पुराने समय में भले ही यह माना जाता था कि पत्नी को पति की हर बात माननी चाहिए, लेकिन आज के दौर में रिश्ते की मज़बूती के लिए सही और ग़लत के बीच फ़र्क़ करना ज़रूरी है. अगर आप एक ख़ुशहाल रिश्ता चाहती हैं, तो इन स्थितियों में आपको अपनी बात मज़बूती से रखनी चाहिए और 'ना’ कहना सीखना चाहिए, ताकि आप अपनी सारी ज़िंदगी घुट-घुट कर नहीं, बल्कि अपने हिसाब से और ख़ुशी से जीएं.
ग़लत क़ानूनी काग़ज़ात पर साइन ना करें
अगर पति आपको किसी भी तरह के आर्थिक भ्रष्टाचार, टैक्स चोरी, जाली दस्तावेजों पर साइन करने या किसी के साथ पैसों की धोखाधड़ी में शामिल होने के लिए कहते हैं, तो कभी हां न कहें. याद रखें, क़ानूनी काग़ज़ात पर आपके हस्ताक्षर आपको सीधे तौर पर दोषी बना सकते हैं.
झूठ नहीं बोलना चाहतीं तो ना बोलें
कई बार पति के किसी ख़ास दोस्त का कहीं अफेयर चल रहा हो और उसकी पत्नी से ये सब छिपाने के लिए पति आपसे झूठ कहने को कहते हैं और आप अगर आप उनका साथ इस झूठ में नहीं देना चाहतीं तो साफ़ मना कर दें. जो ग़लत है वो ग़लत है. आप ऐसे झूठ का हिस्सा दोस्ती निभाने के लिए भी नहीं बनेंगी, ये उनसे साफ़ शब्दों में कह दें. आप वही करें, जो आपका दिल कहता है. इसके अलावा अगर घर-परिवार से जुड़ी किसी बात में वे आपसे झूठ बोलने को कहते हैं, तो आप मना कर सकती हैं.

जो ख़ुद को हो पसंद हो वही पहनें
कई बार ऐसा होता है कि महिलाएं पतियों के प्यार में इस कदर खो जाती हैं कि अपनी पसंद और नापसंद तो मानो भूल ही जाती हैं. लेकिन ऐसा करना सही नहीं है. अगर आपको जीन्स पहनना पसंद है और पति को नहीं है, तो उन्हें समझाएं और बताएं कि आपको क्या पहनना है किस रंग का पहनना है, कहां क्या ड्रेस पहनना चाहती हैं... ये आपका फ़ैसला होना चाहिए ना कि पति का. याद रखें कि जब किसी पत्नी को उसकी पसंद के कपड़े पहनने या अपनी पसंद के काम करने से रोका जाता है, तो वह धीरे-धीरे अपना आत्मविश्वास खोने लगती है. व्यक्ति अपनी पहचान भूलकर केवल दूसरों की कठपुतली बनकर रह जाता है. शादी से पहले उसका अपना एक स्टाइल होता है, वो कहीं खो जाता है. उसे ना खोने दें. बस इतना ध्यान रखें कि कहां क्या पहनना है, उसकी समझ आपको भी होनी चाहिए.
अपनी प्रोफेशनल लाइफ के फ़ैसले ख़ुद लें
अक्सर महिलाओं के साथ ये परेशानी आती है कि शादी के बाद वे जॉब करना चाहती हैं या नहीं, उनसे कोई पूछता नहीं है, बस फ़ैसला सुना दिया जाता है, हमारे पास किस चीज़ की कमी है, जो तुम्हें बाहर जाकर काम करना है, अभी अपना घर संभालो. कुछ सालों बाद कर लेना. लेकिन अगर इसके लिए आपका दिल नहीं मान रहा, तो साफ़-साफ़ इंकार कर दें. पति को बोलें कि घर दोनों का है, तो इसकी ज़िम्मेदारी भी दोनों ही निभाएंगे. एक अकेला ही अपना करियर क्यों क़ुर्बान करे? बच्चों के लिए क्या व्यवस्था करनी है, ये मिलकर तय कर लेते हैं. लेकिन किसी भी हालत में मैं अपनी जॉब नहीं छोड़ना चाहती. इस वजह से हो सकता है कुछ दिन तनाव रहे, लेकिन बात मानकर जो तनाव आप पूरी ज़िंदगी सहतीं, ये उससे यक़ीनन कम है.

मायके से दूरी बनाने को बोलें पति तो इंकार कर दें
जिस तरह एक बेटे का अपने माता-पिता के प्रति कर्तव्य होता है, ठीक उसी तरह एक बेटी का भी अपने माता-पिता के प्रति नैतिक और भावनात्मक उत्तरदायित्व है. शादी के बाद रिश्ता बदलता है, लेकिन ख़त्म नहीं होता. उनके बुढ़ापे या ज़रूरत के समय उनके साथ खड़े होना आपका अधिकार और धर्म दोनों है. ये भी हो सकता है कि आपके पति को आपके घरवाले पसंद ना हों, तो कोई बात नहीं. उनसे कहें कि आपको पसंद नहीं तो आप ना जाएं, लेकिन मुझे तो पसंद है, इसलिए मुझे जाने से आप नहीं रोक सकते. पति से साफ़ शब्दों में कह दें कि अगर पति अपने परिवार के साथ समय बिता सकते हैं, उनकी मदद कर सकते हैं, तो पत्नी को भी वही अधिकार मिलना चाहिए. रिश्ता बराबरी का होना चाहिए, न कि ग़ुलामी का.
इमोशनल एब्यूज़ को ना कहें
अगर आपके पति की भी आदत है वो रो-धो कर अपनी हर बात मनवा ही लेते हैं, तो इसमें उनकी नहीं आपकी ग़लती है, क्योंकि आपको ना कहना नहीं आता. अगर उन्हें आपके दोस्तों से मिलना पसंद नहीं, तो आपने उनकी बात पहली ही बार क्यों मानी. उन्हें कहें कि मेरा अपना भी कोई सोशल सर्कल है और मैं उसे नहीं छोड़ सकती. मनोविज्ञान की भाषा में, किसी व्यक्ति को उसके परिवार और दोस्तों से दूर करना Isolation (अलगाव) कहलाता है. यह नियंत्रण करने का एक तरीक़ा है, ताकि पत्नी पूरी तरह से पति पर निर्भर हो जाए और उसके पास कोई सपोर्ट सिस्टम न बचे. इसे पहचानना और शुरुआत में ही रोकना बहुत ज़रूरी है.
- शिखा जैन

