वास्तु से सुधारें बिगड़े काम (Repair of damaged architectural work)

 

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अक्सर हम देखते हैं कि कुछ लोग बहुत मेहनत करते हैं, अपने काम के प्रति निष्ठावान होते हैं, अच्छे स्वभाव के होते हैं, पर इन सब के बावजूद उन्हें कई बार असफलता ही हाथ लगती है. उनका काम बिगड़ जाता है फिर चाहे वो घर, परिवार, नौकरी, व्यापार, पढ़ाई किसी भी क्षेत्र का क्यों न हो. वास्तु द्वारा बिगड़े हुए कार्यों को सुधारा जा सकता है. आइए, इसी के बारे में विस्तार से जानते हैं.

ड्रॉइंगरूम
* कभी भी ड्रॉइंगरूम यानी बैठक में भारी परदे नहीं लगाएं. इससे धूल-मिट्टी परदे में चिपक जाती है, जिससे गृहिणियां अक्सर बीमार पड़ जाती हैं.
* जहां तक हो सके लकड़ी के फ़र्नीचर से कमरे को सजाएं, जैसे- कुर्सी, सोफा, टेबल आदि. दरअसल लकड़ी का फ़र्नीचर होने से सूर्य-प्रकाश, हवा आदि से प्रवाहित होनेवाली ऊर्जा व्यक्ति विशेष पर सीधे पड़ती है यानी लकड़ी इन्हें अपने में सोख नहीं लेती. इसके विपरीत लोहे, स्टील जैसी अन्य
धातुओं के फ़र्नीचर होने पर सभी ऊर्जा ज़मीन के अंदर चली जाती है.
* बहुत भारी पीतल के सजावट के सामान ड्रॉइंगरूम में दक्षिण व नैऋत्य दिशा में रखें.
* ताज़े फूल बैठक में लगाने से उनकी सुगंध से घर का वातावरण अच्छा रहता है, जबकि नकली फूल बनावटी जीवन का प्रतीक हैं.
* कई बार व्यक्ति अपने व्यवसाय से संबंधित बातें ड्रॉइंगरूम में करते हैं. ऐसे में अपनी दिशा के अनुरूप बैठकर वार्तालाप करें यानी जो दिशा व्यक्ति विशेष के अनुकूल हो, यदि वो वहां बैठें, तो सदैव सफलता हाथ लगती है. बिगड़े हुए काम बनते हैं.

कमरे का रंग
ड्रॉइंगरूम का रंग अगर गृहस्वामी से मैच नहीं करता, तो कभी भी उसका मन बैठक में नहीं लगेगा. उसका जो भी व्यवसाय है, उसमें वो सफल नहीं हो पाएगा. हल्के रंग ख़ासकर क्रीम रंग, जो सबको सूट करता है अर्थात् किसी भी लग्न प्रधान व्यक्ति को सूट करता है, इसे कमरे में लगवाएं. वैसे भी यह लक्ष्मी का प्रिय रंग है.

बेडरूम
इसका चुनाव व्यक्ति विशेष की दिशा पर निर्धारित किया जाता है. कमरे का प्रकाश बहुत अधिक तीव्र न रखें. हवा आने के लिए सही खिड़की लगी होनी चाहिए. बेडरूम में अपने किसी भी मित्र का चित्र नहीं लगाएं. इससे नकारात्मक ऊर्जा का प्रभाव संचित होता है.

कमरे का रंग
बेडरूम में गहरे रंग के प्रयोग से बचें. कमरे में सदैव हल्के रंग लगाएं. इससे संबंधों में मधुरता बनी रहती है.

कमरे में पलंग
कमरे का पलंग लकड़ी का ही हो, किसी धातु का न हो. पलंग की ऊंचाई, लंबाई, चौड़ाई व्यक्ति के अनुरूप होनी चाहिए. बिस्तर नर्म होना चाहिए और चद्दर अधिकांशत: स़फेद रखनी चाहिए या हल्के क्रीम रंग की. व्यक्ति के अनुरूप रंग नहीं हुआ, तो व्यक्ति तकलीफ़ में आ जाता है. अत: इन पहलुओं पर भी ग़ौर करें.

बच्चों की पढ़ाई
बच्चों का कमरा या मेज़ पूर्व या उत्तर दिशा में रखें. सबसे शुभ पूर्व होता है, क्योंकि यहां से सूर्य का प्रकाश आता है. उनके कमरे में थोड़े खिलौने वगैरह लगा दें और किसी भी प्रसिद्ध व्यक्ति का चित्र लगाएं, जो उन्हें हमेशा प्रेरित
करते रहें कि कैसे इन महापुरुषों ने जीवन में संघर्ष किया और महान बने. उनसे कभी नकारात्मक बातें न करें, हमेशा सकारात्मक बातें ही करें.

पूजाघर
घर में मंदिर पूर्वोत्तर (ईशान) दिशा में शुभ है. पश्‍चिम और दक्षिण दिशा में मंदिर नहीं रखना चाहिए. इसके अलावा मंदिर में मूर्ति बहुत ज़्यादा ऊंची या टूटी अथवा भगवान का चित्र कटे-फटे अवस्था में नहीं रखना चाहिए. जहां तक हो सके, केवल अपने आराध्य देव की और दो-तीन मूर्ति ही रखें. टूटी हुई, खंडित मूर्ति, पुरानी जगह या मंदिर से लाई हुई मूर्ति न रखें. धूप-दीप जलाएं, घंटी व शंख बजाने से नकारात्मक प्रभाव दूर होता है. शुद्ध वायु का प्रसार होता है.

