दोराहे (क्रॉसरोड्स) पर खड़ी ज़िंदगी को कैसे आगे बढ़ाएं? (Are You At A Crossroads In Your Life? The Secret To Dealing With Crossroads In Life)

हमारी ज़िंदगी (Life) में कई बार ऐसे मौ़के आते हैं, जब हमारे लिए निर्णय लेना मुश्किल हो जाता है. हम चाहकर भी समझ नहीं पाते कि अब क्या करें. ऐसी स्थिति में दोराहे (Crossroads) पर खड़ी ज़िंदगी को कैसे आगे बढ़ाएं? ज़िंदगी में जब निर्णय लेना मुश्किल हो जाए, तो ऐसी स्थिति से कैसे उबरें, दोराहे पर खड़ी ज़िंदगी को आगे बढ़ाने के कुछ आसान रास्ते बता रही हैं काउंसलिंग सायकोलॉजिस्ट डॉ. माधवी सेठ (Psychologist Dr. Madhavi Seth). डॉ. माधवी के अनुसार, इस स्थिति को सायकोलॉजी में कॉन्फ्लिक्ट कहते हैं. मॉडर्न सोशल सायकोलॉजी के फादर कहे जानेवाले कर्ट लुइन, जो एक सोशल सायकोलॉजिस्ट हैं, उन्होंने कॉन्फ्लिक्ट थ्योरी पर गहन अध्ययन किया है. कर्ट लुइन का कहना है कि कॉन्फ्लिक्ट हर किसी की ज़िंदगी में होते हैं. आप उनसे बच तो नहीं सकते, लेकिन सही फैसला लेकर या बीच का रास्ता निकालकर आप इन कॉन्फ्लिक्ट्स से बाहर ज़रूर निकल सकते हैं. माधवी सेठ से हमने दोराहे पर खड़ी ज़िंदगी से जुड़ी कुछ स्थितियां शेयर कीं, जिनका हल उन्होंने कुछ इस तरह बताया.

Crossroads In Life

1) समस्या: मेरी शादी को आठ साल हो गए हैं, हमारे दो बच्चे हैं. दो साल पहले तक तो सब ठीक था, लेकिन दो साल से मेरे पति का अपने ऑफिस की कलीग से अफेयर चल रहा है. मेरे पति कहते हैं कि अब वो स़िर्फ उसे ही प्यार करते हैं, उन्हें अब मुझमें कोई दिलचस्पी नहीं है. वो मुझसे तलाक़ चाहते हैं, लेकिन मैं उन्हें तलाक़ देकर आज़ाद नहीं घूमने देना चाहती. मेरे सास-ससुर मुझे बहुत प्यार करते हैं, लेकिन पति उनकी भी नहीं सुनते. सास-ससुर बच्चों के भविष्य के लिए चुपचाप सब कुछ सहने को कहते हैं, लेकिन मैं ये बात सहन नहीं कर पा रही हूं.
समाधान: आपकी जगह कोई भी महिला होती, तो वह पति का ऐसा व्यवहार सहन नहीं कर पाती. आप इस बारे में पति और सास-ससुर से खुलकर बात करें, उनसे बच्चों के भविष्य के बारे में डिस्कस करें. हो सके तो उस महिला से भी मिलें, जिससे पति का अफेयर चल रहा है. अगर ऐसा करने से स्थितियां सुधरती हैं, तो ठीक है, लेकिन इतना करने के बाद भी यदि आपके पति को आपका और बच्चों का ख़्याल नहीं आता, तो समझ लीजिए कि वो अपने नए रिश्ते में बहुत आगे निकल गए हैं. ऐसे में साथ रहने का कोई मतलब नहीं. आप एक बेवफ़ा इंसान के साथ ऐसे कितने दिनों तक एक छत के नीचे रह सकेंगी. बेहतर होगा कि आप अपने और बच्चों के भविष्य के बारे में सोचें और ज़िंदगी में आगे बढ़ें.

2) समस्या: मेरा बेटा एक रिलेशनशिप में नहीं रहता. वो कहता है कि मैं एक लड़की को बहुत दिनों तक डेट नहीं कर सकता. उसका बार-बार ब्रेकअप होता रहता है और उसे इसका दुख भी नहीं होता.
समाधान: आजकल के युवा रिलेशनशिप मेंटेनेंस की परवाह नहीं करते. ऐसी हरकत को इमोशनल डिनायल भी कह सकते हैं. ऐसे युवा भले ही अपने ब्रेकअप से दुखी हुए हों, लेकिन ये बात दूसरों पर ज़ाहिर नहीं होने देते, हर समय कूल दिखने की कोशिश करते हैं. जो युवा अपने इमोशन को दबा देते हैं, उन्हें ज़ाहिर नहीं करते, आगे चलकर वो डिप्रेशन के शिकार तक हो सकते हैं. कई बार ऐसे लोग आगे चलकर भावनाशून्य भी हो जाते हैं यानी उन पर किसी भी भावना का कोई असर नहीं होता, इसलिए बच्चों को अपनी भावनाएं स्वीकार करना सिखाएं, वरना आगे चलकर उन्हें रिलेशनशिप में बहुत द़िक्क़तें आ सकती हैं.

