कहीं आपके बर्तन आपको बीमार तो नहीं कर रहे? (Are Your Utensils Making You Sick?)

बर्तन

हम जिन बर्तनों में खाना पकाते हैं या फिर जिनमें खाना परोसते हैं, उनका असर हमारी सेहत को काफ़ी हद तक प्रभावित करता है. बर्तन जिन धातुओं से बने होते हैं, वो खाने के ज़रिए हमारे शरीर में पहुंचकर हम पर अच्छा या बुरा असर डाल सकती हैं. ऐसे में बहुत ज़रूरी है कि हमें यह पता हो कि कौन-सी धातु के बर्तन हमारे लिए सेफ हैं और कौन-से अनसेफ. आमतौर पर हम इन बर्तनों का प्रयोग करते हैं- स्टील, एल्युमिनियम, कॉपर, आयरन, लेड, नॉनस्टिक. इनके क्या इफेक्ट-साइडइफेक्ट होते हैं, आइए जानें-

 

एल्युमिनियम
यह काफ़ी लोकप्रिय है, क्योंकि इस्तेमाल में आसान है, हल्का होता है और क्लीन करने में भी आसान होता है. लेकिन कई रिसर्च में एल्युमिनियम और कई तरह की बीमारियों के बीच संबंध पाया गया. यही वजह है कि व़क्त के साथ-साथ इसमें काफ़ी बदलाव करके इसे कुकिंग के लिए सेफ बनाने के प्रयास किए गए हैं.

*  यदि मस्तिष्क में एल्युमिनियम का स्तर अधिक मिलता है, तो अल्ज़ाइमर, पार्किंसन्स व अन्य मस्तिष्क संबंधी समस्याओं का ख़तरा बना
रहता है.

* हालांकि बहुत कुछ इस बात पर भी निर्भर करता है कि खाना कितनी देर तक बर्तन में पकता है या कितने समय तक स्टोर किया जाता है.

* दूसरी ओर यह भी सच है कि मस्तिष्क संबंधी बीमारियों का कारण स़िर्फ एल्युमिनियम ही नहीं है और इसकी जितनी मात्रा बर्तनों के ज़रिए शरीर में  जाती है, वो इतनी अधिक नहीं होती.

* फिर भी एल्युमिनियम को कुकिंग के लिए इस्तेमाल करते समय सावधानी बरतें, क्योंकि यह बहुत ज़्यादा रिएक्टिव मेटल है और गर्म करने पर  इसकी काफ़ी बड़ी मात्रा खाने में जा सकती है.

प्लास्टिक

* जहां तक खाने-पीने की बात है, तो प्लास्टिक जितना हो सके अवॉइड करें.

* हार्ड प्लास्टिक में बीपीए होता है, जो एक तरह का टॉक्सिन होता है.

* साइंटिस्ट्स बीपीए का संबंध कैंसर, इम्यून फंक्शन्स में गड़बड़ी, अर्ली प्यूबर्टी, ओबेसिटी, डायबिटीज़ और हाइपर एक्टिविटी से जोड़कर देखते हैं.

* यह प्लास्टिक के ज़रिए आपके खाने-पीने में जा सकता है.

* हाल ही में हुए एक रिसर्च में यह बात सामने आई है कि बीपीए फ्री प्लास्टिक में भी सिंथेटिक केमिकल्स होते हैं, जो खाने में जा सकते हैं.

* ऐसे में यदि आप प्लास्टिक का इस्तेमाल करते भी हैं, तो बीपीए फ्री और पीवीसी फ्री प्लास्टिक ही यूज़ करें.

* माइक्रोवेव में प्लास्टिक का इस्तेमाल न करें. यहां तक कि माइक्रोवेव सेफ भी नहीं, क्योंकि इसका मतलब होता है कि स़िर्फ प्लास्टिक मेल्ट नहीं  होता, बल्कि अत्यधिक हीट की वजह से केमिकल्स ट्रांसफर तेज़ी से होते हैं.

* फैटी, ग्रीसी या एसिडिक फूड प्लास्टिक में स्टोर न करें.

