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Rakshabandhan: रणवीर सिंह से लेकर अभिषेक बच्चन तक, बहनों के बिना अधूरी है इन बॉलीवुड स्टार्स की ज़िंदगी (From Ranveer Singh to Abhishek Bachchan: The Sisters Who Hold a Special Place in Their Hearts)

रक्षाबंधन (Rakshabandhan) के मौक़े पर आइए, जानते हैं सितारों के दिल की ख़ास बातें. किसकी लाइफ को बहनों ने संवारा और कौन शेयर करता है लाइफ की हर छोटी-बड़ी बात बहन के साथ, किसके होते थे झगड़े और कौन सुनता था दीदी की बात?

 

बचपन की यादें ताज़ा हो जाती हैं- रणवीर सिंह (Ranveer Singh)

“राखी आते ही एक बार आंखों के सामने बचपन की वो यादें ताज़ा हो जाती हैं. मेरे घर में एक छोटा-सा मंदिर है. रक्षाबंधन के दिन मेरी बड़ी बहन रितिका मुझे यहीं राखी बांधती हैं. बचपन से लेकर आज तक राखी के कलर और डिज़ाइन को लेकर हम दोनों में झगड़ा होता रहता है. मेरी बहन मुझे हमेशा कहती थी कि जब तक राखी ख़राब न हो जाए, हाथ से निकालना नहीं. मुझे ये बात पहले बिल्कुल अच्छी नहीं लगती थी, पर फिर भी मैं राखी अपनी कलाई से नहीं निकालता था. राखी बंधवाने के बाद मैं हमेशा अपनी बहन के पैर छूता हूं.”

 

पहली बार कहा था दीदी- सुष्मिता सेन (Sushmita Sen)

“मैं रक्षाबंधन को बहुत एंजॉय करती हूं. ये दिन मेरे लिए बहुत ख़ास है. मेरा छोटा भाई राजीव पहले मुझे दीदी नहीं बोलता था. मुझे बहुत बुरा लगता था. एक साल रक्षाबंधन वाले दिन ही जब मैंने राजीव को राखी बांधी, तो गिफ्ट के तौर पर मैंने उसे दीदी कहने को कहा. उस दिन राजीव ने मुझे पहली बार दीदी कहा. इसलिए मेरे लिए राखी हमेशा से ख़ास रही है. बड़े होने के बाद मैं यहां मुंबई में हूं और राजीव दिल्ली में. व्यस्तता के चलते जब कभी रक्षाबंधन के दिन हम नहीं मिल पाते, तो घर के अंदर बने मंदिर में दुर्गा जी को राखी बांध देती हूं और जब राजीव आता है, तो वही राखी उसकी कलाई पर बांधती हूं.”

बहन की वजह से आज इस मुक़ाम पर हूं- रणदीप हुड्डा (Randeep Hooda) 

“स्कूल के दिनों में अपनी बहन अंजली को एक्टिंग करता देख मुझे बहुत अच्छा लगता था. उसी ने मुझे एक्टिंग करने के लिए कहा. फिर हम साथ में परफॉर्म करते थे. ज़िंदगी के हर क़दम पर वो मेरा साथ देती हैं. आज मैं जो कुछ भी हूं, स़िर्फ उन्हीं की वजह से हूं. आज भी वो मुझे हर बात के लिए गाइड करती हैं. रक्षाबंधन के दिन हम दोनों साथ समय बिताते हैं. मेरी बहन को एक्टिंग का बहुत शौक़ था, लेकिन वो इस क्षेत्र में आगे नहीं बढ़ पाईं और आज वो डॉक्टर हैं. मैं चाहता हूं कि एक दिन फिल्म में हम दोनों साथ एक्टिंग करें. सही मायने में वही मेरा सबसे बड़ा रक्षाबंधन का गिफ्ट होगा मेरी बहन के लिए.”

 

बहुत क्लोज़ हूं मैं श्वेता के- अभिषेक बच्चन (Abhishek Bachchan)

“बचपन से लेकर अब तक हर फैसले में अपनी बहन की राय लेता हूं. मैं ही नहीं, घर में भी जब किसी अहम मुद्दे पर कोई ़फैसला लेना होता है, तो श्वेता के बग़ैर नहीं होता. डैड तो उन्हें ‌‘हेड ऑफ द फैमिली’ कहकर बुलाते हैं. मुझे अगर थोड़ी भी परेशानी हो जाए, तो वो तुरंत उसे हल करने की सोचती रहती हैं. मेरे लिए क्या ग़लत है क्या सही, वो मुझे बख़ूबी बताती हैं. वैसे रक्षाबंधन के दिन मैं बहुत कन्फ्यूज़ रहता हूं. इस दिन क्या हम अपनी बहनों के प्यार के बदले उन्हें कोई गिफ्ट दे सकते हैं? असल में हम उनकी नहीं, बल्कि हर क़दम पर साथ देकर वो हमारी रक्षा करती हैं.”