रसोईघर
वेद, उपनिषद एवं समस्त वास्तु ग्रंथों के अनुसार, रसोईघर को अग्नि कोण में ही बनाना चाहिए. यदि ऐसा संभव नहीं हो, तो वायव्य कोण में भी रसोई बना सकते हैं. यदि यह भी संभव न हो, तो ईशान कोण को छोड़कर किसी भी कमरे के अग्नि कोण में रसोईघर बना सकते हैं, परंतु क्रमानुसार उसकी शुभता कम होती जाती है. ध्यान रहे, भोजन बनाते समय चेहरा पूर्व में रहे.

टॉयलेट और बाथरूम
प्राय: लोग बाकी सभी चीज़ें साफ़ रखते हैं, पर टॉयलेट व बाथरूम पर ध्यान नहीं देते. इसके कारण कई बार लोग फिसलकर गिर जाते हैं, जिससे हड्डी तक टूट जाती है. स्नानघर पूर्व दिशा और टॉयलेट दक्षिण और पश्‍चिम दिशा में होना चाहिए. मानसिक स्वास्थ्य के लिए टॉयलेट की सफ़ाई का विशेष रूप से ध्यान रखें.
विशेष: ईशान/नैऋत्य कोण में बाथरूम सदैव अशुभ होता है.

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भवन निर्माण के समय
कोई भी नया भवन निर्माण करते समय वास्तु नियमों का पालन करना चाहिए. निर्माण के पूर्व नक्शा भी वास्तु के अनुरूप ही बनाना चाहिए. जहां तक संभव हो, निर्मित भवन में तोड़-फोड़ नहीं करनी चाहिए. उपाय के द्वारा भी वास्तु-दोष निवारण किया जा सकता है, जैसे- उस वास्तु-दोष के निवारण हेतु दोषयुक्त दिशा या स्थान पर यंत्र स्थापित कर पूरे भवन के वास्तु-दोष की शांति के लिए मुख्य द्वार एवं अंदर के सभी कमरों के द्वारों पर शुभ प्रतीक चिह्न- घोड़े की नाल, स्वस्तिक, ओम आदि का प्रतीक चिह्न अंकित कर सकते हैं. तुलसी का पौधा दोषयुक्त स्थान/दिशा में रखकर लाभ उठाया जा सकता है. घर में अखंड रूप से श्रीरामचरितमानस का नवाह पारायण नौ बार करने से वास्तु जनित दोष दूर हो जाता है. वास्तु में विभिन्न दिशाओं, स्थानों और कोणों से किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है और इन्हें कैसे दूर करें? आइए, इन पर एक नज़र डालते हैं-

ईशान कोण (उत्तर/पूर्व)
ईशान कोण वास्तु में सर्वाधिक महत्वपूर्ण स्थान या दिशा है. यदि ईशान कोण दूषित है तो अन्य सारे स्थान/दिशा सही होने पर भी कोई लाभ नहीं. इस दिशा को हमेशा साफ़ रखें. यहां गंदगी नहीं होनी चाहिए. यह स्थान खाली होना चाहिए. इस स्थान को देवता का वास/स्थान माना गया है. यहां पूजा स्थल सर्वाधिक उपयुक्त है. इस दिशा में झाड़ू भूलकर भी न रखें.
विशेष: यह कोण बढ़ा हुआ हो, तो शुभ फलदायक होता है.

आग्नेय कोण ( दक्षिण/पूर्व)
इस दिशा में भारी सामान या गंदगी नहीं होनी चाहिए. पानी की टंकी (अंडरग्राउंड) कदापि नहीं होनी चाहिए.

नैऋत्य कोण (दक्षिण/पश्‍चिम)
परिवार के मुखिया के शयनकक्ष हेतु सर्वाधिक उपयुक्त है तथा दुकान के मालिक के लिए यह स्थान लाभदायक है. भारी मशीनें, भारी सामान इस दिशा में रखना चाहिए.
विशेष: नैऋत्य कोण में किसी भी प्रकार का गड्ढा, बेसमेंट, कुआं नहीं होना चाहिए. यह बहुत ही दुर्भाग्यपूर्ण होता है.

वायव्य कोण (उत्तर/पश्‍चिम)
शौचालय, सेप्टिक टैंक के लिए उपयुक्त. अध्ययन कक्ष, गैरेज के लिए लाभदायक. इस दिशा में दुकान का गल्ला, कैश बॉक्स नहीं रखना चाहिए.

ब्रह्म स्थान
भूखंड के बीच के स्थान (आंगन) को ब्रह्म स्थान की संज्ञा दी गई है. आंगन खुला एवं स्वच्छ होना चाहिए. जूठे बर्तन या गंदगी आंगन में नहीं होनी चाहिए. आंगन में किसी प्रकार का गड्ढा न हो.

– डॉ. प्रेम गुप्ता
वास्तु व हस्तरेखा विशेषज्ञ