यह बात तो तय है कि अगर हमारी सुबह अच्छी होगी तो पूरा दिन भी बेहतर गुज़रता है. एक फ्रेश मॉर्निंग पूरा दिन बना देती है, लेकिन सवाल यह है कि मॉर्निंग को अच्छा बनाएं कैसे? जवाब सीधा सा है कि अपने मॉर्निंग रिचुअल को ऐसा बनाएं कि आपका पूरा दिन बन जाए. तो इसी विषय को आगे बढ़ाते हैं और जानते हैं कि मॉर्निंग रिचुअल कैसा होना चाहिए.

क्या होता है मॉर्निंग रिचुअल?
* यह एक तरह से सुबह की दिनचर्या है, जो सोच-समझकर, पूरी सतर्कता से नियमित रूप से की जाती है.
* यह उस सामान्य रूटीन से अलग है, जिसमें जल्दी-जल्दी काम पूरा करके हम तैयार होते हैं.
* रिचुअल का एक उद्देश्य होता है, जिसमें ध्यान लगाना, डायरी लिखना, स्विमिंग जाना, डांसिंग करना, योग या स्ट्रेचिंग करना जैसे काम शामिल होते हैं, ताकि मन और शरीर पूरे दिन के लिए तैयार हो सके.
* मॉर्निंग रिचुअल का मुख्य उद्देश्य ख़ुद को शांत और तनावमुक्त करना होता है, ताकि दिनभर में कोई भी सिचुुएशन आ जाए, आप उस पर तुरंत रिएक्ट नहीं करेंगे.
* यह डेली रूटीन से अलग है. इसमें आप ख़ुद को ऊर्जावान, मन को शांत और प्रसन्न रखने के लिए गतिविधियां करते हैं, ताकि दिनभर आप ज़्यादा ख़ुश, प्रोडक्टिव और फोकस्ड रहें.
कैसा हो मॉर्निंग रिचुअल, ताकि दिन बने बेहतर
- सुबह थोड़ा जल्दी उठें, ताकि आपके पास वक़्त हो और हड़बड़ी न हो.
- सुबह का पहला एक घंटा आप अपने रिचुअल को दें.
- इसमें आप मेडिटेशन और डीप ब्रीदिंग कर सकते हैं.
- इसके बाद बारी आती है एक्सरसाइज़ की, जिसमें स्ट्रेचिंग, योग, वॉकिंग शामिल है.
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- आपको अगर स्विमिंग का शौक है, तो पूल में उतरकर भी ख़ुद को एनर्जेटिक बना सकते हैं.
- आप चाहें तो अपने मनपसंद म्यूज़िक को सुनकर सुकून महसूस कर सकते हैं या फिर डांस करके भी एनर्जी महसूस की जा सकती है.
- पोषण और हेल्दी डायट लें जिसमें सबसे पहले आता है हाइड्रेशन. ख़ुद को हाइड्रेट रखें. पानी या नींबू पानी, दही या छाछ- जो भी आपको पसंद हो, उनका सेवन करें. रिसर्च बताते हैं कि हेल्दी ब्रेकफ़ास्ट आपको दिनभर एनर्जेटिक तो रखता ही है, साथ ही डायबिटीज़, मोटापे जैसी कई अन्य बीमारियों के ख़तरे को भी कम करता है.
- पूजा ज़रूर करें, इससे एक अलग ही तरह की पॉज़िटिविटी महसूस होती है और घर का वातावरण भी शुद्ध होता है.
- सुबह हमेशा पॉज़िटिव सोच के साथ उठें. इससे आपकी मेंटल हेल्थ बेहतर रहेगी और स्ट्रेस भी कम होगा. शरीर के साथ-साथ मन को भी फ़िट रखना ज़रूरी है.
- फेस पर एक स्माइल रखें और बिना किसी शिकायत के ख़ुश होकर जोश के साथ दिन शुरू करें.
