
आयुष्मान खुराना अपने अभिनय और भूमिकाओं में विविधता के लिए जाने जाते हैं. इसी फेहरिस्त में उनका अनूठा अंदाज़ देखने मिलता है फिल्म ‘उड़ता तीर’ में. मनोरंजन के साथ उनका खलनायक वाला ग्रे शेड्स भी रोमांचित करता है. लेखक-निर्देशक आकाश ए कौशिक ने कहानी तो दिलचस्प लिखी ही है, परंतु मज़ेदार डायरेक्शन में भी बाज़ी मार गए.

फिल्म की शुरुआत में भारत-पाकिस्तान के बॉर्डर से एक बच्चे को धमाके से बचाने से लेकर षड़यंत्र रचते हुए भारतीय खुफिया के खेमे में शामिल होना लाजवाब है. उस पर फनी टेरिरिस्ट के रूप में मुकुल देव पूरी महफ़िल लूट लेते हैं. अब वे हमारे बीच नहीं रहे, किंतु हास्य से भरपूर एक यादगार भूमिका में उन्हें शिद्दत से याद किया जाएगा.

सारा अली खान हिंदुस्तानी विक्रांत, आयुष्मान खुराना लेकिन पाकिस्तानी एजेंट बिलाल की धर्मपत्नी बनी हैं. बिलाल ने अपना मतलब निकालने के लिए उसे अपना शिकार बनाया था और शादी की थी, जो टूटने के कगार पर है. वहीं उनकी मां की कोशिश है कि बच्चों का घर बिखरने से बच जाए, इसलिए हेल्थ के बहाने से ही सही वे उनके साथ रहती हैं और ऊपरवाले से प्रार्थना करती हैं कि उनकी ज़िंदगी में प्यार भरे कपल वाली ख़ुशियां फिर से लौट आए. मां की भूमिका में सुप्रिया पिलगांवकर बढ़िया काम किया है. सारा के साथ के उनके कुछ दमदार संवाद भी हैं, जो रिश्तों की अहमियत को दर्शाते हैं.

कहानी में मज़ेदार मोड़ तब आता है जब विक्रांत हादसे में अपनी याददाश्त खो बैठता है. अब वो भूल चुका है कि वो सरहद के पार दुश्मन मुल्क का एजेंट है. अब वो ख़ुद को एक ईमानदार और वफ़ादार भारतीय समझता है. उसकी कोशिश रहती है कि दुश्मनों के दांत खट्टे करने के साथ-साथ अपने देश की इन आंतकवादियों, आईएसआई आदि से रक्षा करना.

अब एक नया खेल शुरू होता है. पाकिस्तानी जासूसों का सफाया. इसी भागदौड़ में कई उतार-चढ़ाव आते हैं, जहां प्यार, रिश्ते, देशभक्ति, मनोरंजन, डर, रोमांच सब कुछ देखने मिलता है.
राहुल बोस पहली बार एक ट्रेजेडी को कॉमेडी के अंदाज़ में निभाते हुए नज़र आए. उनके हिस्से ख़ामोश रहते हुए नज़रों से किसी का दिल तो किसी के रूह को घायल करने वाला अंदाज़ काबिल-ए-तारीफ़ है. उसमें लव एंगल वो भी कुछ कुछ होता है… मूवी के बैकग्राउंड के साथ हंसी के फव्वारे भर देता है. स्मिता तांबे भी ऑफिसर के साथ घायल प्रेमिका के रूप को बख़ूबी निभाती हैं.

पाकिस्तानी आला अफसरों की भूमिका में गुलशन ग्रोवर, राम कपूर रंग जमाते हैं. इन्हीं के साथ सुहैल नय्यर, संदीप आनंद, पारुल गुलाटी, बृजेंद्र काला, रघुवीर यादव भी अपनी-अपनी भूमिकाओं के साथ न्याय करते हैं.
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धर्मा प्रोडक्शन के बैनर तले बनी इस फिल्म में निर्माता करण जौहर ने अपनी ही फिल्मों के पंच डालने की ख़ूब छूट ली है. उनके साथ प्रोडयूसरों के गुट में अचीन जैन, अपूर्वा मेहता, गुनीत मोंगा कपूर, आदर पूनावाला, राकेश मील, रौनक बजाज, अश्वनी मिश्रा आदि शामिल हैं.
सचिन-जिगर का संगीत कहीं दिल को गुदगुदाता है तो कहीं शोर मचाता है. इसमें कोई दो राय नहीं कि ‘धुरंधर’ मूवी से भी बहुत कुछ प्रेरित है. उड़ता तीर… गाना लुभाता है. अर्पित भरडे, हर्षवीर ओबेरॉय, सुनील पटेल की सिनेमैटोग्राफी आकर्षित करती है. एडिटर शिवकुमार वी. पानीकर यदि चाहते तो क़रीब पौने तीन की इस फिल्म को थोड़ी छोटी कर सकते थे. क्योंकि कुछ दृश्यों और सारा-आयुष्मान के रोमांटिक गाने न भी होते तो कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता.
यूं तो हर फिल्म में कुछ अच्छा तो कुछ बेमज़ा रहता ही है. फिर भी भरपूर मनोरंजन का वायदा ‘उड़ता तीर’ ज़रूर निभाती है. आयुष्मान खुराना औैर सारा अली खान ने इसके पहले भी ‘पति पत्नी और वो दो’ में अपनी जोड़ी का कमाल दिखाया था. यहां कुछ ऐसा है. मूवी में कई टि्वस्ट हैं, जो हंसाते हैं तो कहीं ग़मगीन भी कर देते हैं. लेकिन आयुष्मान के फैंस के लिए यह दिवाली के तोह़फे से कम नहीं है.
– ऊषा गुप्ता
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