- मैं जब चार साल की थी तब गोविंदा-करिश्मा कपूर के एक गाने की शूटिंग में उन्हें एक्टिंग करते और बार-बार चेंज करते देख, इस कदर रोमांचित हुई कि मैंने उसी समय हीरोइन बनने का फैसला कर लिया था.
- मेरी मां और बहन शाहीन मेरी लाइफ के सपोर्ट सिस्टम रहे हैं. उनसे मैं सब कुछ शेयर करती हूं. हां, रणबीर थोड़े अलग हैं. वे जहां शांत हैं, तो वहीं मैं बहुत बोलती हूं. लेकिन हमारा अपोजिट होना ही हमें एक करता है. हमें एक-दूसरे की ताक़त व कमज़ोरी का पता है और यही हमारे रिश्ते की मज़बूती भी है. और राहा हम दोनों की ख़ूबसूरत कड़ी है.
- कपूर और भट्ट फैमिली से जुड़े होने के कारण लोगों की अपेक्षाएं बहुत रहती हैं, जिसका प्रेशर तो रहता ही है. लेकिन दोनों को मैनेज कर लेती हूं. ख़ुद को ख़ुशनसीब मानती हूं कि मैं दोनों परिवार का हिस्सा हूं.
- मुझे एडीडी (अटेंशन डिफिस्ट डिसऑर्डर) की समस्या होने के कारण कॉन्सेंट्रट करने में बहुत परेशानी होती थी, पर अब ठीक है.
- मेरी कुछ कमज़ोरियां हैं, ख़ासकर जब मैं बहुत थक जाती हूं तब बेवजह रोने लगती हूं.
- राहा के रूप में मुझे सारी दुनिया की ख़ुशी मिल गई है. मैंने पहले से ही बेटे-बेटी दोनों के नाम सोच रखे थे. मैं उसमें ख़ुद को देखती हूं, जिसकी बेहद ख़ुशी होती है, पर राहा की परवरिश को लेकर थोड़ी घबराहट बनी रहती है. मैं स्वयं को आइडियल पैरेंट्स के रूप में नहीं देखती.
- हम महिलाओं के साथ जीवन में कई मुश्किलें आती रहती हैं. लेकिन समझदारी इसी में है कि कभी हार न मानें. यदि ख़ुद पर विश्वास रखें, तो हर मुश्किल आसान हो जाती है.
- ऊषा गुप्ता
