अनुपम खेर अपनी मां दुलारी को कितना चाहते हैं यह जगज़ाहिर है. वे अक्सर मां के साथ की प्यारी-दुलारी, दिलचस्प, मज़ेदार, शरारतभरी बातचीत साझा करते रहते हैं. चूंकि मां लंबे समय के लिए अपने गांव चली गई थीं, तब उनकी कमी को उन्होंने शिद्दत से महसूस किया. और फिर आख़िरकार उनके आने पर उनकी के साथ आपसी नोक-झोंक से भरी बातों का पिटारा खोल दिया उन्होंने.
अनुपम खेर ने अपने सोशल मीडिया के इंस्टाग्राम के प्लेटफॉर्म पर मां दुलारी के साथ अपनी हंसी-मज़ाक से भरी बातचीत का वीडियो शेयर किया. जहां उनकी बातेंे मुस्कुराने को मजबूर कर देती हैं, वहीं हर किसी को इस बात का एहसास भी कराती है कि मां तो मां होती है, उनकी जगह कोई नहीं ले सकता. उनका प्यार-दुलार, स्नेह, अपनापन का कोई सानी नहीं है.
अनुपम खेर कहते हैं-
मॉम इज़ बैक! एंड सो हर लव!..
मां डेढ़ महीने शिमला में रहने के बाद वापस आईं. बहुत दिनों बाद मिला तो देखा, थोड़ी दुबली हो गई हैं. मुझे बिल्कुल अच्छा नहीं लगा. पूछो तो कहती हैं- “भूख नहीं लगती!”
लेकिन उनका वही पुराना जोश, वही शरारत और क़िस्सों का ख़ज़ाना आज भी बरक़रार है.
कभी सबके पैसेे ख़ुद देने की ज़िद, कभी भाई साहब की कूड़ेदान में फेंकी हुई खांसी की दवाई की बोतल निकाल लाना. उनके क़िस्से इतने होते हैं कि वीडियो बीच में रोककर दोबारा रिकॉर्ड करना पड़ा!
भाभी रीमा कितनी ख़ूबसूरती से मां का ख़्याल रखती! उनकी बातों की, उनके जज़्बातों की धीरे-धीरे इंटरप्रीटर (दुभाषिया) भी बन गई है!
मां के क़िस्से दुनिया के सबसे ख़ूबसूरत क़िस्से होते हैं. उनकी हर बात में मासूमियत है, अपनापन है और ज़िंदगी है. सच कहूं तो मां स़िर्फ हमारे घर को ही नहीं, अपनी मौजूदगी से पूरी दुनिया को ख़ूबसूरत बना देती है.
आज उनसे मिलकर एहसास हुआ कि मैंने उन्हें कितना ज़्यादा मिस किया था. मां, आप बस यूं ही हंसती रहो, बोलती रहो, अपने क़िस्से सुनाती रहो… और हां, थोड़ा खाना भी खाया करो.
अपने इन भावुकता भरे शब्दों के साथ अनुपम खेर ने दुलारी रॉक्स टैग के साथ कई लव इमोजी भी शेयर किए.
https://www.instagram.com/p/DcSYi5hgjsI/?igsi=ZndwZGR1cmZrOGFp
वीडियो में अनुपम खेर अपनी मां दुलारी से कहते हैं-
बड़े दिनों बाद आपकी मुलाक़ात हो रही है माता!..
आपको कुछ नहीं, आप तो भगवान की दया से बिज़ी रहो…
अरे, ये क्या दवाई है शराब पीने लगे हो आजकल…
मुझे मिला है, मुझे क्या पता की खांसी की है…
अरे बिज़ी होने में तो ज़्यादा मिस करता है इंसान. क्या बात कर रही हैं. डेढ़ महीने बाद हम मिल रहे हैं आज हम. यह काला धागा कहां से लाए मेरे लिए…
ज्वाला जी के मंदिर से… अच्छा…
थोड़ा कमज़ोर होकर आए हो.
हां, मेरे को ना, पता नहीं क्यों भूख ही नहीं लगती थी. क्या करूं?..
ग़लत बात है.
डॉक्टर के पास भी गई थी.
खाती हो कि नहीं कुछ…
खाती हूं…
पतला होना ठीक नहीं है. क्या है… आप मॉडल थोड़े हो…
अयोध्या में रामजन्मभूमि की शूटिंग की, फिर खोसला का घोंसला की शूटिंग ख़त्म की. फिर मैंने हैदराबाद में की…
कुछ पूरा, कुछ अधूरा मां-बेटे का ये संवाद दिलों को भावविभोर कर गया.
सच में मां ईश्वर का रूप है और ऊपरवाले की दी हुई अनमोल सौग़ात है हम इंसानों को. हर किसी की ज़िंदगी में अपनी मां को लेकर न जाने कितनी बातें, यादें और प्यार है, इसे हर कोई भलीभांति जानता और समझता होगा. वैसे भी आज ‘वर्ल्ड सीनियर सिटीजन डे’ हैै, ऐसे में मां-पिता ही नहीं हर उस बड़े-बुज़ुर्गों को नमन, जिनकी वजह से हम आज हैं और ख़ुश व मह़फूज़ हैं!
धरती पर जन्नत का एहसास कराती ईश्वर का रूप है मां!!!
