शादीशुदा ज़िंदगी में प्यार के साथ तकरार तो होती ही है. लेकिन कई बार तकरार इतनी बढ़ जाती है कि प्यार कहीं छिप सा जाता है. ऐसे में काम आता है ‘इमोशनल इंटेलिजेंस’ यानी भावनाओं को समझने की कला, जिससे शादीशुदा ज़िंदगी की तकरार को प्यार में बदला जा सकता है.
रिश्तों को लेकर कपल के बीच क्यों प्यार कम होता जा रहा है? पति-पत्नी से जुड़े कई चौंकाने वाले पहलुओं को जानें मेरी सहेली के इस पॉडकास्ट में. पूरा पॉडकास्ट देखने के लिए लि़क पर क्लिक करें-
अगर आप अपनी मैरिड लाइफ को सफल बनाना चाहते हैं, तो इमोशनल इंटेलिजेंस से काम लें. आपकी भी अक्सर पार्टनर के साथ तकरार हो जाती है, तो ये बातें आपकी शादीशुदा ज़िंदगी को बेहतर बनाएंगी और तकरार को ख़त्म कर प्यार से भर देंगी.
ग़ुस्से में रिएक्ट करने से पहले दो मिनट का पॉज़ लें
जब भी आप ग़ुस्से में हों और कुछ बोलने जा रहे हों, तो रुक जाएं और दो मिनट सोचें कि जो भी मैं बोलने जा रही हूं, उससे क्या फ़ायदा होगा? क्या लड़ाई सुलझेगी या फिर बात और बिगड़ सकती है? अगर लगता है बात बिगड़ सकती है, तो चुप लगा जाएं और तुरंत जवाब देने से बचें. जवाब देना भी है, तो थोड़ा सोच-विचार करें और फिर शांत मन से अपनी बात रखें. इससे झगड़ा भी नहीं बढ़ेगा और वास्तव में जो आप कहना चाहती हैं, वो कह पाएंगी.
‘तुम’ की बजाय ‘मैं’ के संबोधन से बातचीत करें
जब आप बातचीत के दौरान किसी को कहते हैं- तुमने मेरा ध्यान नहीं रखा… तुम रोज़ देर से आते हो… तुम देर रात तक अपने दोस्तों के साथ घूमते रहते हो… ऐसा करते वक़्त आप सामनेवाले को आरोपित कर रही होती हैं, जिसका नतीज़ा यह होता है कि वह भी डिफेंसिव मोड में आ जाता है और ख़ुद को सही साबित करने में लग जाता है और समस्या जहां थी, वहीं रह जाती है. उल्टे लड़ाई और हो जाती है.
इसका हल ये है कि आप ‘तुम’ की बजाय ‘मैं’ पर फोकस करें. आप अपनी भावनाएं बताएं, ना कि किसी पर आरोप लगाएं. जैसे- “तुम घर के कामों में बिल्कुल मदद नहीं करते, बहुत स्वार्थी हो!” की बजाय बोले कि- “मैं आजकल काम के बोझ से थोड़ा थका हुआ/हुई महसूस कर रहा/रही हूं, मुझे आपके थोड़े सहयोग की ज़रूरत है.”
“तुम हमेशा अपने मन की करते हो, मुझसे पूछते तक नहीं!” इसकी बजाय बोले कि- “मुझे ख़ुशी होगी अगर हम ऐसे बड़े ़फैसले एक साथ मिलकर लें.” इस तरह बहस इस बात पर नहीं होती कि कौन सही या ग़लत है, बल्कि इस बात पर होती है कि परिस्थिति को कैसे सुधारा जाए.
बात को काटने की बजाय ध्यान से सुनें
कई बार जब साथी बोल रहा होता है, तो हम उसकी पूरी बात सुने बिना ही सोचने लगते हैं कि हम इसका क्या जवाब दे सकते हैं. इससे आधी-अधूरी बात को लेकर बहस होती है और अगर बात पूरी सुन भी ली होती है, तो भी अपना पक्ष रखने की ज़ल्दबाज़ी में पार्टनर की भावनाओं को हम नज़रअंदाज़ कर देते हैं. हम समझ ही नहीं पाते कि सामनेवाले ने जो कहा है, वह क्यों कहा? इसके पीछे क्या वजह रही होगी. इसलिए साथी की बात बिना बीच में काटे पूरी सुनें. जब वे अपनी बात कह लें तो कहें, “मैं समझ सकता/सकती हूं कि तुम्हें उस बात का बुरा लगा.” यह वाक्य पार्टनर का ग़ुस्सा आधा कर देता है, क्योंकि वे लगता कि उन्हें सुना गया है.
शादी कोई बहस प्रतियोगिता नहीं है
शादी कोई बहस प्रतियोगिता नहीं है, जहां एक को जीतना है. अगर आप जीत भी गए और पार्टनर हार गया, तो आख़िरकार नुक़सान आपके रिश्ते का ही होगा. इस बात को स्वीकार करें कि किसी भी मुद्दे पर आप दोनों की एक जैसी राय नहीं हो सकती. कभी-कभी यह मान लेना ही बुद्धिमानी है.
