कहानी- याद न जाए… 2 (Story...

कहानी- याद न जाए… 2 (Story Series- Yaad Na Jaye… 2)

 

वह नलिनी के प्यार में दीवानों की तरह दाढ़ी बढ़ाए यहां-वहां घूमता फिर रहा था. शायद नलिनी अपना फ़ैसला बदल दे, पर नलिनी हवा का रूख देखकर पलट चुकी थी. ख़ुशी-ख़ुशी शादी कर पति के साथ विदा हो गई और वह यही समझता रहा कि नलिनी ने यह शादी मजबूरी में की थी.

 

 

… कुछ ही दिनों बाद जब नलिनी ने उसे बताया कि उसकी शादी एक इनकम टैक्स आॅफिसर से तय हो गई है, तो सुनकर उसे ऐसा लगा जैसे उसके पैरों तले से किसी ने ज़मीन खींच ली हो. न उसने अपनी पढ़ाई पूरी की थी, न उसके पास कोई नौकरी थी. किस आधार पर उसका हाथ मांगता. सुनकर नलिनी के सामने गिड़गिड़ाने की हद तक निरीह हो आया था कि उसकी नौकरी लगने तक वह अपनी शादी टाल दे, पर नलिनी ने अपने पापा से विद्रोह नहीं कर सकने की विवशता दिखा कर उससे विदा ले ली थी और उसके प्रेम का अध्याय वही समाप्त हो गया था.<br>
फिर भी वह नलिनी के प्यार में दीवानों की तरह दाढ़ी बढ़ाए यहां-वहां घूमता फिर रहा था. शायद नलिनी अपना फ़ैसला बदल दे, पर नलिनी हवा का रूख देखकर पलट चुकी थी. ख़ुशी-ख़ुशी शादी कर पति के साथ विदा हो गई और वह यही समझता रहा कि नलिनी ने यह शादी मजबूरी में की थी. उन्ही दिनों उसके दादा प्रभाशंकरजी अपना इलाज करवाने पटना आए हुए थे. बहू से पोता का हाल जान कर उन्होंने सीतामढ़ी लौटने की बजाय वही रूकने का फ़ैसला कर लिया. सीतामढ़ी के एक काॅलेज के प्रिंसपल के पद से रिटायर होनेवाले प्रभाशंकर जी अपने कार्यकाल में न जाने ऐसे कितने ही मजनुओं को रास्ते पर ला चुके थे. फिर अपने ही पोता की ज़िंदगी कैसे बर्बाद होने देते.
जल्द ही अपने प्रयासों से उसे यह समझाने में सफल हो गए थे कि उसके पास अच्छी नौकरी नहीं होने के कारण ही नलिनी का साथ छूट गया था. नवीन के मन के इसी कुंठा को हवा देकर प्रभाशंकरजी ने उसके अंदर के प्रचंड अग्नि को भड़का दिया. फिर तो वह अपने आपको साबित करने के लिए पढ़ाई में कड़ी मेहनत शुरू कर दिया और दो वर्ष में ही वह सिविल सर्विसेज में चुन लिया गया और वह भी इनकम टैक्स आॅफिसर बन गया.
फिर तो ट्रेनिंग समाप्त होते ही उसकी शादी सरला से करवा दी गई, ताकि वह अपनी ज़िंदगी नए सिरे से शुरू कर सके. तब से उसकी ज़िंदगी सरला के आसपास सिमट कर रह गई थी,‌ पर वह दिल से कभी सरला का नहीं हो सका.

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सरला एक सुलझी हुई संस्कारी और सहनशील लड़की थी. उसके व्यवहार से घर के लोग काफ़ी ख़ुश रहते थे, पर उसकी कोई भी अच्छाई नवीन को नज़र नहीं आती. वह जब अपने हिसाब से सरला की तुलना नलिनी से करता, तो उसे लगता उसने एक नयाब हीरा खो दिया. अगर नलिनी उसे मिल जाती, तो शायद वह दुनिया का सबसे ख़ुशनसीब आदमी होता. वह घर से उदासिन ही रहता घर की सारी ज़िम्मेदारियां सरला पर छोड़ अपने कामों में रमा रहता. उसके दो बच्चे हुए प्रशांत और रेवा. उन दोनो की ज़िम्मेदारियां भी सरला ही संभालती. पति के इस तरह के आचरण से वह काफ़ी परेशान और दुखी रहती.
नवीन के इस बेगानेपन के कारण धीरे-धीरे बच्चे और पत्नी सब उससे दूर होने लगे. बच्चें पहले छोटे थे, तो उससे कुछ फ़रमाइशें कर भी देते थे, पर जैसे-जैसे बड़े हो रहे थे सिर्फ़ मां से ही मतलब रखते. सरला भी किसी फ़ैसले में अब उससे सलाह लेने की ज़रूरत नहीं समझती. वह अवसाद में डूबा रहने लगा था. उन्ही दिनों आॅफिस में अपने सीनियर अखिलेशजी से उसकी काफ़ी अच्छी दास्ती हो गई थी…

अगला भाग कल इसी समय यानी ३ बजे पढ़ें… Rita kumari

रीता कुमारी 

 

 

 

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