Close

सोलो ट्रैवल करने के होते हैं ये फ़ायदे (Benefits Of Solo Travel)

मल्टीनेशनल कंपनियों का वर्कलोड हो या ख़ुद का बिज़नेस या फिर घर-परिवार की ज़िम्मेदारी- आज हम इतने व्यस्त हो गए हैं कि हमारे पास ख़ुद के लिए ही समय नहीं है. ऐसे में सोलो ट्रैवलिंग मस्ती और एंटरटेनमेंट का बेस्ट जरिया है. क्या आप जानते हैं कि सोलो ट्रैवलिंग करने से नई-नई जगहों को देखने, उनके बारे में जानने के साथ-साथ शरीर और दिमाग़ को भी काफ़ी फ़ायदा होता है.

ट्रिप प्लान करने की पूरी आज़ादीः सोलो ट्रैवल करने का सबसे बड़ा फ़ायदा ये होता है कि आप अपने अनुकूल ट्रिप प्लान करते हैं और ट्रिप से जुड़े सारे निर्णय लेते हैं, जैसे- आपको किस तारीख़ पर निकलना है, कौन-से डेस्टिनेशन पर जाना है, अपनी पसंद और बजट के अनुसार होटल का चुनाव, अपनी पसंद का एडवेंचर और फूड. अपने ट्रिप से जुड़ी हर छोटी-बड़ी जानकारी जानने की पूरी आज़ादी होती है. सोलो ट्रैवलिंग में आप अपने ट्रिप की प्लानिंग उस तरह से कर सकते हैं, जैसा कि आप चाहते हैं.



नए-नए लोगों से मिलनाः जब फैमिली और फ्रेंड्स के साथ ट्रिप पर जाते हैं, तो कंफर्ट जोन में रहते हुए ट्रैवल का मज़ा लेते हैं. लेकिन जब आप सोलो ट्रैवल करते हैं, तब आपकी मुलाकात स्थानीय और अंजान लोगों से होती है. ट्रैवल के दौरान नए दोस्त बनते हैं और नए-नए अनुभव होते हैं.

नए अनुभव और कल्चर के बारे में जानने का मौका: सोलो ट्रैवल के दौरान आप नए लोगों से मिलते हैं. आपको नई संस्कृति, नए त्योहारों और नई-नई बातों को जानने और सीखने का मौका मिलता है. वापस आने के बाद भी ट्रिप की यादें और अनुभव को अपने फैमिली और फ्रेंड्स के साथ शेयर करने का अवसर मिलता है.

क्रिएटिविटी का बढ़ना: अनेक रिसर्च से ये बात साबित हुई है कि सोलो ट्रैवलिंग करने से दिमाग़ की क्षमता बढ़ती है, जिससे रचनात्मक विकास होता है, कॉन्फिडेंस बढ़ता है और कम्युनिकेशन स्किल्स बेहतर होती है. ट्रैवल के दौरान नई-नई जानकारियां मिलती हैं और अनुभव होते हैं, जिनसे क्रिएटिविटी और कॉन्फिडेंस बढ़ता है.

ख़ुद के बारे में जानने का मौका: इस दौरान आपको ख़ुद के शौक और रुचियों (किताबें पढ़ना, म्यूजिक, किस टाइप का एडवेंचर, फोबिया जैसे- ऊंचाई, पानी, आग आदि) के बारे में जानने का मौका मिलता है. अत: सोलो ट्रैवल करते हुए आप उन चीज़ों के बारे में जानने और समझने के लिए तैयार रहते हैं, जिनको आप भूल गए थे.

अपने कंफर्ट जोन को छोड़ें: अकेले ट्रैवल करना ज़ोखिम भरा और ख़तरनाक भी हो सकता है, खासतौर से तब जब आपने पहले कभी अकेले ट्रैवल न किया हो. पहली बार अकेले सफर करना थोड़ा अटपटा लग सकता है, लेकिन सोलो ट्रैवल करने का
सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि आपको रोमांच करने का मौका मिलता है. वह रोमांच किसी भी तरह का हो सकता है, जैसे पैराग्लाइडिंग/स्काई डाइविंग से लेकर किसी दूसरी भाषा को सीखने तक या फिर इंटरनेशनल फ्लाइट में उड़ान भरने तक.
अपने पर भरोसा तभी होगा जब रिस्क लेने की हिम्मत करेंगे.

