वास्तु अलर्ट (Vastu Alert)

घर की सुख-शांति व समृद्धि के लिए वास्तु के नियमों का पालन करने के साथ ही कुछ ग़लतियों से बचना भी ज़रूरी है.

 

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* शुक्रवार व पूर्णिमा के दिन भूल कर भी न रोएं. इस दिन रोने से प्रतिष्ठा पर आंच आ सकती है और घर में भी क्लेश हो सकता है.

* घर में कभी मकड़ी के जाले न लगें इसका ख़ास ध्यान रखें, इससे लक्ष्मी का आगमन रुक सकता है.

* तिजोरी का मुंह उत्तर या पूर्व में शुभ होता है और यदि सामने खिड़की हो तो और भी उत्तम होता है. तिजोरी में किसी व्यक्ति से प्राप्त इत्र या सुगंधित  द्रव्य आदि न रखें, इससे आर्थिक त्रासदी व ऋण बढ़ सकता है.

* घर में टूटी मशीनें, टूटी कुर्सियां, टूटे कांच इत्यादि को संजोकर न रखें. ऐसा करने से कर्ज़ से कभी मुक्ति नहीं मिलती.

* सीढ़ियां मकान के दक्षिण, पश्‍चिम या नैऋत्य कोण में होनी चाहिए. सीढ़ियां ईशान कोण में बिल्कुल न हों. सीढ़ियों का चढ़ाव पश्‍चिम या दक्षिण में  होना चाहिए. सीढ़ियों की संख्या 10, 20, 30 इस प्रकार न हो.

* नए मकान में नए सामान का ही प्रयोग करना चाहिए. लोहा, लकड़ी, ईंट, पत्थर इत्यादि पुराना प्रयोग नहीं करना चाहिए. आजकल आर्थिक कारणों  से पुराने लोहे व लकड़ी का इस्तेमाल भी नये मकानों में लोग करते हैं, परन्तु यह उचित नहीं. ऐसा करने से वास्तुदोष का प्रभाव बढ़ सकता है.

* फर्श का ढलान किसी भी हालत में दक्षिण में न हो. इससे क़ानून या संबंधों में वाद-विवाद की स्थिति पैदा हो सकती है.

* यदि आप भी अक्सर दरवाज़े के पीछे खूंटी पर अपनी ड्रेस या कपड़े आदि टांग देते हैं, तो अपनी इस आदत को बदल दीजिए, क्योंकि ऐसा करने से  आप बेवजह अपमानित हो सकते हैं.

* यदि मटका चटक गया है, तो उसी दिन इसे हटा दें. इसी तरह चप्पल के ऊपर चप्पल न रखें. ये मानसिक अशांति के संकेत माने जाते हैं.

* ईशान भाग अधिक ऊंचा हो तो आर्थिक प्रगति में बाधा आएगी. साथ ही अन्य परेशानियां भी आ सकती हैं.

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* फर्नीचर का आकार गोल, त्रिकोण या षट्कोण न हो. इससे बनते कार्य रुक सकते हैं.

* घर के अंदर रामायण, महाभारत एवं अन्य प्रकार के युद्ध दृश्य आदि के चित्र या इसी तरह की कलाकृति या फिर उदास अथवा रुदन करते मनुष्य का  चित्र एवं अशुभ पक्षियों तथा कबूतर, कौआ, बाज, उल्लू आदि के चित्रों को भी नहीं लगाना चाहिए. स़िर्फ सौम्य स्वरूप चित्रों को ही सजावट हेतु घर में  लगाना चाहिए. ऐसा करने से घर का वातावरण ख़ुशहाल बना रहता है.

* कभी भी रोता हुआ चेहरा दर्पण में न देखें. ऐसा करने से कार्यों में बाधाएं आती हैं तथा अपमान का सामना भी करना पड़ सकता है.

* झा़ड़ू को पैर न लगाएं और न ही उसे क्रॉस करें, ऐसा करने से धन में कमी व कमरदर्द की समस्या हो सकती है.

* भूमि के आसपास ज़मीन में रहनेवाले जानवरों के बिल, गड्ढे, कीचड़, गंदा नाला नहीं होना चाहिए. इससे संतान पक्ष को हानि हो सकती है.

* किसी भी कमरे में झूमर या पंखा ठीक बीचोंबीच न लगाएं.

* दान या दक्षिणा देते समय मुंह पूर्व की ओर रखें, पश्‍चिम या दक्षिण में बिल्कुल न करें.

* चौराहे पर स्थित घरों में किसी-न-किसी कारण से अपयश बना रहता है. अतः इससे बचें.

* मकान बनवाते समय सबसे पहले ईशान कोण में भूमिगत पानी की टंकी या कुआं बनवाएं और उसी जल से चारदीवारी बनवाएं.