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‘रोल के हिसाब से A, B और C कैटिगरी में परोसा जाता है खाना’ सुनीता राजवार और जतिन नेगी ने खोली इंडस्ट्री की पोल, ‘सेट पर सम्मान के लिए भी करना पड़ता है स्ट्रगल’ (‘Character artists don’t get respect’ Sunita Rajwar and Jatin Negi exposes film and TV industry, Food is served in A, B, C categories)

बॉलीवुड बाहर से ग्लैमर और चकाचौंध से भरी नज़र आती हो, लेकिन रियल में इस चकाचौंध के पीछे का सच इतना खूबसूरत नहीं है. इंडस्ट्री में छोटे आर्टिस्ट और कैरक्टर आर्टिस्ट के लिए ये दुनिया उतनी ग्लैमरस नहीं है. सेट पर उनके साथ भेदभाव किया जाता है, प्रोजेक्ट में अच्छा रोल होने के बावजूद उन्हें सेट पर सम्मान पाने के लिए भी स्ट्रगल करना पड़ता है. हाल ही में सुनीता राजवार (Sunita Rajvar) और जतिन नेगी (Jatin Negi) ने इस बारे में खुलकर बात की और बताया कि बॉलीवुड में भी कास्‍ट सिस्‍टम एक्सिस्ट करता है.

'पंचायत' की क्रांति देवी (Panchayat's Kranti Devi) यानी सुनीता राजवार और ‘बेल बॉटम’ और ‘अजय’ जैसी फिल्मों और सीआईडी, क्राइम पेट्रोल और सुमित संभाल लेगा जैसे टीवी शो में नजर आ चुके जतिन नेगी ने हाल ही में बॉलीवुड की पोल खोली (Sunita Rajwar and Jatin Negi exposes film and TV industry) और बताया कि किस तरह छोटे कलाकारों के साथ सेट पर भेदभाव होता है और रोल के हिसाब से उन्हें A, B और C कैटिगरी में परोसा जाता है.

सुनीता राजवार करीब 25 साल से इस इंडस्ट्री में हैं और कई दमदार सपोर्टिंग रोल कर चुकी हैं. इसके बावजूद उन्हें आज भी अच्छे रोल और सेट पर सम्मान के लिए संघर्ष करना पड़ता है. स्क्रीन से बातचीत में उन्होंने बताया, "सेट पर लीड एक्टर्स और कैरेक्टर आर्टिस्ट की हैसियत में बहुत फर्क होता है, बिल्कुल उसी तरह, जैसे हमारे समाज में होता है. अगर किसी का रोल मेन होता है, तो सब कुछ उन्हीं के इर्द-गिर्द घूमता है. उन्हें अच्छा कमरा मिलता है, उनका अपना स्टाफ होता है. लेकिन अगर आप कोई छोटा रोल करते हैं, जैसे सिर्फ एक सीन या 2-3 दिन का काम, तो स्पॉटबॉय भी आपकी इज्जत नहीं करते."

इस पर जतिन नेगी ने कहा, "कैरक्टर आर्टिस्ट को आमतौर पर तब तक सम्मान नहीं मिलता, जब तक कि वे परेश रावल या अनुपम खेर जैसे बड़े कलाकार न हों. बड़ी फिल्मों में, लीड एक्टर को 4 वैनिटी वैन मिलते हैं, जबकि कैरेक्टर आर्टिस्ट को केवल एक स्पॉट बॉय और एक मेकअप आर्टिस्ट मिलता है. आप एक सीनियर कैरक्टर आर्टिस्ट हैं, इतना ही नहीं, कैरेक्टर आर्टिस्ट को अन्य कलाकारों के साथ वैनिटी वैन शैयर करनी पड़ती है. बैकग्राउंड कैरक्टर निभाने वाले कलाकारों को अमूमन 7-8 कलाकारों के साथ वैन शेयर करना होता है. तो आपको कितना सम्मान मिलेगा, ये आपकी भूमिका ही तय करती है." 

सुनीता राजवार ने आगे बताया, "सेट पर खाने की भी A, B और C कैटिगरी होती है. A कैटिगरी में लीड और सपोर्टिंग भूमिका निभाने वाले कलाकार होते हैं. बैकग्राउंड में भूमिका निभाने वाले या एक्स्ट्रा भूमिका वाले कलाकारों के लिए खाने का अलग सेक्शन होता है. यह देखकर बहुत दुख लगता है. मुझे यह भेदभाव कभी पसंद नहीं आया, लेकिन बड़े-बड़े प्रोडक्शन हाउस में भी यह होता है. लीड एक्टर्स डायरेक्टर्स के साथ बैठते हैं. इस भेदभाव से सेट पर बहुत अजीब माहौल बन जाता है और ऐसा लगता है जैसे कास्ट सिस्टम हो."

जतिन ने आगे कहा, "मैंने A और B कैटेगरी के लोगों को मिलने वाले खाने और C कैटेगरी के लोगों को मिलने वाले खाने की क्वालिटी में बहुत बड़ा फर्क देखा है. खाने के लिए तीन सेक्शन होते हैं, और आपको बताया जाता है कि आपको किस सेक्शन से खाना है. कई बार, जूनियर आर्टिस्ट को सेट से बहुत दूर खाना दिया जाता है. उनके पास बैठने के लिए कुर्सी तक नहीं होती. उन्हें खड़े होकर खाना पड़ता है."

उन्होंने पेमेंट में होनेवाले भेदभाव के बारे में भी बात की, "कैरेक्टर आर्टिस्ट को पेमेंट भी अक्सर देरी से मिलता है. वे लीड स्टार्स को तो करोड़ों देते हैं, लेकिन अगर आप कोई कैरेक्टर रोल कर रहे हैं, तो आपके लिए 5 लाख रुपये पाना भी बहुत मुश्किल होता है. टर्शियरी किरदारों को 5 हजार रुपये प्रति दिन पर हायर किया जाता है. हो सकता है कि डील ऐसी हो कि उन्हें दो दिन काम करना हो और उन्हें 2 महीने बाद 8-10 हजार रुपये मिलें."

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