3) समस्या: मेरी शादी को पांच साल हो गए हैं और हमारा तीन साल का बेटा है. मेरे पति बिना ग़लती के बात-बात पर मुझ पर हाथ उठाते हैं और सास-ससुर भी उनका ही साथ देते हैं. मायके में शिकायत की, तो वो भी कहते हैं कि घर बचाने और बच्चे की ख़ातिर सहन कर लो, वरना तुम्हें कौन पालेगा. लेकिन मुझसे बार-बार ये बेइज़्ज़ती सहन नहीं होती.
समाधान: पति के हाथों बार-बार बिना ग़लती के मार खाना बहुत अपमानजनक है. आप कमाती नहीं हैं, तो इसका ये मतलब नहीं है कि आपकी कोई इज़्ज़त नहीं है. सबसे पहले तो आप स्वावलंबी बनने के लिए कोई काम शुरू कीजिए, इससे आपका आत्मविश्‍वास बढ़ेगा और आपके मन से अपने और बच्चे के भविष्य का डर निकल जाएगा. साथ ही पति और सास-ससुर से इस बारे में बात करें कि आप आगे से ये सब सहन नहीं करेंगी. अपने लिए आपको ख़ुद ही बात करनी होगी, ख़ुद ही आगे आना होगा.

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4) समस्या: हमारा इकलौता बेटा अमेरिका में सेटल हो गया है, उसकी बीवी भी वहीं नौकरी करती है. वो चाहते हैं कि हम वहां उनके साथ रहें, लेकिन वहां हमारा अपना कोई नहीं है. हमारा वहां मन नहीं लगता. बेटे-बहू के बिना हमारा यहां भी मन नहीं लगता. इस तरह ज़िंदगी कैसे कटेगी, समझ नहीं आता.
समाधान: ऐसी स्थिति में पैरेंट्स को समझदारी से काम लेना चाहिए. आप बेटे-बहू का भविष्य ख़राब नहीं कर सकते, इसलिए आपको बीच का रास्ता निकालना चाहिए. ये सच है कि पूरी ज़िंदगी अपने देश में बिताने के बाद विदेश में रहना मुश्किल है, लेकिन अकेले रहना भी तो संभव नहीं. ऐसे में पैरेंट्स को विन-विन सिचुएशन अपनानी चाहिए यानी अपनी सुविधानुसार दोनों जगहों पर रहना चाहिए. आप चाहें तो त्योहारों के समय या सर्दियों में अपने देश में रह सकते हैं और गर्मियों में या फ्री टाइम में बेटे-बहू के साथ विदेश में रह सकते हैं. ऐसा करके आप बिज़ी भी रहेंगे और ख़ुश भी. ज़िद करके आप भी दुखी रहेंगे और आपके बच्चे भी. बच्चों की और अपनी सुविधानुसार समाधान निकाल लीजिए.

5) समस्या: हमारी शादी को एक साल हो गया है. अभी कुछ दिन पहले ही मेरी पत्नी ने मुझे बताया कि शादी से पहले उसका अफेयर था और ब्रेकअप के बाद से उन दोनों ने न कभी एक-दूसरे को फोन किया और न ही कभी एक-दूसरे से मिले. लेकिन पत्नी की पिछली ज़िंदगी का सच जानने के बाद मैं उसके साथ नॉर्मल व्यवहार नहीं कर पा रहा हूं. मुझे लगता है कि वो मन ही मन उसकी तुलना मुझसे करती होगी. मेरे साथ रहते हुए भी उसके ख़्यालों में वो ही रहता होगा. अब मैं अपनी पत्नी के साथ पहले की तरह बेहिचक नहीं रह पा रहा हूं.
समाधान: आप सबसे पहले अपनी पत्नी की जगह ख़ुद को रखकर देखिए. अगर आपके साथ ऐसा हुआ होता, तो आप क्या करते? आपकी पत्नी ने अपनी बीती ज़िंदगी के बारे में आपको ईमानदारी से सब कुछ बताया और अब वो बीती बातों को भूलकर ज़िंदगी में आपके साथ आगे बढ़ चुकी है. फिर आप क्यों उनकी पिछली ज़िंदगी के बारे में सोचकर अपना आज ख़राब कर रहे हैं. आप भी बीती बातों को भूल जाइए और अपनी शादीशुदा ज़िंदगी को ख़ुशनुमा बनाइए.

