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ख़ुद को बचाएं गॉसिप गैंग से (Protect yourself from the gossip gang)

गॉसिप क्या है?
गॉसिप, गपशप या चर्चा, उसे कहते हैं, जो आमतौर पर उन लोगों के बारे में होती है, जो उस समय वहां मौजूद नहीं होते. इसे अक्सर ’इधर की बातें उधर करना’ भी कहा जाता है. यानी गॉसिप का मतलब किसी तीसरे व्यक्ति के इमेज से जुड़ी बातें करना होता है. इसमें झूठ हो सकता है, यह किसी की आलोचना भी हो सकती है. इससे सामने वाले की इमेज को भारी धक्का लगता है. जब उन्हें पता लगता है कि आप उनके बारे में गॉसिप कर रहे थे, तो रिश्ते हमेशा के लिए कमज़ोर हो जाते हैं, क्योंकि विश्‍वास टूट जाता है. इसलिए गॉसिप सोच-समझकर ही करना चाहिए.

गॉसिप किन-किन बातों पर होता है...

लड़के-लड़की को साथ में देख लिया, तो चक्कर है...
किसी लड़के को किसी लड़की के साथ देख लिया या फिर लड़की को लड़के के साथ देख लिया, तो तुरंत गॉसिप गैंग ये डिक्लेयर कर देता है कि फलाने का फलानि से चक्कर है. भले ही उनके बीच ऐसा कुछ ना हो और वे किसी काम के लिए आपस में मिले हों. लेकिन गॉसिपबाज आंटियों की नज़रों से बचना मुश्किल होता है. लेकिन ऐसी आंटियां शर्मिंदा तो तब होती हैं, जब पता चलता है कि जिन्हें बदनाम करने में उन्होंने कोई कसर नहीं छोड़ी, दरअसल, वे दोनों तो आपस में कजन है.

पर्सनल लाइफ के इशू पर
किसी की पर्सनल लाइफ के इशू पर चटखारे लेकर बातें करना भी आम बात है. भले ही वह इशू पत्नी को जॉब ना करने देना हो, घर में कोई नया सामान ना ख़रीदना हो, कंजूसी करना हो या बच्चों पर ज़्यादा सख्ती करनी हो, पड़ोस में ज़्यादा घुलना-मिलना ना हो. इन सब पर्सनल बातों का इशू बनते देर नहीं लगती, जबकि गॉसिप आंटियों का इससे कोई लेना-देना नहीं है, पर उन्हें अपनी आंखें ज़रूर सबके घरों में गड़ानी हैं.

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ऑफिस पॉलिटिक्स पर चर्चा करना...
अगर बॉस ने कलीग को कुछ कह दिया तो उसके पास जाकर सिम्पैथी दिखाना और उससे सारी बातें पूछना और फिर उन्हीं बातों में नमक मिर्च लगाकर पूरे ऑफिस में फैलाना ऐसे लोगों का काम होता है.

पति-पत्नी के बीच होने वाली टेंशन्स पर बात करना...
पति-पत्नी में झगड़ा होना आम बात है, लेकिन कई बार लड़ाई थोड़ी बढ़ भी जाती है. लेकिन अगर गॉसिप गैंग को पता चल गया कि मियां-बीवी में आजकल ठनी हुई है. फिर देखिए, कैसे इनके एंटीने खड़े होते हैं. इन मियां-बीवी को देखते ही वे इन्हें घूरकर ऐसा इनका इंस्पेक्शन करेंगी मानो पूरा एमआरआई ही कर दिया हो. फिर उनकी हर बात का जो इशू बनता है, वो देखने लायक होता है. उनकी लड़ाई को वो खाई ना बना दें तो कहना!
उनमें वो ग़लतफ़हमी तो पैदा करेंगी ही, साथ ही कॉलोनी के बच्चे-बच्चे को पता चल जाएगा कि शर्मा जी की बीवी उनसे नाराज़ हैं भले ही उनकी लड़ाई कब की सुलझ गई हो, पर इन आंटियों को कहां चैन आने वाला... ये तो हर पल ताक में लगी होती हैं कि कोई बात ज़रा भी पता चले, तो उसका गॉसिप बना अपने गैंग को पेश करें, ताकि चटखारे ले सकें.

गॉसिप

बच्चों पर गॉसिप
देखो उसका बच्चा कितना बिगड़ा हुआ है, इनके बच्चों का फ्रेंड सर्कल तो बहुत ही एडवांस है, इनके बच्चे तो कोई गुल खिलाकर ही रहेंगे, मिसेज गुप्ता जी के बच्चे तो नमस्ते भी नहीं करते, कोई एटिकेट्स ही नहीं सिखाए हैं इन्हें... ना जाने ऐसे कितने ही गॉसिप करते हैं.