“हम इस मुद्दे पर अलग सोच रखते हैं, और यह बिल्कुल ठीक है.”
इसलिए किसी भी बेकार बहस में पड़ने से अच्छा है उस मुद्दे को समझना और उसे हल करने की कोशिश करना. साथी से बहस करने की बजाय उससे उस मुद्दे पर खुलकर बात करें और समस्या को सुलझाने का प्रयास करें.
माफ़ी मांगना ’रिपेयर अटेम्प्ट’ करने जैसा है
अगर लड़ाई हो ही गई है, तो जो बीत गया उसे जाने दें और अब ईगो को अपने रिश्ते के बीच में ना लाएं. जो आप दोनों के बीच बिगड़ गया है, उसे रिपेयर करने की कोशिश करें और इसके लिए माफ़ी मांगना अपने रिश्ते में ऑक्सीजन भरने जैसा होगा. धीरे से पार्टनर का हाथ पकड़ लें या उन्हें पानी का ग्लास बढ़ा दें.
एक हल्की सी मुस्कान या “आई एम सॉरी, हम दोनों ही थोड़े परेशान हो गए थे…” साथ ही “मैं अपने ग़ुस्से पर काबू नहीं रख पाया/पाई, मुझे इस तरह चिल्लाना नहीं चाहिए था.” कहना जादू की तरह काम करता है. ऐसा करने के बाद फिर से एक-दूसरे की ग़लतियां गिनवाने ना बैठ जाएं. माफ़ी शब्दों में नहीं, बल्कि व्यवहार में भी दिखनी चाहिए.
‘सैंडविच तकनीक’ से अपनी बात कहें
‘सैंडविच तकनीक’ का मतलब है जहां आप अपनी बात या शिकायत प्यार की परत में सैंडविच की तरह लपेट कर कहें जैसे कि-
“वैसे आप घर के बाकी कामों में जिस तरह मेरी मदद करते हैं, उसके लिए थैंक यू…”
“बस अगर आप अपने कपड़े और सामान सही जगह रख दें तो मेरा काम थोड़ा आसान हो जाएगा…”
बस, जब आप वही काम किसी दूसरे को सिखा रहे हो, तब भी ऐसे ही सिखाएं बिना डांटे, क्योंकि नई चीज़ सीखने में टाइम लगता है. ऐसे में पार्टनर को यह नहीं लगता कि आप बस उसकी बुराई किए जा रही हैं, बल्कि उसे लगता है कि आप उसकी तारीफ़ करते हुए बस थोड़ा सा अपना कम्फर्ट बता रही हैं.
गोल्डन रूल बना लें, लड़ाई ख़त्म होने के बाद गले मिलें
जब माहौल थोड़ा शांत हो जाए, तो एक-दूसरे को कम से कम 20 सेकंड तक गले लगाएं. 20 सेकंड का हग शरीर में ऑक्सीटोसिन (लव हार्मोन) छोड़ता है, जो मानसिक तनाव को मिटाकर भावनात्मक जुड़ाव को तुरंत बढ़ा देता है.
लड़ाई को सुलझा कर ही सोने जाएं
झगड़े के बाद अक्सर यह होता है कि कपल एक-दूसरे से बात करना बंद कर देते हैं. कई बार ग़ुस्से में ही दोनों सोने भी चले जाते हैं, जिससे झगड़ा अगले दिन के लिए टल जाता है और बढ़ता ही जाता है. यह नियम बना लें कि सोने से पहले आप आपस में हुई किसी भी बहस या इशू को सुलझा कर ही सोएं, ताकि वह मुद्दा उसी दिन ख़त्म हो जाए और आप नए दिन की नई शुरुआत कर सकें.
एक-दूसरे पर ध्यान दें
इमोशनल इंटेलिजेंस की भाषा में इसे ’माइक्रो-अटेंशन’ कहते हैं. यानी बड़े-बड़े सरप्राइज़ या घूमना-फिरना ही नहीं, बल्कि रोज़मर्रा की छोटी-छोटी बातों में एक-दूसरे को तवज्जो देना. रिश्ता पुराना होने पर हम पार्टनर पर ध्यान देना कम कर देते हैं, लेकिन ऐसा करना आपके रिश्ते के लिए ठीक नहीं है. ध्यान नहीं देने पर आपका पार्टनर बुरा मान सकता है और उसके मन में यह भाव आ सकता है कि आपका प्यार कम हो गया है. इससे बचने के लिए एक-दूसरे पर ध्यान दें. छोटे-छोटे कॉम्पलिमेंट भी रिश्ते को बड़ी मज़बूती देते हैं. जैसे- काम से घर लौटने के शुरुआती 10-15 मिनट फोन, स्क्रीन या तनाव को दूर रखें. उनसे पूछें कि उनका दिन कैसा बीता और एक-दूसरे को गले लगाएं. रात के खाने के समय और बिस्तर पर जाने से आधा घंटा पहले फोन को बिल्कुल दूर रखें. साइलेंट पर रखना बेहतर रहेगा. इस समय स़िर्फ अपनी, अपने दिन की और अपने रिश्ते की बातें करें. उनकी तारीफ करें.
– शिखा जैन
