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किचन में इस्तेमाल होने वाले बर्तनों की भी होती है एक्सपायरी डेट (Kitchen Utensils Also Come With Expiry Dates Know Here)

जब हम कोई फूड आइटम ख़रीदते हैं तो सबसे पहले उसकी एक्सपायरी डेट चेक करते हैं, लेकिन खाना बनाने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले किचन के पुराने, घिसे-पिटे और आउटडेटेड बर्तनों की तरफ़ हमारा ध्यान बिलकुल नहीं जाता है. क्या आप जानते हैं कि हेल्दी और सेफ किचन के लिए बर्तनों की नियमित जांच और उन्हें समय-समय पर बदलना बहुत ज़रूरी है. क्योंकि किचन में इस्तेमाल किए जाने वाले बर्तनों की भी एक्सपायरी डेट होती है?

घर में रखा कोई भी सामान जब पुराना होता है या इस्तेमाल नहीं होता है, तो हम उसे बाहर निकाल देते हैं. लेकिन रोज़मर्रा की जिंदगी में हम अपने किचन में इस्तेमाल होने वाले बर्तनों पर कम ध्यान देते हैं. सेहत की दृष्टि से किचन में इस्तेमाल होने वाले बर्तन बहुत महत्वपूर्ण होते हैं. जैसे-जैसे बर्तन पुराने होते जाते हैं. उनकी क्वालिटी लाइफ भी घटती जाती है और पुराने होने पर ये बर्तन सेहत के लिए नुक़सानदायक हो सकते हैं.

1.  नॉनस्टिक पैन और तवा: सावधानी से करें इस्तेमाल

एक्सपायरी टाइम: हर 2-3 साल में. जब भी पैन या तवे पर स्क्रेच पड़े तो समझ जाएं कि बर्तन की एक्सपायरी डेट करीब आ गई है.

नॉनस्टिक कुकवेयर ख़ासतौर से पैन और तवे को रोज़ाना इस्तेमाल करने पर उनकी टेफ्लॉन कोटिंग ख़राब हो जाती है, उन पर खरोंच लग जाती है, तो इन बर्तनों से निकलने वाला विषैला केमिकल आपके खाने में मिक्स हो सकता है. लगातार ऐसे बर्तनों का इस्तेमाल करने पर सेहत को नुक़सान हो सकता हैं.

कब करें रिप्लेस? जब बर्तन पर खरोंच लगी हो.

  • बर्तन की परत निकलने लगी हो.
  • जब बर्तन घिस जाएं तो.
  • बर्तन टूटे या मुड़ें हो.
  • तेल डालने के बावजूद खाना नॉनस्टिक बर्तन पर चिपके तो.

स्पेशल टिप्स: नॉनस्टिक तवे पर मेटल के स्पैचुला का इस्तेमाल न करें.

–  नॉनस्टिक बर्तनों में जब भी खाना बनाएं, तो धीमी आंच पर पकाएं.

2. स्टेनलेस स्टील कुकवेयर: टिकाऊ है लेकिन जीवनभर का साथ नहीं  

एक्सपायरी टाइम: यदि आप अपने स्टील के बर्तनों की अच्छी तरह देखभाल करते हैं, तब भी 10-15 साल से ज़्यादा नहीं.

स्टेनलेस स्टील की कड़ाही, सॉसपैन, प्रेशर कुकर काफ़ी सालों तक हमारा साथ निभाते हैं और किचन के लॉन्ग टाइम हीरो बने रहते हैं. स्टील के बर्तन टॉक्सिंस रिलीज तो नहीं करते, कभी-कभी उनमें जंक लग जाता है. कई सालों तक लगातार इस्तेमाल करने के कारण इनका शेप ख़राब हो जाता है. कई बार नमक और एसिडिक फूड बनाने के कारण स्टील के बर्तनों का रंग फीका पड़ जाता है

कब करें रिप्लेस? खाना पकाने पर जब स्टील के बर्तन जलने लगे.

– यदि बर्तन पर जंग के धब्बे या गहरी खरोंच दिखाई दे.

– जब बर्तन का बेस मुड़ा हुआ हो तो.

स्पेशल टिप्स: स्टील के बर्तनों को कठोर स्क्रबर या स्टील वूल से साफ न करें. इससे साफ़ करने पर स्टील के बर्तनों पर खरोंच लग सकती है.

– बेकिंग सोडा और पानी का पेस्ट लगाकर स्टील के बर्तन साफ़ करें.

– विनेगर और पानी को मिक्स करके उबाल लें. इस सोलुशन से बर्तन साफ़ करने पर चमक उठेंगे.

3. एल्युमीनियम के बर्तन: किफ़ायती लेकिन विवाद का विषय

एक्सपायरी टाइम: रोज़मर्रा के जीवन में इस्तेमाल करते हुए 5-7 साल से अधिक नहीं.

कुछ घरों में आज भी खाना बनाने के लिए एल्युमीनियम के बर्तन इस्तेमाल किए जाते हैं. हेल्थ एक्सपर्ट्स का मानना है कि खाना बनाने के लिए एल्युमीनियम के बर्तनों का इस्तेमाल न करें. क्योंकि एल्युमीनियम का अधिक उपयोग करने से अल्जाइमर जैसी न्यूरो डीजेनेरेटिव बीमारियों के होने की आशंका होती है.