गॉसिप के नुक़सान

- झूठी अफ़वाह फैलाना
- किसी को ग्रुप से बाहर करना या सिर्फ़ मज़े के लिए किसी का मज़ाक उड़ाना शामिल होता है.
- इससे अक्सर जलन, ग़ुस्से या असुरक्षा की भावना पैदा होती है.
- गॉसिप हमेशा सच नहीं होती. इसमें अक्सर अपनी तरफ़ से मिर्च-मसाला जोड़ दिया जाता है, जिससे बात का बतंगड़ बन सकता है.
- इससे किसी की रेपूटेशन ख़राब हो सकती है.
- यह अफ़वाहों को जन्म देती है.
- इससे रिश्तों में आपसी विश्‍वास कम होता है.
- कोई भी बात सीक्रेट नहीं रह पाती है. इस गॉसिप गैंग को कोई बात पता चल जाए चाहे वह बात कितनी भी कॉन्फिडेंशल क्यों न हो, वे उसे सब जगह फैला देती हैं, जिससे काफ़ी नुक़सान  होता है.
- ग़लत गॉसिप या बदनामी किसी को मानसिक रूप से इतना आहत कर सकती है कि वह डिप्रेशन या सुसाइड तक के बारे में सोच सकता है.

कैसे बचें गॉसिप करने वालों से

प्राइवेट ज़िंदगी अलग और प्रोफेशनल ज़िंदगी अलग-अलग रखें
आप अपनी व्यक्तिगत ज़िंदगी और प्रोफेशनल ज़िंदगी को अलग-अलग रखें, आपको इस फंडे को भूलना बिलकुल नहीं है. अपनी ऑफिस की बात परिवार में मौजूद गॉसिप करनेवालों से दूर रखनी है और परिवार की बात ऑफिस में गॉसिप करने वालों से, ये याद रखिए. इस तरह से दोनों ही ग्रुप कम से कम आपके बारे में तो गॉसिप नहीं करेंगे.

अपनी ब्रॉउंड्रीज़ तय करें
अगर कोई बार-बार आपके पास गॉसिप लेकर आता है, तो सीधे लेकिन विनम्र तरी़के से अपनी बात रखें. कहें, यार, मुझे दूसरों की पर्सनल लाइफ पर चर्चा करना थोड़ा असहज लगता है, चलो कुछ और बात करते हैं. इसके बाद वे दोबारा आपके सामने गॉसिप करने की हिम्मत नहीं करेंगे.

‘लिसनर’ न बनें
गॉसिप का ईंधन ’कान’ होते हैं. अगर आप सुन रहे हैं तो आप उसका हिस्सा हैं. अपनी प्रतिक्रिया बिल्कुल फीकी रखें (जैसे: अच्छा?, पता नहीं, शायद). जब लोगों को आपसे कोई उत्साहजनक प्रतिक्रिया नहीं मिलेगी, तो वे आपके पास आना कम कर देंगे.

गॉसिप

अपनी तरफ़ से गॉसिप ना करें
गॉसिप करनेवाला व्यक्ति तभी बेकार की चर्चा को आगे बढ़ा पाता है, जब सामनेवाला व्यक्ति उसमें अपनी तरफ़ से कुछ जोड़ता जाता है. अगर घर-परिवार की महिलाएं या जाननेवाले आपसे बेकार की गॉसिप कर रहे हैं, जिनमें आपकी बिल्कुल भी रुचि नहीं है, तो आप वहां शांत रहें और बातचीत में अपनी तरफ़ से बहुत कुछ ना कहें. इससे सामनेवाला व्यक्ति एक सीमा के बाद ख़ुद ही शांत हो जाएगा और आपकी प्रॉब्लम सॉल्व हो जाएगी.

गॉसिप को इग्नोर करें
जब गॉसिप शुरू हो, तो कहें, अरे, मुझे याद आया मुझे एक ज़रूरी कॉल करनी है या मेरा एक काम पेंडिंग है, मैं बाद में मिलता हूं... ऐसे करके वहां से निकल जाएं. इससे लोगों को समझ में आ जाएगा कि आप इंट्रेस्टेड नहीं हैं.

‘आई डोंट नो’ की ताक़त
गॉसिप करनेवाले लोग अक्सर आपसे कंफर्मेशन चाहते हैं. जब भी कोई पूछे, क्या तुमने सुना उसके साथ क्या हुआ? तो बस मुस्कुराकर कहें, नहीं, मुझे इस बारे में कोई जानकारी नहीं है. जब आप बार-बार ’अनजान’ बनेंगे, तो गॉसिप करनेवालों को आपमें रस मिलना बंद हो जाएगा.

बातों के टॉपिक चेंज करें
जब कोई चुगली शुरू करे, तो विषय को किसी काम की बात या न्यूट्रल टॉपिक पर ले जाएं. इससे वह बात कट जाएगी और सामनेवाले को समझ भी आ जाएगा कि आपको बातों के इन जाल में नहीं फंसाया जा सकता.

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अपनी निजी बातें शेयर ना करें
गॉसिप गैंग के सामने अपने निजी जीवन की बातें न साझा करें, वरना वे इसका लाभ उठाएंगे. आप उनसे इधर-उधर की बातें करें और चलता करें. इससे आप सेफ साइड पर रहेंगे और आपका रिश्ता भी उनसे ख़राब नहीं होगा.

प्रोफेशनल बनें
ऑफिस में आप काम करने जाते हैं, अपने घर के क़िस्से डिसकस करने नहीं. इसलिए वहां केवल काम से संबंधित बात करें और गपशप करनेवाले सहकर्मियों से दूर रहें. जब आप किसी को लिफ्ट ही नहीं देंगे, तो वे भी आपको लेकर कोई गॉसिप नहीं कर पाएंगे.
- शिखा जैन

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