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How To Deal With Crossroads In Life

6) समस्या: मेरे पापा का ऑटोमोबाइल का बिज़नेस है, लेकिन मैं फोटोग्राफी में करियर बनाना चाहता हूं. मेरे पापा ने अपने इस बिज़नेस को खड़ा करने में अपनी पूरी ज़िंदगी लगा दी, अब वो चाहते हैं कि मैं अपना पैशन छोड़कर उनका काम संभालूं, लेकिन मेरा बिज़नेस में ज़रा भी मन नहीं लगता. मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं क्या करूं.
समाधान: जहां तक करियर की बात है, तो ज़िंदगी का ये फैसला हमें ख़ुद ही लेना होता है. कई बार ऐसा भी होता है कि जिस काम को हम अपना पैशन समझते हैं, जब हम उसे करने बैठते हैं, तो समझ आता है कि ये मात्र हमारा शौक था, हम उस काम के लिए बने ही नहीं थे. आपको सबसे पहले अपने पैशन को पहचानना होगा. यदि फोटोग्राफी वाकई आपका पैशन है, तो आप उसके बिना नहीं रह पाएंगे. ऐसे में आप यदि बेमन से अपने पिता का बिज़नेस संभालेंगे, तो शायद उसे उस मुक़ाम तक न पहुंचा सकें, जहां आप अपने मनपसंद करियर को पहुंचा सकते हैं. आपको अपने पापा से इस बारे में बात करनी चाहिए और अपने पैशन के लिए काम करना चाहिए. आपके पापा अपने बिज़नेस को इसलिए इतना आगे बढ़ा पाए, क्योंकि ये उनका पैशन था. इसी तरह आपको अपने पैशन को ही करियर बनाना चाहिए.

7) समस्या: मैं एक हाउसवाइफ हूं. मेरा बचपन एक छोटे शहर में बीता. मेरी शादी मुंबई के लड़के से हुई, इसलिए शादी के बाद मैं यहां आ गई. मेरे पति और ससुराल वालों को लगता है कि मेरा रहन-सहन, बातचीत करने का तरीक़ा उन जैसा नहीं है. मेरे पति मुझे कहीं घुमाने-फिराने, पार्टी वगैरह में नहीं ले जाते. मुझे ये सब अच्छा नहीं लगता, इससे मेरा कॉन्फिडेंस कम होता जा रहा है.
समाधान: सबसे पहले इस बात पर ध्यान दें कि आपके पति या ससुरालवाले आपके साथ ऐसा व्यवहार क्यों कर रहे हैं. आपमें वाकई कमी है या वो आपको नीचा दिखाने के लिए ऐसा करते हैं. यदि आप में कमी है, तो आप अपनी पर्सनैलिटी को निखारने की कोशिश करें और यदि वो स़िर्फ आपको नीचा दिखाने के लिए ऐसा कर रहे हैं, तो उनसे इस बारे में बात करें और कहें कि आप ये सब सहन नहीं करेंगी.

8) समस्या: मेरी उम्र 30 साल है. मेरी प्रॉब्लम ये है कि मैं अफेयर तो कर लेता हूं, लेकिन जैसे ही बात शादी तक पहुंचती है, तो मैं डर जाता हूं और ब्रेकअप कर लेता हूं. मैं शादी की ज़िम्मेदारी लेने से डरता हूं.
समाधान: ये आपकी अकेले की प्रॉब्लम नहीं है, आजकल अधिकतर युवा कमिटमेंट फोबिया के शिकार हैं. वो अफेयर तो करना चाहते हैं, लेकिन शादी की ज़िम्मेदारी नहीं उठाना चाहते. कई लोग शादी तो कर लेते हैं, लेकिन बच्चे की ज़िम्मेदारी नहीं उठाना चाहते. ये आपको तय करना होगा कि यदि आपको सेटल्ड लाइफ चाहिए, तो आपको उसकी ज़िम्मेदारियां उठाने के लिए भी तैयार रहना होगा.

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9) समस्या: मेरे शादी को पांच साल हो गए हैं. मेरा चार साल का बेटा है. कुछ समय पहले मेरे पति की अचानक एक्सीडेंट में मौत हो गई. अब मेरे ससुराल वाले चाहते हैं कि मैं अपने देवर से शादी कर लूं, लेकिन मेरा मन उसे अपना पति मानने को तैयार ही नहीं है. मैंने कभी अपने देवर को उस नज़र से देखा ही नहीं है. मुझे समझ नहीं आ रहा कि मैं क्या करूं.
समाधान: आपकी स्थिति में फैसला लेना वाकई मुश्किल होता है. पति को खोने का दर्द, बच्चे के भविष्य की चिंता, अपनी ज़िंदगी की फिक्र… आपके मन में न जाने कितनी उथल-पुथल मच रही होगी. यदि आप अभी फैसला नहीं ले पा रही हैं, तो ख़ुद को थोड़ा और टाइम दीजिए. किसी भी इंसान को अपनी ज़िंदगी में शामिल करने से पहले उसे मन से स्वीकार करना ज़रूरी होता है. यदि आप अपने देवर को पति के रूप में नहीं स्वीकार कर पाएंगी, तो उनके साथ ख़ुश नहीं रह पाएंगी इसलिए अपनी ज़िंदगी का फैसला सोच-समझकर लें, जिसमें आपकी और आपके बच्चे दोनों की ख़ुशी शामिल हो.

– कमला बडोनी

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