* स्क्रैच या टूटे-फूटे प्लास्टिक का इस्तेमाल न करें.

* हार्ड प्लास्टिक मेलामाइन डिशेज़ यूज़ न ही करें, तो बेहतर है, क्योंकि ये मेलामाइन केमिकल को फॉर्मलडिहाइड के साथ मिलाने से बनता है, जो  कैंसरस माना जाता है.

नॉनस्टिक

* यह आजकल बेहद पॉप्युलर हैं, लेकिन इनका अधिक इस्तेमाल आपकी सेहत के लिए हानिकारक हो सकता है.

* दरअसल यह नॉनस्टिक कोटिंग पीएफओए (परफ्लूरोऑक्टेनॉइक एसिड) से बनती है, जो मानव शरीर के लिए कैंसरस होता है.

* इसलिए नॉनस्टिक बर्तनों के ओवरहीटिंग से बचना चाहिए, जिससे केमिकल्स तेज़ी से खाने में न जा सकें.

* रिसर्च से पता चला है कि नॉनस्टिक बर्तनों के ओवरहीटिंग पर जो धुआं निकलता है, उससे पंछियों की जान तक जा सकती है और हम भी बीमार हो  सकते हैं.

कॉपर

* कम मात्रा में कॉपर हेल्दी होता है, लेकिन अधिक होने पर यह विषैला साबित हो सकता है.

* आमतौर पर तो कॉपर को कुकिंग के लिए कम ही इस्तेमाल में लाया जाता है, लेकिन यदि आप यूज़ करते ही हैं, तो यह ध्यान रखें कि कोटेड  कुकवेयर ही यूज़ करें.

* अनलाइन्ड कुकवेयर ख़तरनाक हो सकते हैं.

* सामान्यतया कॉपर कुकवेयर पर टिन, निकेल या स्टेनलेस स्टील की लाइनिंग होती है, लेकिन यह प्रोटेक्टिव लाइनिंग समय के साथ-साथ डैमेज हो  जाती है. इसमें भी निकेल कॉपर की ही तरह हेवी मेटल होता है और चूंकि यह बहुत अधिक रिएक्टिव होता है, तो बहुत-से लोगों को इससे एलर्जी भी  होती है, तो निकेल कोटेट बर्तनों को भी कुकिंग के इस्तेमाल में नहीं लाना चाहिए.

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बर्तन

कुकिंग के लिए सेफ ऑप्शन

* सबसे अच्छा है स्टेनलेस स्टील, ग्लास, आयरन या सिरामिक का इस्तेमाल करें.

* आयरन और मिट्टी के बर्तन सबसे हेल्दी माने जाते हैं. आयरन शरीर के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है. यह रेड ब्लड सेल्स के निर्माण के लिए बहुत  ज़रूरी है. हालांकि इसकी अधिकता भी ख़तरनाक है, लेकिन अधिकांश लोगों में आयरन की कमी ही देखी जाती है और आयरन के बर्तन रोज़ाना की  ज़रूरत की 20% तक ही मात्रा प्रदान करते हैं, जो सेफ है.

* सिरामिक और ग्लास कुकवेयर भी सेफ होते हैं और ये क्लीन करने में भी आसान होते हैं.

* इनमें स़िर्फ इस बात का ख़्याल रखने की ज़रूरत होती है कि इनके निर्माण के दौरान सतर्कता बरतनी चाहिए, क्योंकि ग्लेज़्ड सिरामिक या ग्लास में  कुछ सूक्ष्म तत्वों का इस्तेमाल होता है, जैसे- लेड, पिग्मेंट, कैडमियम, जो शरीर के लिए हानिकारक होते हैं और इनके भोजन में जाने की संभावना  होती है. हालांकि बहुत-से देशों में कुकिंग के लिए इस तरह के ग्लेज़्ड प्रोडक्ट्स बेचने पर पाबंदी है, लेकिन हमें स्वयं भी सतर्कता बरतनी चाहिए.