नई भाषा सीखने का अवसर: अगर आपको नई-नई भाषा सीखने का शौक है तो आपको सोलो ट्रैवल ज़रूर करना चाहिए. भाषा सीखने के बहुत लाभ होते हैं- स्थानीय लोगों को अपना दोस्त बना सकते हैं, किसी मुश्किल में पड़ने पर स्थानीय लोगों की मदद ले सकते हैं. भाषा भले ही धारा प्रवाह न बोल पाएं. थोड़े- थोड़े वाक्य भी बहुत होते हैं भावनाओं को समझने के लिए.

प्रॉब्लम-सॉल्विंग+डिसीजन मेकिंग= लाइफ लॉन्ग स्किल्सः सोलो ट्रैवलिंग आपको अपनी प्रॉब्लम्स को ख़ुद हल करने और ख़ुद निर्णय लेने के क़ाबिल बनाती है. यह एक ऐसी स्किल है, जो जीवनभर आपकी मदद करती है. ट्रैवल के दौरान हर काम
ख़ुद करना पड़ता है, जिससे जीवनभर हर काम को अपने आप करने की आदत पड़ जाती है. आसान शब्दों में कहें, तो सोलो ट्रैवलिंग आपको मुश्किल परिस्थितियों से निपटना और अपने काम को बेहतर तरीके से करना सिखाती है.

सोलो ट्रैवल के हेल्थ बेनेफिट्स

कम स्ट्रेस
यदि आप सोलो ट्रैवल करते हैं, तो ट्रैवल के दौरान स्ट्रेस और एंग्जाइटी कम होती है, क्योंकि नए-नए डेस्टिनेशंस पर जाने से दिल-दिमाग़ रिलैक्स होता है. किसी बात की चिंता नहीं रहती और मानसिक शांति मिलती है. इस दौरान आप समय
पर ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर लेना न भूलें, ताकि सेहत भी अच्छी बनी रहे.



हैप्पी हार्मोंस में वृद्धि
अपनी मनपसंद जगह जाने पर हम कुछ-न-कुछ नया एक्सप्लोर करते हैं, जिससे ख़ुशी का एहसास होता है और बॉडी में डोपामाइन और सेरोटोनिन जैसे हैप्पी हार्मोंस का स्तर बढ़ता है. आप अधिक एनर्जेटिक और हैप्पी फील करते हैं.
ट्रैवलिंग से आने के बाद भी कई दिनों तक उन बीते पलों को लोगों के साथ शेयर करके एक नई ऊर्जा का एहसास होता है और मूड भी बूस्ट होता है.

फिट रहते हैं
सोलो ट्रैवलिंग के दौरान पहाड़ों पर ट्रैकिंग, बीच वॉक, सिटी को एक्सप्लोर करने के लिए चलना पड़ता है. इतना अधिक वॉक करने से दिल और फेफड़े मजबूत होते है और वज़न भी कम होता है.

स्ट्रॉन्ग इम्युनिटी
सोलो ट्रैवल करने पर नए-नए डेस्टिनेशन देखने का मौका मिलता है. लेकिन हर जगह का मौसम, तापमान और वातावरण अलग होता है. और जब शरीर अलग- अलग मौसम, तापमान और वातावरण के संपर्क में आता है, तो इम्युनिटी भी
स्ट्रॉन्ग होती है और बीमार नहीं पड़ते हैं.

अच्छी नींद
दिनभर की थकान होने की वजह से अच्छी नींद आती है. अनिद्रा और अन्य मेंटल हेल्थ प्रॉब्लम्स से छुटकारा मिलता है.

सोलो ट्रैवलिंग करते हुए बरतें ये सावधानियां

  • अकेले घूमने जा रहे हैं, तो उस डेस्टिनेशन के बारे में सारी जानकारी हासिल करें.
  • सोलो ट्रैवल कर रहे हैं, तो स़िर्फ उन्हीं जगहों पर जाएं, जहां पर ट्रैवल करना सेफ हो.
  • ऐसी जगहें, जहां पर अधिक अपराध हुए हों, वहां न जाएं.
  • अकेले सफर पर निकलने से पहले फैमिली और फ्रेंड्स के साथ सारी डिटेल्स शेयर करना न भूलें.
  • फैमिली और फ्रेंड्स के साथ लाइव लोकेशन शेयर करें.
  • सफर के बीच में अंजान लोगों के साथ ज़्यादा घुलें-मिलें नहीं और न ही उन पर ज़्यादा भरोसा करें.
  • जहां पर भी ख़तरे का अंदेशा हो, वहां से तुरंत निकल जाएं.
  • मदद के लिए स्थानीय पुलिस का नंबर अपने पास रखें.


    - पूनम कोठारी

Share this article