो पहुंची ही नहीं. पिछले दो हफ़्तों से नील गिटार पर किसी ख़ास धुन को निकालने की कोशिश कर रहा है, पर आज तो हद ही हो गई. नैना की अप्रत्याशित प्रतिक्रिया के पीछे पिछले कई  दिनों से नील का अपने गिटार के प्रति अति समर्पण भाव और उसके प्रति उदासीनता थी.

वह चिल्लाई, “नीलाक्ष, सुन भी रहे हो, मैं दीवारों से बात नहीं कर रही हूं.” नैना की तेज़ आवाज़ पर वह निस्पृह भाव से उस पर सरसरी दृष्टि डालकर गिटार के तारों में उलझ गया. चिढ़कर नैना ने उसके हाथों से गिटार लगभग छीना, तो नील बौखलाकर अपने गिटार को उसकी गिरफ़्त से बचाता हुआ  झल्लाया, “नैना प्लीज़, बिहेव. ये कोई तरीक़ा है. अभी इसे कुछ हो जाता तो.”

Minu tripathi

    मीनू त्रिपाठी

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