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मानसिक स्वास्थ्य पर एक्सरसाइज़ के फ़ायदे (Benefits Of Exercise On Mental Health…)

हमें एक्सरसाइज़ क्यों करना चाहिए? इस सवाल को लेकर गूगल सर्च किया जाए, तो इसके अनगिनत फ़ायदे पढ़ने को मिल जाएंगे. साथ ही फिटनेस व सेहत से जुड़े लाभ भी. लेकिन इस बात पर भी ध्यान देने की ज़रूरत है कि व्यायाम हमारे मानसिक स्वास्थ्य को भी बेहतर बनाता है. इस संदर्भ में वीटाबायोटिक्स लिमिटेड, फिटनेस एंड न्यूट्रीशन एक्सपर्ट के वीपी रोहित शेलतकर ने कई महत्वपूर्ण बातें बताई.

अनगिनत वैज्ञानिक अध्ययनों ने व्यायाम और बेहतर मानसिक तंदुरुस्ती के बीच सीधा संबंध साबित किया है. चाहे अवसाद का इलाज करना हो या चिंता घटानी हो या एडीएचडी यानी (अटेंशन डेफिसिट हाइपरएक्टिविटी डिस्ऑर्डर) ध्यान की कमी और अत्यधिक सक्रियता की बीमारी से निपटना हो, नियमित व्यायाम का हमारी मानसिक और भावनात्मक अवस्था पर सीधा असर पड़ता है. हो सकता है कि विज्ञान इसे लेकर स्पष्ट न हो, लेकिन अब हमें व्यायाम को केवल एरोबिक क्षमता बढ़ाने और मांसपेशियां मज़बूत करने तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि हमें इसे अपने मष्तिष्क को प्राप्त किसी वरदान की दृष्टि से भी देखना होगा.
व्यायाम के हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ने वाले कुछ अहम अप्रत्यक्ष प्रभाव नीचे दिए गए हैं. संभव है कि ये बदलाव उभरी हुई मज़बूत मांसपेशियों की तरह शरीर पर प्रत्यक्ष रूप से दिखाई न दें, लेकिन हमारे मानसिक स्वास्थ्य को बेहद लाभ पहुंचा सकते हैं.

तनाव घटाने में मदद करना…
दैनिक एरोबिक व्यायाम करने, जैसे- दौड़ने, साइकिल चलाने, पैदल चलने और तैरने से मस्तिष्क को तनाव पैदा होने पर अपनी प्रतिक्रियाएं नियंत्रित करने, सूजन घटाने, ऑक्सीडेटिव तनाव के विरुद्ध प्रतिरोध बढ़ाने और यहां तक कि तंत्रिका विकास को तेज करने में भी मदद मिलती है. व्यायाम करते वक़्त मस्तिष्क द्वारा छोड़े गए एंडोर्फिन हमारे समग्र मानसिक स्वास्थ्य के लिए फ़ायदेमंद होते हैं, क्योंकि ये ऐसे रसायन होते हैं, जो कुदरती दर्दनिवारक के रूप में कार्य करते हैं और नींद के चक्र में भी सुधार लाते हैं, नतीज़तन तनाव शिथिल हो जाता है. इस प्रकार संपूर्ण व्यायाम हमारे हाथ में मौजूद काम का बोझ महसूस नहीं होने देता और जीवन के बारे में सकारात्मक दृष्टिकोण बरक़रार रखता है.

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बुरी लत से दूर रहना…
मनुष्य होने के नाते संभव है कि अलग-अलग मौक़ों और हालात के वशीभूत होकर हम अपना भावनात्मक संतुलन या मानसिक संतुलन का एहसास ही खो बैठें! ऐसे हालात से निपटने के लिए लोग अक्सर शराब, सिगरेट या नशीली दवाओं की शरण लेते हैं. जबकि इन स्थितियों में व्यायाम एक बेहतर विकल्प है, क्योंकि यह शरीर को ऐसे पदार्थों पर अपनी निर्भरता घटाने में मदद करता है और कई मायनों में व्यसनों को लगभग मार भगाता है. नियमित रूप से व्यायाम करके हम जीवन के उन तनावों से निपटने में अपने शरीर और मस्तिष्क की मदद कर सकते हैं, जिन्हें ख़ासकर महामारी ने बद से बदतर बना दिया है.