- एक डायरी मेंटेन करें, जिसमें अपने रूटीन और दिनचर्या को लिखें. आप किस तरह से अपना हर दिन बेहतर व ख़ास बना सकते हैं, उससे संबंधित बातें लिखें. इससे आपको मेंटल पीस मिलेगा.
- सुबह के कुछ काम की तैयारी रात को ही करने की आदत डाल लें, जैसे- कल क्या पहनना है उसे तैयार कर लें, अगर आप हाउसवाइफ़ या वर्किंग भी हैं, तो ब्रेकफास्ट की तैयारी करके रख लें, जैसे- चॉपिंग, आटा गूंथना या जो भी बनाना हो, उसका बैटर रेडी कर लें.
- इन सबके अलावा डिजिटल डिटॉक्स भी बहुत ज़रूरी है. सुबह उठते ही फ़ोन न देखें. दिन में एक या दो घंटे डिजिटल दुनिया, लैपटॉप, मोबाइल आदि से दूर रहें और वीकेंड पर अपनों के साथ टाइम स्पेंड करें.

- अपने मॉर्निंग रिचुअल में रोज़ ख़ुद से एक प्रॉमिस करें, जैसे- सोमवार को प्रॉमिस करें कि आज मैं कोई अच्छा काम करूंगा/करूंगी, किसी की मदद करें या लोगों को कॉम्प्लिमेंट दें, मंगलपरी का प्रॉमिस- आज पूरा दिन ग़ुस्सा नहीं करना और स्ट्रेा नहीं लेना, बुधवार का प्रॉमिस- आज अपने रिलेटिव्स से फोन पर कनेक्ट करेंगे या दूर रहनेवाले दोस्तों का हालचाल लेंगे, गुरुवार का प्रॉमिस- शाम को मंदिर जाएंगे और ख़ुद भी आज हेल्दी ही खाएंगे, शुक्रवार का प्रॉमिस- स्ट्रे एनिमल्स को खाना खिलायेंगे, शनिवार का प्रॉमिस- फैमिली मेंबर्स को कुछ सरप्राइज़ देंगे, संडे का प्रॉमिस- अपना फेवरेट फूड बनाएंगे और अपने बारे में कुछ अच्छा सोचेंगे.
- ज़रूरी नहीं कि जो यहां बताया गया हो उसी क्रम में इसे करना है. यह मात्र एक उदाहरण है, आप अपने हिसाब से अपने प्रॉमिस डिसाइड करें.
- मॉर्निंग में यह संकल्प लें कि अब से रोज़मर्रा के कुछ छोटे-छोटे काम खुद करेंगे, जैसे- आलमारी में अपने कपड़े ख़ुद ठीक करके रखना, अपने कपड़ों को प्रेस करना, जूतों को पॉलिश करना आदि. इससे आपको एक कॉन्फिडेंस मिलेगा कि आप किसी पर डिपेंड नहीं हो और घर के कामों में हाथ भी बंटा रहे हो. साथ ही आप फ़िज़िकली एक्टिव भी रहेंगे और आपको पता होगा कि आपका कौन सा सामान कहां रखा है.
- रोज़ सुबह एक मोटिवेशनल कोट ज़रूर पढ़ें और उसे फ़ॉलो भी करें.
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मॉर्निंग रिचुअल का फ़ायदा क्या है और यह क्यों ज़रूरी है?
सुबह की नियमित दिनचर्या अपनाने से मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य बेहतर होता है. रिसर्च बताते हैं कि जागने के तुरंत बाद हमारा मस्तिष्क पॉज़िटिव विचारों को ग्रहण करने के लिए सबसे ज़्यादा तैयार रहता है. सुबह के मात्र 10 से 15 मिनट का समय अपने लिए निकालने से स्ट्रेस लेवल कम हो सकता है, सोच बेहतर होती है और आप ज़्यादा फोकस्ड और शांत महसूस करते हैं, जिससे दिनभर का काम ज़्यादा बेहतर होता है.
- गीता शर्मा