कब करें रिप्लेस? जब एल्युमीनियम के बर्तन की टेफ्लॉन की परत उखड़ने लगे.

– खाने का स्वाद बदला हुआ महसूस हो.

– बर्तन का रंग बदल रहा हो.

– अगर बर्तन का निचला हिस्सा टेढ़ा हो जाए, तो खाना ठीक से नहीं पकेगा.

स्पेशल टिप: स्टील के बर्तनों का इस्तेमाल करें.

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photo source: freepik

4. कच्चे लोहे के बर्तन: पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलनेवाले बर्तन

एक्सपायरी टाइम: अच्छी तरह से साज-संभाल किया जाए तो कई सालों तक चलते हैं.

कच्चे लोहे से बने तवे और कड़ाही में खाना बनाने के कई हेल्थ बेनिफिट्स होते हैं. कच्चे लोहे के बर्तनों में बना खाना खाने से शरीर में आयरन की कमी पूरी होती है. इन बर्तनों की सही तरह से साज-संभाल न करने ((जैसे उन्हें जंक लगना या कठोर साबुन का इस्तेमाल करना) पर इनकी सेल्फ लाइफ कम हो जाती है.

कब करें रिप्लेस? जब कच्चे लोहे के बर्तनों में जंक लग जाए या उनमें दरारें पड़ने पर.

– जब खाने का स्वाद बदला हुआ महसूस हो.

स्पेशल टिप्स: कच्चे लोहे के बर्तन को हर बार धोने के बाद तेल लगाकर रखें.

– स्ट्रांग लिक्विड, सोप और डिशवॉशर से लोहे के बर्तन न धोएं.

5. प्रेशर कुकर: सीटी और सील चेक करें

एक्सपायरी टाइम: ब्रांड और इस्तेमाल के आधार पर 5-8 साल तक.

प्रेशर कुकर किचन में इस्तेमाल किए जाने वाले बर्तनों में सबसे अहम बर्तन है. लेकिन हाई हीट और प्रेशर के कारण ये चेक करना ज़रूरी है कि कुकर का रबर रिंग और सेफ्टी वाल्व ठीक हो.

कब करें रिप्लेस? जब सीटी या वाल्व में ख़राबी हो.

– जब रबर रिंग घिसा, कटा या सख्त हो गया हो.

– जब ढक्कन ठीक से बंद न हो.

स्पेशल टिप: सुरक्षा की दृष्टि से साल में एक बार रबर रिंग और सेफ्टी वाल्व ज़रूर बदलें.

6. वुडन के स्पून और चॉपिंग बोर्ड: हाइजीन सबसे ज़्यादा महत्वपूर्ण है

एक्सपायरी टाइम: हर 1-2 साल में.

वुडन के स्पून और चॉपिंग बोर्ड कितने भी पुराने क्यों न हो जाए, जल्दी ख़राब नहीं होते. क्योंकि वुडन नमी, तेल और बैक्टीरिया को सोख लेता है. पुराने होने पर भी वे साफ़ तो दिखते लेकिन 1-2 साल में उन्हें बदलना ज़रूरी है. यदि उन्हें नियमित रूप से न बदला जाए, तो वुडन के स्पून और चॉपिंग बोर्ड कीटाणुओं का घर बन सकते हैं.

कब करें रिप्लेस? जब वुडन के स्पून और चॉपिंग बोर्ड पर दरारें पड़ी हो.

– धोने के बावजूद भी उनमें दुर्गंध आना.

– रंग उड़ना और फफूंदी लगना.

स्पेशल टिप: बांस या फूड सेफ प्लास्टिक बोर्ड का इस्तेमाल करें.

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7. प्लास्टिक के बर्तन: हलके, सस्ते और टिकाऊ

एक्सपायरी टाइम: हर 1-2 साल में या टूटने पर बदलें.

किचन में इस्तेमाल होने वाले काले प्लास्टिक वाले बर्तन में कैमिकल मिक्स होता है, जिससे सेहत को भारी नुक़सान हो सकता है. प्लास्टिक में माइक्रोप्लास्टिक होते हैं, जिससे कैंसर होने की आशंका हो सकती है.

कब करें रिप्लेस? प्लास्टिक के बर्तनों के किनारों पर टूट-फूट होना.

– बर्तनों पर दरारें पड़ना और दाग़-धब्बे पड़ना.

– अगर प्लास्टिक के बर्तनों पर BPA फ्री मार्क न हो तो.

स्पेशल टिप: प्लास्टिक के बर्तनों की जगह सिलिकॉन के बर्तन इस्तेमाल करें. ये अधिक सुरक्षित और हीट प्रतिरोधी होते हैं.

किचन में इस्तेमाल किए जाने पुराने और घिसे-पिटे बर्तन बिना शोर मचाए आपकी सेहत को नुक़सान पहुंचा सकते हैं. टूटा हैंडल, जंक और खरोंच लगी कड़ाही देखने में भले ही मज़बूत हो लेकिन ऐसे बर्तन आपके रोज़मर्रा के खाने में विषैले तत्व मिला सकते हैं. बेहतर होगा हर 1 साल के भीतर अपने किचन के बर्तनों को चेक करने की आदत डालें.

 

पूनम कोठारी

 

 

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