* हाल ही के दिनों में सिलिकॉन कुकवेयर भी काफ़ी पॉप्युलर हुए हैं. ये दरअसल सिंथेटिक रबर होता है, जिसमें बॉन्डेड सिलिकॉन (प्राकृतिक तत्व, जो  रेत और पत्थरों में प्रचुर मात्रा में होता है) और ऑक्सीजन होता है.

* फूड ग्रेड सिलिकॉन कुकवेयर के कोई साइड इफेक्ट्स नहीं देखे गए. न तो यह खाने के साथ रिएक्ट करता है, न ही इसके धुएं से कोई हानि होती है.

स्टोरेज सेफ बर्तन

*  जब स्टोरेज की बात आती है, तो ऐसे बर्तनों को चुनें, जिनमें से केमिकल्स का रिसाव न होता हो.

* बेहतर होगा कि आप स्टेनलेस स्टील या फूड-ग्रेड सिलिकॉन में स्टोर करें.

* वुड भी एक बेहतर ऑप्शन है.

* हाई एसिडिक फूड्स को स्टेनलेस स्टील के बर्तनों में स्टोर न करें.

रिस्क फैक्टर को कैसे कम करें?

* एल्युमिनियम के बर्तनों में लंबे समय तक खाना न तो स्टोर करें, न ही उन्हें कुकिंग में यूज़ करें.

* अनकोटेड कॉपर के बर्तनों को कुकिंग में यूज़ न करें.

* जिन बर्तनों में स्क्रैचेज़ हों, उन्हें इस्तेमाल में न लाएं.

* लंबे समय तक एक ही बर्तन को यूज़ न करें.

* उन प्लास्टिक बाउल्स को माइक्रोवेव में बिल्कुल भी यूज़ न करें, जिन पर माइक्रोसेफ का लेबल न लगा हो.

* अगर आप प्लास्टिक कंटेनर्स को स्टोरेज के लिए रियूज़ करते हैं, तो स्टोरिंग से पहले खाने को पूरी तरह से ठंडा होने दें, फिर फ़ौरन फ्रिज में रख दें.

* सिलिकॉन कुकवेयर को भी बहुत हाई टेम्प्रेचर (220 डिग्री सें. से अधिक) पर यूज़ न करें, वो मेल्ट हो सकता है. इसके अलावा सिलिकॉन कुकवेयर में  से गर्म भोजन को निकालते व़क्त भी सावधानी बरतें, क्योंकि यह बहुत ही फ्लेक्सिबल होता है, जिससे खाना तेज़ी से स्लिप होकर आपके शरीर पर भी  गिर सकता है.

बर्तनों को हेल्थ से जोड़कर देखें, डेकोर से नहीं

* बर्तनों का प्रयोग खाना पकाने व परोसने के लिए होता है, लेकिन अगर आप उन्हें डेकोर के उद्देश्य से लेंगे, तो शायद इसकी बड़ी क़ीमत
चुकानी पड़े.

* यह ध्यान रहे कि आपका किचन सुंदर होने की बजाय हेल्दी और क्लीन होना चाहिए.

* अगर आप अपने किचन को ड्रॉइंगरूम की तरह सजाकर रखेंगे, तो बहुत हद तक संभव है कि वहां से हेल्थ ग़ायब हो जाएगी.

* भले ही कुछ बर्तन देखने में उतने सुंदर न लगें और आपके किचन के डेकोर को मैच न करें, लेकिन अगर वो हेल्दी हैं, तो आपको उन्हें ही रखना  चाहिए.

* बहुत-से अट्रैक्टिव कुकवेयर व कंटेनर्स आजकल मिलते हैं, लेकिन उनमें मौजूद केमिकल्स आपको बीमार कर सकते हैं, तो बेहतर होगा अगली बार किचन के लिए कुछ भी ख़रीदने से पहले आप इस बात पर ज़रूर ध्यान दें कि आपके लिए क्या ज़्यादा ज़रूरी है- अट्रैक्टिव डेकोर या बेहतर हेल्थ.

– गीता शर्मा