 

फर्श से फलक तक पहुंचाया बहन ने- शान (Singer Shan)

“मेरी सफलता की असली हक़दार मेरी बहन सागरिका हैं. उम्र में तो वो मुझसे स़िर्फ दो साल बड़ी हैं, लेकिन वो मेरा आधार हैं. वो न होतीं, तो आज मैं सिंगर नहीं होता. मैं तो कहीं कंप्यूटर के बिज़नेस में होता. मेरी बहन पहले से ही स्टेज शो करती थीं. अचानक एक दिन न जाने उनको क्या सूझा कि मुझे भी गाने के लिए कहने लगीं. मैं ये सुनकर चौंक गया, लेकिन उस वक़्त मेरी बहन ने मुझमें आत्मविश्वास जगाया. एक-दो परफॉर्मेंस के बाद मैं वापस अपने काम में लग गया, लेकिन सागरिका ने मुझे गाने के लिए बार-बार प्रोत्साहित किया. ग़लती होने पर सिखाया और लगन से इस क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए कहा. आज जब मैं पीछे पलटकर देखता हूं, तो लगता है कि अभी तो कल की बात थी. आज मैं कहां से कहां पहुंच गया. राखी का दिन मेरे लिए बहुत क़ीमती होता है.”

न पहुंचने का अ़फसोस होता है- मनोज वाजपेयी (Manoj Bajpayee)

“मेरी तीन बहनें हैं. बचपन में जब मेरी कलाई पर तीन राखी बंधती थी, तो मेरे दोस्त मुझसे जलते थे. तीन राखी और तीन लड्डू भी खाने को मिलते थे. बड़े होने के बाद मैं बचपन की राखी को बहुत मिस करता हूं. मुझे अ़फसोस होता है कि काम की व्यस्तता के चलते मैं समय निकालकर अब अपनी बहनों के पास नहीं जा पाता, लेकिन ख़ुशी होती है जब रक्षाबंधन के दिन डोर बेल बजने पर सामने कुरियर वाले को खड़ा देखता हूं. मैं भले ही नहीं जा पाता, लेकिन अब भी बहनों की राखी कुरियर के द्वारा हर साल मुझे मिलती रहती है और मैं उसे अपनी कलाई पर ज़रूर बांधता हूं.”

 

मां की तरह संभाला है मुझे- साजिद ख़ान (Sajid Khan)

“मैं बचपन में डिस्टर्ब चाइल्ड था. डैड फिल्ममेकर थे, लेकिन फिल्में न चलने की वजह से घर की आर्थिक स्थिति ठीक नहीं थी. उसी दौरान डैड और मॉम का डिवोर्स हो गया. मुझे और फराह को हफ़्ते में दो दिन डैड के साथ, तो बाकी के पांच दिन मॉम के साथ रहना पड़ता. ऐसे में न मां का प्यार मिला और न ही डैड का. इस बीच अगर मुझे कोई सपोर्ट और प्यार करता, तो वो मेरी बहन फराह ही थी. मैं दसवीं में तीन बार फेल हुआ. उन दिनों मुझे चोरी की लत लग गई. चॉल के दूसरे लड़कों के साथ मैं भी कार के पार्ट्‌‍स चुराता और मार्केट में बेचता. उन सब परिस्थितियों से निकलकर आज मैं जिस मुक़ाम पर पहुंचा हूं, उसके पीछे स़िर्फ और स़िर्फ मेरी बहन है. मेरी सारी बुराइयों को झेलते हुए उन्होंने मुझे मॉम और डैड दोनों का प्यार दिया. ज़िंदगी में आगे बढ़ने का हौसला दिया.”

 

आज भी फिक़्र करती हैं- तुषार कपूर

“रक्षाबंधन और बहन दोनों ही बहुत ख़ास होते हैं. एकता मेरी बड़ी बहन ही नहीं, मेरी सबसे अच्छी दोस्त भी हैं. बचपन से लेकर आज तक हर बार, हर क़दम पर वो मुझे संभालती आई हैं. बॉलीवुड में डैड के बाद वो जितनी पॉप्युलर हुईं, उतना मैं नहीं. इस बात को लेकर मैं जब भी परेशान होता हूं, तो वो मेरे साथ रहती हैं. मेरे करियर को संवारने के लिए आज भी फिक़्रमंद रहती हैं. असल में अगर मैं ये कहूं कि वो घर की बेटी नहीं, बल्कि बेटा हैं, तो ग़लत नहीं होगा. मॉम-डैड और मुझे आज अपनी बहन पर गर्व होता है.”

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