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Birthday Special: हिंदी सिनेमा के खलनायक ‘प्राण’ की 101वीं जयंती पर जानें उनकी ज़िंदगी से जुड़े दिलचस्प किस्से (Pran Birthday Special: Interesting Facts About Veteran Villain of Bollywood on His 101st Birth Anniversary)

बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता और मशहूर खलनायक प्राण साहब का आज 101वां जन्मदिन है. वो हिंदी सिनेमा के एक ऐसे कलाकार रहे हैं, जिन्होंने हीरो की भूमिका भी निभाई, लेकिन उन्हें लोकप्रियता खलनायक की भूमिकाएं निभाने के बाद मिली. उन्होंने बॉलीवुड की कई हिट फिल्मों में खलनायक की भूमिका निभाई और विलेन के तौर पर घर-घर में मशहूर हुए, इसलिए उन्हें ‘विलेन ऑफ द मिलेनियम’ भी कहा गया. हिंदी सिनेमा में उनका करियर लगभग 6 दशक लंबा रहा और इस दौरान उन्होंने साढ़े तीन सौ से ज्यादा फिल्मों में दमदार किरदार अदा किए. चलिए प्राण साहब के जन्मदिन पर जानते हैं उनकी ज़िंदगी से जुड़ी दिलचस्प बातें.

1- प्राण साहब का जन्म 12 फरवरी 1920 को हुआ था. उनके पिता एक सरकारी कॉन्ट्रेक्टर थे और काम के सिलसिले में अक्सर दौरे पर रहा करते थे. प्राण साहब अपनी मां के लाड़ले बेटे थे. कहा जाता है कि उनका मन कभी भी पढ़ाई-लिखाई में नहीं लगा और उन्होंने मैट्रिक के बाद पढ़ाई छोड़ दी, लेकिन उन्होंने यह ठान लिया था कि उन्हें अपने जीवन में कुछ खास करना है.

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2- जब वो छठी क्लास पढ़ रहे थे तब से उन्हें सिगरेट पीने की लत लग गई और सिगरेट उनका पहला प्यार बन गया, लेकिन उनके इसीशौक ने उन्हें फिल्मी दुनिया का रास्ता भी दिखाया. दरअसल, एक बार सिगरेट लेने के लिए प्राण साहब पान की दुकान पर पहुंचे, जहां उनकी मुलाकात पटकथा-लेखक मोहम्मद वली से हुई. जब उन्होंने प्राण साहब को देखा तो उन्हें लगा कि उनकी लिखी हुई कहानी के लिए परफेक्ट कैरेटक्टर मिल गया.

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3- मोहम्मद वली के कहने पर प्राण साहब ने पंजाबी फिल्म ‘यमला जट’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की. इस फिल्म में काम करने के लिए उन्हें पचास रुपए महीने का मेहनताया दिया जाता था. फिल्मी दुनिया का रास्ता दिखाने वाले वली को उन्होंने उम्र भर अपना गुरु और मार्गदर्शक माना.

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4- प्राण साहब की दूसरी फिल्म थी ‘खानदान’ जो बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही, लेकिन हीरो बनना उन्हें कुछ खास रास नहीं आया. दरअसल, उन्हें बारिश में भीग कर गाना गाने या पेड़ों के आगे-पीछे घूमना अच्छा नहीं लगता था, इसलिए उन्होंने विलेन के तौर पर अपने किरदारों को निभाना शुरू किया. प्राण साहब अपने खलनायक वाले किरदारों में इस कदर डूब जाते थे कि असल ज़िंदगी में लोग उनसे खौफ खाने लगे. यहां तक कि बरसों तक किसी ने अपने बेटे का नाम प्राण रखना पसंद नहीं किया.

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5- प्राण साहब को फोटोग्राफी का शौक था, इसलिए उन्होंने दिल्ली और शिमला के एक स्टूडियो में नौकरी की, इसके बाद वो लाहौर चले गए. उन्होंने आज़ादी के बाद मायानगरी मुंबई का रूख किया और फिल्मों में काम पाने के लिए उन्हें खूब संघर्ष करना पड़ा. इसके लिए उन्हें अपनी पत्नी के गहने तक बेचने पड़े थे.

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6- खलनायक के तौर पर प्राण साहब ने फिल्म इंडस्ट्री में कामयाबी के नए आयाम को छुआ. कहा जाता है कि लोग उन्हें देखते ही बदमाश, लफंगे, गुंडे और हरामी कहते थे. आलम तो यह था कि महिलाएं और बच्चे उन्हें देख छिप जाया करते थे. हालांकि उन्होंने ‘शहीद’ और ‘उपकार’ जैसी फिल्मों में सकारात्मक भूमिका निभाकर अपनी विलेन वाली इमेज को बदलने की भी कोशिश की.

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7- प्राण साहब की खासियत थी कि उन्होंने कभी किसी की नकल नहीं की. वो अक्सर आम लोगों को बारीकी से देखते थे और अपने अभिनय में उस हाव-भाव का उपयोग करते थे. अपने किरदारों में जान डालने के लिए वो अक्सर अपने लुक के साथ प्रयोग करना पसंद करते थे. हालांकि जब वो अपने खलनायक वाले किरदारों से बोर होने लगे तो उन्होंने अपने उन किरदारों को कॉमेडी टच देना शुरू किया.

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8- वो एक ऐसे अभिनेता थे, जिन्होंने कभी राजनीति में दिलचस्पी नहीं दिखाई. दरअसल, प्राण साहब को राजनीति और नेताओं से चिढ़ थी. उनका कहना था कि अगर उन्हें अगला जन्म मिला तो अगले जन्म में भी वो प्राण ही बनना चाहेंगे.

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9- अपने काम को प्राण साहब सबसे ज्यादा महत्व देते थे. वो शूटिंग के दौरान अक्सर सेट पर सबसे पहले पहुंचते थे और पैकअप होने के बाद ही सेट से वापस लौटते थे. प्राण साहब दिलीप कुमार और धर्मेंद्र को शेर मानते थे, इसलिए फिल्मों में उनसे मार खाना पसंद करते थे.

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10- प्राण साहब भले ही परदे पर खलनायक और बुरे इंसान का किरदार निभाते थे, लेकिन असल ज़िंदगी में वो एक भले और संवेदनशील इंसान रहे हैं. वो हमेशा गरीब, बेसहारा और अनाथों की मदद के लिए आगे रहते थे. वो कभी भी अपनी फिल्मों को नहीं देखते थे, क्योंकि उनका मानना था कि यह समय की बर्बादी है. हिंदी सिनेमा के वो ऐसे खलनायक रहे हैं, जिन्हें हीरो के मुकाबले फिल्म में काम करने के लिए ज्यादा पैसे मिलते थे.