एडीएचडी के असर को कम करना…
एडीएचडी से पीड़ित लोगों को संबंध कायम रखने में मुश्किलें पेश आ सकती हैं और उनका स्वाभिमान भी घट जाता है. आमतौर पर ऐसे व्यक्ति ज़रूरत से ज़्यादा सक्रिय होते हैं और इनमें भूलने की बीमारी के लक्षण मौजूद होते हैं, जिसका इलाज टॉक थेरेपी देकर या दवाएं खिलाकर होता है. तब भी वैज्ञानिक अनुसंधान उत्तरोत्तर इस सुझाव पर मुहर लगा रहे हैं कि एडीएचडी के लक्षणों से जूझनेवाले व्यक्तियों पर व्यायाम का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. व्यायाम शरीर में प्राकृतिक रूप से उत्पन्न होनेवाले रसायनों, जैसे- सेरोटोनिन, डोपामाइन और नॉरेपिनेफ्रिन की मात्रा बढ़ाने में मदद करता है. ये सभी रसायन एडीएचडी के रोगियों की स्मृति, एकाग्रता, मनोदशा और प्रेरणा बढ़ाने में मदद कर सकते हैं.

मस्तिष्क-आंत का संबंध और इसमें व्यायाम की भूमिका
लोग अक्सर ‘गट फीलिंग’ या भोजन की तीव्र लालसा उत्पन्न होने की बात करते हैं, जो उनका मूड बनाने में मदद करती है. इसका कारण यह है कि हमारा मस्तिष्क और हमारी आंत आपस में घनिष्ठ रूप से जुड़े हुए हैं. दरअसल, मनुष्य की आंत को अक्सर ‘दूसरा मस्तिष्क’ कहा जाता है, क्योंकि इसका अपना स्वतंत्र तंत्रिका-तंत्र मौजूद है. आंत की दीवार पर लगभग 100 मिलियन तंत्रिका कोशिकाओं वाला एक नाजुक नेटवर्क फैला हुआ है. यह तंत्रिका नेटवर्क ऐसी परिष्कृत प्रणाली है, जो आंत और मस्तिष्क के बीच स्थापित बुनियादी तंत्रिका जोड़ (यानी वेगस नस) के टूट जाने पर भी काम करती रहती है. इसके अलावा सेरोटोनिन को मस्तिष्क का न्यूरोट्रांसमीटर कहे जाने के बावजूद शरीर का लगभग 90 प्रतिशत सेरोटोनिन असल में पाचन तंत्र के अंदर बनता है.

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मस्तिष्क-आंत के इस संबंध में व्यायाम की भूमिका यह है कि जिस क्षण हम नियमित रूप से व्यायाम करना शुरू करते हैं, उसी क्षण से हम अपने खाने के बारे में भी ज़्यादा सचेत होने लगते हैं. अपने आहार पर इतनी गहराई से ध्यान लगाने का हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर सीधा प्रभाव पड़ता है, क्योंकि हमें पता है कि हमारे समग्र स्वास्थ्य के लिए भोजन और पोषक तत्व कितने महत्वपूर्ण हैं. इसके अलावा जो लोग नियमित रूप से व्यायाम करते हैं और बहुत ज़्यादा कैलोरी बर्न करते हैं, वे अपने आहार को लेकर थोड़ी छूट भी ले सकते हैं. वे जीवन के छोटे-छोटे सुखों, जैसे- कभी-कभार केक और पिज़्ज़ा खा लेने या किसी पेय पदार्थ का सेवन करने से ख़ुद को वंचित नहीं रखते. नतीज़तन ख़ुद को खाने-पीने से रोकने के चलते पैदा हुए दुख के अस्थायी किंतु तीखे एहसास को कम किया जा सकता है.
कुल मिलाकर हमारा मस्तिष्क नींद, पोषक तत्वों और ऑक्सीजन की एक तिपाई पर खड़ा होता है और नियमित व्यायाम करने से इन तीनों कारकों को प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से मदद मिलती है. इसीलिए जो भी व्यक्ति यह संदेह करता है कि एक्सरसाइज़ से मानसिक स्वास्थ्य को ठोस लाभ नहीं मिल सकते, विज्ञान उससे सहमत नहीं है.

Photo Courtesy: Freepik

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