अगर कोई ग़लती करता है, तो हम उसे उसकी ग़लती समझाते हैं और उसके व्यवहार की शिकायत करते है. एक आध बार ऐसा करना सही है, लेकिन अगर हम हर वक़्त अपनी शिकायतों का पिटारा खोले रखें, तो वह व्यक्ति इरिटेट हो जाएगा और उसे लगेगा कि इसे तो हर वक़्त शिकायत करने की आदत है.

दरअसल, इस दुनिया में कोई भी व्यक्ति पूरी तरह से परफेक्ट नहीं हो सकता और अगर उसकी ग़लतियों को लेकर बार-बार शिकायत की जाए, तो इससे सामनेवाला व्यक्ति चिढ़ने लगता है, जिसका असर आपसी रिश्तों पर भी नज़र आता है. अगर आप हर वक़्त दूसरों की शिकायत करने में लगे रहते हैं, तो लोग आपसे बचने लगते हैं. उन्हें लगता है कि आपको तो हर बात में प्रॉब्लम है, हर चीज़ ग़लत लगती है यानी आप नेगेटिविटी से भरे हुए इंसान हैं.
इतना ही नहीं, जिन लोगों की हर छोटी-छोटी बात को लेकर शिकायत करने की आदत होती है, उनसे कोई भी बात करना या दोस्ती करना पसंद नहीं करता. ऐसे में ज़रूरी है कि अपनी इस आदत को बदलें. तो चलिए आज हम आपकी इस समस्या को हल करने के कुछ आसान उपाय बता रहे हैं.
शिकायत करने के क्या कारण हैं?
रिसर्च से पता चलता है कि हर मिनट में एक बार शिकायत हो रही होती है. इसके अलावा, ज़्यादातर लोग दिन में कम से कम 15-20 बार शिकायत करते हैं. कुछ लोगों के लिए शिकायत करने से ख़ुद को रिलैक्स करने में मदद मिलती है.
शिकायत करना आपके दिमाग़ को नेगेटिव बना देता है
कनाडा के न्यूरोलॉजिस्ट डोनाल्ड हेब के अनुसार, शिकायत करना आपके मस्तिष्क को नकारात्मक बना देता है, ख़ासकर एक न्यूरोलॉजिकल स्तर पर. यह आपके मस्तिष्क को इतना प्रभावित करता है कि नकारात्मक सोच और बोल दोनों ही आपका अभिन्न अंग बन जाते हैं, इतना कि आप नकारात्मकता की तलाश करने लगते हैं.
आप शिकायत क्यों कर रहे हैं, पहले ये सोचें
अगर आप कुछ चीज़ें या व्यवस्थाएं ठीक करने के मक़सद से शिकायत कर रहे हैं, तो इसका पॉज़िटिव रिज़ल्ट आ सकता है और अगर आपको दूसरों के कामों में मीन-मेख निकालने की आदत है या फिर टाइमपास कर रही हैं, तो संभल जाएं. ये उल्टा असर भी कर सकता है. इसलिए कुछ बदलाव या कुछ सही करने के लिए ही शिकायत करें, न कि हर वक़्त किसी पर ग़ुस्सा निकालने के लिए.
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हर वक़्त पुरानी शिकायतों का पिटारा खोलना ग़लत है
क्या किसी एक छोटी सी बात पर शुरू हुई बहस में पिछले दस सालों की पुरानी ग़लतियां उखाड़ी जाती हैं? जब वर्तमान मुद्दे को छोड़कर पुरानी शिकायतों का पिटारा खोल दिया जाता है, तो स्वस्थ संवाद नहीं हो पाता है.
कभी कभी तारीफ़ भी करें
अगर आप हर वक़्त स़िर्फ शिकायत ही करेंगे, तो लोग आपको सुनना ही बंद कर देंगे और आपके कुछ भी बोलने का उन पर कोई असर नहीं होगा. लेकिन अगर कभी-कभी सामनेवाले की तारीफ़ भी कर दी जाए, तो रिश्तों में बैलेंस बना रहता है. फिर आपने अगर कभी उनकी कमी भी बताई, तो वह उसे सुधारने की कोशिश करेगा और बुरा नहीं मानेगा.
रेड फ्लैग को पहचानें
लगातार शिकायत करनेवाले व्यक्ति के डर से अगर दूसरा साथी अपनी बात कहना बंद कर दे या ‘इमोशनल विड्रॉल’ कर ले, तो समझें कि शिकायतें अब मानसिक प्रताड़ना का रूप ले रही हैं. अगर ऐसा हो रहा है, तो जल्द से जल्द अपनी आदत बदलें वरना मुश्किल हो जाएगी. आप अपने बहुत से रिश्ते खो देंगे.
शिकायत करने का भी एक तरीक़ा और समय होता है
एक चीज़ हमेशा ध्यान रखें कि जब शिकायत दस लोगों के बीच में की जाए, तो वो शिकायत नहीं, बल्कि बुराई बन जाती है. इसलिए शिकायत भी करनी है, तो अकेले में शांति से समझाते हुए करें. अगर शिकायत कर भी रही हैं तो सीधे प्रहार न करके उन्हें समझाकर कहें, ‘देखो तुमने उस दिन भी यही किया था, पर तब मां नहीं बोलीं, लेकिन तुम अब ऐसा मत करो.’

ख़ुद को भी परखें
कई बार हम किसी और का ग़ुस्सा कहीं और निकाल रहे होते हैं. यही कारण है कि हम बेवजह की बातें करके सामनेवाले को जलील करने में लग जाते हैं जबकि उसकी कोई ख़ास ग़लती भी नहीं होती है. इसलिए शिकायत भी सोच-समझ कर करें, जैसे- ‘क्या मैं अपनी नौकरी या किसी और बात का ग़ुस्सा पार्टनर पर निकाल रहा/रही हूं?’ या ‘क्या मैं ख़ुद से बहुत ज़्यादा परफेक्शन की उम्मीद करता हूं और वही उम्मीद दूसरों पर थोप रहा हूं?’
पॉज बटन का इस्तेमाल करें
जब भी आप शिकायती शख़्स बनने की तरफ़ बढ़ रहे हों, तो ज़रा ठहरे और कुछ बातों पर आत्म मंथन कर लें जैसे-
- क्या यह बात बोलना अभी ज़रूरी है?
- क्या इसे बोलने का लहज़ा सही है?
- क्या इससे समस्या हल होगी या स़िर्फ और क्लेश बढ़ेगा?
नो-कंप्लेंट डे ट्राई करें
अगर हर वक़्त आप शिकायतों में लगे रहते हैं, तो एक दिन ऐसा करें कि ख़ुद को रिलैक्स करें और पूरा दिन किसी की कोई शिकायत ना करें. आप ये भी तय करें कि इस दिन आप स़िर्फ अच्छी बातें ही करेंगे .. तो देखना आप ख़ुद में अच्छा फील करेंगे और नेगिटिविटी दूर होगी और आप पॉज़िटिव बातें करने लगेंगे.
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इन स्टेटमेंट्स का प्रयोग करें
‘तुम घर साफ़ नहीं रखते’ की जगह कहें, ‘मुझे अच्छा लगेगा अगर हम मिलकर घर को व्यवस्थित रखें.’
‘तुम खाना अच्छा नहीं बनाती हो’ की जगह कहें, ‘आज मटर पनीर तुम मेरी रेसिपी से मेरे साथ बनाना, तुम्हें पसंद आएगा.’
- शिखा जैन

