Close

सन्नी देओल ने ‘बंटवारा 1947’ के प्रमोशन के दौरान सुनाया दिलचस्प क़िस्सा (Sunny Deol shared an interesting anecdote during the promotion of ‘Batwara 1947’)

सन्नी देओल बेहद भावुक इंसान हैं. अक्सर ही न जाने कितनी ही बातें उनके दिल को छू जाती है और आंखें भर आती हैं. ऐसा ही कुछ भावनाओं से भरा नज़ारा उनकी आनेवाली फिल्म ‘बंटवारा 1947’ के प्रेस शो में भी देखने मिला था, जब उनके बेटे करण ने अपने दिल की बात कही. दरअसल, बंटवारा 1947’ में वे भी अपने पापा के साथ हैं.

सन्नी ने अपने सोशल मीडिया के इंस्टाग्राम अकाउंट पर राजकुमार संतोषी के साथ मूवी के प्रमोशन के दौरान की एक वीडियो साझा की है. इसमें वे उनसे ‘घायल’ फिल्म को लेकर बात कर रहे हैं. कैसे सन्नी को ‘घायल’ की कहानी पसंद आई, पर इसे कोई भी बनाने को तैयार नहीं था, तब वे राजकुमार संतोषी को पापा (धर्मेंद्र) से मिलाने लाए. वे तब यहीं जयपुर में उनकी फिल्म ‘बंटवारा’ की शूटिंग कर रहे थे. जी हां, धरम जी की अस्सी के दशक में मल्टी स्टारर पिक्चर ‘बंटवारा’ आई थी, जिसे लोगों ने ख़ूब पसंद किया था.

सन्नी देओल इस संदर्भ में कहते हैं-
कुछ सफ़र ऐसे पूरे होते हैं जिनकी आप कभी योजना नहीं बना सकते. बरसों पहले, मैंने युवा राजकुमार संतोषी की लिखी एक स्क्रिप्ट पर बहुत भरोसा किया था. हमने इसे प्रोड्यूसर्स तक ले जाने की बहुत कोशिश की, लेकिन कोई भी फिल्म को सपोर्ट करने को तैयार नहीं था. तब मैंने इसे पापा के पास ले जाने का फ़ैसला किया.
पापा 1988 में जयपुर में ‘बंटवारा’ की शूटिंग कर रहे थे और रामबाग पैलेस में रुके हुए थे. राज ने उन्हें ‘घायल’ की पूरी कहानी सुनाई, और जैसे ही कहानी ख़त्म हुई, पापा ने हां कह दी.

यह भी पढ़ें: मां को हिंदू-मुसलमान में न बांटिए.. मां अपने आप में एक मजहब है… सन्नी देओल का ज़बर्दस्त अंदाज़ दिखा ‘बंटवारा 1947’ के ट्रेलर में (Maa ko hindu-muslman mein na baantiye.. Maa apne aap mein ek majhab hai… Sunny Deol’s powerful persona shines through in the trailer of ‘Batwara 1947’)

फिल्म से ज़्यादा, मेरे लिए यह बात मायने रखती थी कि उन्हें इस बात पर कितना गर्व था कि मैंने इतनी ज़बर्दस्त कहानी को पहचाना और उनका साथ दिया. उसी भरोसे से ‘घायल’ बनी. और अब इतने सालों बाद, मैं ‘बंटवारा 1947’ के शुरुआती प्रमोशन के लिए जयपुर लौटा हूं. पापा की ‘बंटवारा’ (1989). मेरी ‘बंटवारा 1947’ (2026).
वही शहर. ज़िंदगीभर की यादें! और एक ऐसा सफ़र जो बहुत ही ख़ूबसूरत ढंग से पूरा हुआ लगता है. मेरी समझ पर भरोसा करने के लिए पापा का, और मुझे ऐसी कहानी देने के लिए राज का हमेशा शुक्रगुज़ार रहूंगा!
इसी के साथ सन्नी ने लव और हाथ जोड़ते हुए की इमोजी भी दी.

यह भी पढ़ें: नरेंद्र मोदी जी विष्णु के अवतार हैं… एक्टर सुदेश बेरी के बयान ने मचाई सनसनी… (Narendra Modi is an Avatar of Vishnu… Actor Sudesh Berry’s statement sparks a sensation)

सच जिस किसी ने इन दिनों ‘बंटवारा 1947’ का ट्रेलर देखा, प्रभावित हुए बिना नहीं रह सका. फिल्म की कहानी से लेकर क़िरदार, संवाद, अभिनय सब कुछ बेहतरीन है. यूं तो फिल्म में एक से डायलॉग हैं, लेकिन सनी पाजी का वो डायलॉग कि मां का कोई मजहब नहीं होता... दिल को छू जाता है. न जाने कितनी अनकही कहानी भी बयां कर जाता है. फैंस के साथ-साथ हम सभी को मूवी का बेसब्री से इंतज़ार है. क्योंकि इसमें सन्नी देओल का एक अलग अंदाज़ भी देखने मिलेगा. 

Photo Courtesy: Social Media

Share this article