शुक्रवार, देवी लक्ष्मी की आराधना का दिन. आप पूरी श्रद्धा और निष्ठा के साथ देवी की पूजा करते हैं, भोग लगाते हैं, व्रत भी करते हैं. इसीलिए न कि देवी आपसे प्रसन्न हों और आपका घर धन-धान्य से भरा रहे. पर क्या आप जानते हैं कि देवी लक्ष्मी और उनके चित्रों में उनके आसपास दिखाई गई सभी वस्तुओं का उनके उद्भव का और उनसे जुड़ी मान्यताओं का भी एक प्रतीकार्थ है.

ये तो आप जानते ही होंगे कि वेदों में बताए गए सभी थॉट्स का पुराणो में अशिक्षित जनता को समझाने के लिए पर्सॉनिफिकेशन कर दिया गया.
अब धन की देवी लक्ष्मी को ही लीजिए. उनके चित्र में वो सभी चीज़ें शामिल की गईं, जिनसे धन सही तरीक़े से कमाने और पर्मानेंट बनाने के मार्ग दिखाए जा सकें. लोगों को प्रेरित किया जा सके कि वो धन को न केवल सही तरीक़े से कमाएं, बल्कि उसे सही तरीक़े से इस्तेमाल भी करें.
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आपने अर्थशास्त्र की प्रसिद्ध कहावत सुनी ही होगी. मनी इज़ अ गुड सर्वेंट बट बैड मास्टर, मतलब धन तभी तक सार्थक है, उपयोगी है जब तक आपमें उसे ख़र्च करने का विवेक है. यदि विवेक नहीं तो वो आपके पतन का ही कारण बनेगा. तो देवी लक्ष्मी के माध्यम से यही बताने की कोशिश की गई कि आप कैसे सही तरीक़े से धनार्जन करने के साथ सही तरीक़े से ही उसे ख़र्च करें, ताकि वो आपके उत्थान का साधन बने, पतन का नहीं.
पानी में उगकर भी पानी से अछूते रहने वाले कमल पर बैठती हैं देवी लक्ष्मी मतलब उसी के साथ रहती हैं जो वैभव जीते हुए भी घमंड से अछूता रहे.
एक हाथ आशीर्वाद, एक अभय मुद्रा में है मतलब धन विनम्रता के साथ निडर होकर इस्तेमाल करना है.
दो हाथों से सिक्के गिर रहे हैं, मतलब संवेदनशीलता के साथ किया गया सार्थक दान वैभव की स्थिरता के लिए ज़रूरी हैं.
देवी लक्ष्मी का जन्म सागर मंथन से हुआ है. सागर मंथन प्रतीक है हार्ड और शेड्यूल्ड मेहनत का जिससे प्राप्त धन ही देवी लक्ष्मी की श्रेणी में आता है. पर धन होता सागर की लहरों की तरह चंचल मतलब अस्थिर ही है. मतलब उसे निरंतर अपने साथ बनाए रखने के लिए अत्यंत जागरूक चतुराई की ज़रूरत होती है.
- भावना प्रकाश

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