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मॉर्डन डेकोर का मतलब सिर्फ़ महंगा होना नहीं (Modern decor doesn’t just mean being expensive)

मध्यमवर्गीय परिवार के लोग जब मॉर्डन डेकोर शब्द सुनते हैं, तो उनके मन में सबसे पहला सवाल यही उठता है कि यह कितना महंगा होगा? हालांकि आधुनिक सजावट का मतलब महंगा होना ही है, ऐसा मानना ग़लत होगा.

वास्तव में पिछले कुछ समय से पुराना सोना होता है वाली कहावत को ध्यान में रखते हुए लोग पुराने ज़माने में घरों की सजावट में इस्तेमाल होने वाले टेबल, कुर्सी, आलमारी, शोकेस और राइटिंग टेबल जैसे फर्नीचर की ओर लौट रहे हैं.

आमतौर पर सागौन की लकड़ी से बने इस तरह के फर्नीचर पर हाथ से की गई पॉलिश बहुत अच्छी लगती है. एक ख़ास वर्ग के लोगों का मानना है कि इस तरह का फर्नीचर घर को पारंपरिक रूप देता है. यही नहीं अगर पूजा घर में लकड़ी पर नक्काशी करके बनाए गए मंदिर में अपने इष्टदेव को विराजमान किया जाए तो उसके साथ हमारी संस्कृति और संस्कार भी जुड़ जाते हैं. इसके अलावा ऐसा फर्नीचर दशकों तक टिकता है. इसलिए एक बार ख़र्च करने के बाद व्यक्ति को अपने पैसे का पूरा मूल्य मिल जाता है.

इंटीरियर डिज़ाइनर भी इस बात की पुष्टि करते हुए कहते हैं कि सिर्फ़ मध्यमवर्गीय लोग ही नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से संपन्न लोग भी हाथ से बनाए गए पुराने शैली के फर्नीचर की ओर आकर्षित हो रहे हैं.

वे आगे बताते हैं कि ज़्यादातर लोग लक्जरी डेकोर शब्द सुनकर सोच में पड़ जाते हैं, लेकिन आज के दौर में लक्जरी का मतलब सिर्फ़ अल्ट्रा-लक्जरी घर नहीं है, जिसकी सजावट पर बेहिसाब पैसा ख़र्च किया गया हो.

हां, यह ज़रूर है कि आलीशान घरों के इंटीरियर डेकोर पर करोड़ों रुपए ख़र्च किए जाते हैं. लेकिन आम लोगों के लिए लक्जरी का मतलब घर में तकनीक का सहज और ख़ूबसूरत समावेश है. इसमें स्मार्ट लाइटिंग, आवाज से नियंत्रित होने वाले घरेलू उपकरण, मज़बूत सुरक्षा व्यवस्था, तापमान नियंत्रित करने वाली प्रणाली और मनोरंजन के लिए आधुनिक, लेकिन कम जगह घेरने वाले उपकरण शामिल हैं.

कल्पना कीजिए कि आप बाहर से घर लौटें और दरवाज़ा खोलते ही रोशनी आपका स्वागत करने लगे, तो आपको कैसा लगेगा? इस तरह की कई स्वचालित सुविधाएं आपको कितनी राहत और सुविधा का अनुभव करा सकती हैं. आजकल किफायती घरेलू सजावट के साथ तकनीक का तालमेल बिठाकर घर को आलीशान बनाने का चलन तेजी से बढ़ रहा है.

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हां, जिन लोगों को ख़र्च करने से पहले ज़्यादा सोचने की ज़रूरत नहीं पड़ती, वे आज पहली नज़र में ही मन मोह लेने वाली आलमारियां, बचपन की यादें ताज़ा करने वाले हेडबोर्ड, अल्ट्रा-मॉडर्न किचन और बैठक कक्ष में क्रीम, एंटीक गोल्ड, हाथीदांत, बनारसी सिल्क तथा टेराकोटा जैसी शानदार सामग्रियों का इस्तेमाल करते हैं.

कुछ लोग घर की सजावट में कुछ अनोखा करने के लिए अपनी जड़ों की ओर भी लौट रहे हैं. कहने का मतलब यह है कि वे पुराने समय में गांवों में अपनाई जाने वाली सजावट को अपने शहरों के घरों में जगह दे रहे हैं.

इस तरह की सजावट में मिट्टी के घड़ों से लेकर सुराहियां, हुक्के के आकार की सजावटी वस्तुएं, पानी गर्म करने के लिए इस्तेमाल होने वाले पीतल के बंबे, तीन पैरों वाली पीतल की चौकी पर रखा सुंदर नक्काशीदार फूलदान, हाथ से कढ़ाई किए हुए तोरण और कौड़ियों की लड़ियों से बने लटकन आदि शामिल हैं.

सोफे की जगह आधा फुट ऊंचे प्लेटफार्म पर गद्दा बिछाकर और उस पर देसी डिजाइन वाली चादर सजाकर बैठक कक्ष को एक अनोखा रूप दिया जा सकता है.

लक्जरी का मतलब सिर्फ़ महंगी सजावट नहीं, बल्कि घर को व्यक्तिगत स्पर्श और अपनी अलग पहचान देने वाली साज-सज्जा है.

– स्नेहा सिंह 

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Photo Courtesy: Freepik

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