जीवन के हर पल को उत्सव बनाएं (Celebration Of Life)

जीवन के हर पल को उत्सव बनाना इसलिए ज़रूरी है, क्योंकि हमारे जीवन में अगले पल क्या होने वाला है, ये हम नहीं जानते. न हम अपना अतीत बदल सकते हैं और न ही भविष्य के बारे में जान सकते हैं, इसलिए जो पल हमारे पास है, उसे भरपूर जीएं. जीवन के हर पल को उत्सव बनाएं, सही मायने में सेलिब्रेशन इसे ही कहते हैं. जीवन के हर पल को उत्सव कैसे बनाएं? आइए, हम आपको बताते हैं.

Celebration Of Life

1) ख़ुश रहना सीखें
आपने अपने आसपास कुछ ऐसे लोगों को देखा होगा, जो हमेशा हंसते-मुस्कुराते रहते हैं. उन्हें देखकर लगता है जैसे उनके जीवन में कोई तकलीफ़ नहीं है और उनके लिए हर दिन उत्सव है. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि वो लोग अपने जीवन और अपनी ख़ुशियों से बहुत प्यार करते हैं और ख़ुश रहने की हर मुमक़िन कोशिश करते हैं. जीवन के हर पल को उत्सव बनाने के लिए आप भी ऐसा ही करें.

2) ख़ुशी के मौ़के तलाशें
हम में से अधिकतर लोग ये समझते हैं कि ख़ुशी के मौ़के ही जीवन में ख़ुशियां लाते हैं, जैसे त्योहार, शादी, करियर में तरक्क़ी… लेकिन रोज़मर्रा की ख़ुशी? उसके बारे में हम सोचते ही नहीं हैं. ख़ुशी का कोई मौक़ा नहीं होता, आप चाहें तो हर पल ख़ुश रह सकते हैं और इसके लिए आपको अलग से कुछ करने की ज़रूरत भी नहीं है. आपको बस अपने जीने का नज़रिया बदलना होगा और अपने जीवन में पॉज़िटिविटी बनाए रखनी होगी. अतः त्योहार या किसी ख़ास दिन पर ही नहीं, हर रोज़ ख़ुश रहने की कोशिश करें, इससे जीवन में पॉज़िटिविटी आती है और हम जीवन का भरपूर लुत्फ़ उठा पाते हैं.

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Celebration Of Life

3) ख़ुशी जीवन का असली उत्सव है
सुख-दुख हर किसी के जीवन में लगे रहते हैं. आज सुख है, तो कल दुख भी हो सकता है. यदि हम दुख को अपने जीवन से बड़ा समझेंगे तो कभी ख़ुश नहीं रह पाएंगे, इसलिए दुख कितना बड़ा है इसके बारे में सोचने की बजाय ये सोचें कि इससे कैसे बाहर निकला जाए. जो लोग जीवन के प्रति पॉज़िटिव अप्रोच रखते हैं, वो मुसीबतों के बारे में कम और उनसे निपटने के रास्ते के बारे में ज़्यादा सोचते हैं, इसलिए वो बड़ी से बड़ी मुसीबतों का आसानी से सामना कर पाते हैं. अतः अपने जीवन और ख़ुशी को सबसे ज़्यादा महत्व दें और हमेशा ख़ुश रहें, क्योंकि ख़ुशी ही जीवन का असली उत्सव है.

4) त्योहार आपसे हैं, आप त्योहार से नहीं
यदि हम ख़ुशी को त्योहारों से जोड़कर देखें, तो यहां भी ख़ुशी कम और प्रेशर ज़्यादा नज़र आता है. त्योहारों की तैयारियों को लेकर, ख़ासकर महिलाएं इतना तनाव महसूस करती हैं कि वो त्योहार का आनंद ही नहीं उठा पातीं. ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि वो हर काम परफेक्ट करना चाहती हैं और ऐसा हो नहीं पाता. व़क्त के साथ महिलाओं की ज़िम्मेदारियां बढ़ गई हैं, घर-ऑफिस की दोहरी ज़िम्मेदारियों के चलते वो अपनी मां या सास की तरह त्योहारों की तैयारियां नहीं कर सकतीं. अतः वर्किंग महिलाएं और उनके परिवार के सदस्य इस बात को समझें और मिल-जुलकर त्योहार की तैयारियां करें. परिवार के सभी सदस्य न स़िर्फ रोज़मर्रा के काम, बल्कि त्योहार के समय भी घर की वर्किंग महिलाओं का हाथ बंटाएं. इससे महिलाओं का तनाव कम होगा और वो त्योहार का पूरा लुत्फ़ उठा सकेंगी.

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5) जानें त्योहार का सही अर्थ
हम सभी त्योहार के मौ़के पर घर की साफ़-सफ़ाई करते हैं, घर को और ख़ुद को भी सजाते-संवारते हैं, पूजा-पाठ करते हैं ताकि घर में सुख-शांति-समृद्धि बनी रहे, लेकिन इन सबसे कहीं ज़्यादा ज़रूरी हमारा ख़ुश रहना है. यदि हम मन से ख़ुश नहीं हैं, तो इन सब तैयारियों का कोई मतलब नहीं है. यदि हम मन से ख़ुश हैं, तो हमें दुनिया की हर चीज़ अच्छी लगती है और हर दिन त्योहार लगता है. ख़ुशी को समझना, उसे महसूस करना और उसे दूसरों में बांटना ही सही मायने में त्योहार है.

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