RIP Lata Mangeshkar: अधूरी रह गई...

RIP Lata Mangeshkar: अधूरी रह गई लता मंगेशकर की प्यार की दास्तान, इस शख्स के लिए जिंदगी भर रह गईं कुंवारी(Untold love story of Lata Mangeshkar, remained unmarried throughtout her life)

स्वर कोकिला… सुरों की रानी…सुरों की मलिका… लता मंगेशकर जिनकी मंत्रमुग्ध कर देने वाली आवाज ने करोड़ों लोगों को दीवाना बनाया, जिनकी सुरीली आवाज़ ने न केवल फिल्म इंडस्ट्री, बल्कि दुनियाभर में जादू चलाया है… आज वो आवाज़ थम गई हमेशा के लिए. 92 वर्षीय लता मंगेशकर ने आज मुम्बई के ब्रीच कैंडी हॉस्पिटल में आखिरी सांस ली.

लता जी ने सात दशक के लंबे करियर में कई भारतीय भाषाओं में 30,000 से अधिक गाने गाए हैं… जिन्हें सर्वोच्च भारतीय नागरिक सम्मान भारत रत्न, पद्म भूषण, पद्मविभूषण, दादा साहब फाल्के अवॉर्ड समेत दर्जनों पुरस्कार से नवाजा जा चुका है.

लता मंगेशकर अपनी प्रोफेशनल लाइफ में सबसे सफल सिंगर रहीं, लेकिन निजी जिंदगी में उनका प्यार सफल नहीं रहा. वो अपने प्यार के लिए ताउम्र तड़पती रहीं. उन्हें जीवन में प्यार तो हुआ, लेकिन उनका प्यार अधूरा ही रहा, जिसकी वजह से उन्होंने कभी शादी भी नहीं की.

हालांकि लता जी ने कभी इस बारे में खुद कुछ नहीं कहा, लेकिन उन्हें करीब से जाननेवाले कहते हैं कि लता जी को एक महाराजा के सा​थ इश्क हो गया था. ये महाराज कोई और नहीं, बल्कि डूंगरपुर राजघराने के महाराजा राज सिंह से थे, जिन्हें लता मंगेशकर बेहद प्यार करती थीं.

ऐसे हुई थी महाराज राज सिंह से मुलाकात

राज सिंह लॉ की पढ़ाई करने के लिए मुंबई आए. राज सिंह लता के भाई हृदयनाथ मंगेशकर के अच्छे दोस्त थे. दोनों एक साथ क्रिकेट खेला करते थे. लता जी से उनकी मुलाकात तब हुई, जब एक बार क्रिकेट खेलने के बाद हृदयनाथ ने राज को घर चाय पर बुलाया गया. यहीं पहली बार राजसिंह ने लता को देखा और उनकी दोस्ती हो गई. मुंबई आने के बाद राज सिंह हृदयनाथ के साथ घर आने-जाने लगे. इसी दौरान लता मंगेशकर से उनकी दोस्ती हो गई, जो धीरे-धीरे प्यार में बदल गई. चूंकि तब तक लता जी गायकी के क्षेत्र में नाम कमा चुकी थीं, इसलिए मीडिया में उनके रिश्ते सुर्खियां बंटोरने लगे.

इसलिए शादी नहीं कर पाईं लता मंगेशकर

कहा जाता है कि दोनों अपने रिश्तों को लेकर सीरियस थे और शादी करके अपने रिश्ते को नाम भी देना चाहते थे, लेकिन ऐसा हो नहीं सका और दोनों की प्रेम कहानी अधूरी रह गई. बताया जाता है कि राज सिंह ने अपने माता-पिता से वादा किया था कि वो किसी भी आम घर की लड़की को उनके घराने की बहू नहीं बनाएंगे. उनके माता-पिता भी नहीं चाहते थे कि लता जी उनके घर की बहू बने. राज ने माता-पिता से किया अपना वादा अंतिम सांस तक निभाया.

लता जी को राज मिट्ठू कहते थे

भले ही दोनों ने कभी प्यार का इज़हार न किया हो, लेकिन दोनों एक दूसरे बेहद प्यार करते थे. राज लता को प्यार से मिट्ठू पुकारते थे. कहते हैं कि राज सिंह की जेब में हमेशा एक टेप रिकॉर्डर रहता था, जिसमें लता के चुनिंदा गाने होते थे. वो जब भी लता जी को मिस करते, उनके गाने सुनते.

और लता दीदी ज़िंदगीभर कुंवारी रहीं


हालांकि लता दी ने हमेशा यही कहा कि उनके ऊपर पूरे घर की जिम्मेदारी थी, इसीलिए उन्होंने कभी शादी नहीं की. भले ही लता जी अपनी जुबां से कुछ ना कहें, लेकिन इस राज के पीछे की सच्चाई कुछ और थी. उन्होंने अपने अधूरे प्यार के नाम पूरी ज़िंदगी कुर्बान कर दी. लता दीदी जीवन भर अविवाहित रहीं. राज सिंह भी भले ही लता जी से ब्याह नहीं किया, लेकिन फिर किसी से ब्याह नहीं किया और कुंवारे ही रह गए. इसके बाद राज सिंह 20 साल तक भारतीय क्रिकेट बोर्ड (BCCI) से भी जुड़े रहे. लता जी बहुत बड़ी क्रिकेट प्रेमी हैं. बताया जाता है कि राज की वजह से ही लता के अंदर क्रिकेट प्रेम जागा और लता जी की वजह से राज सिंह के मन में संगीत के प्रति प्रेम. 12 सितंबर 2009 को राजसिंह का देहांत हो गया और इसी के साथ इस अधूरी प्रेम कहानी का भी अंत हो गया.

×