क्या प्यार की भी होती है एक्सपायरी डेट? (Does Love Have An Expiry Date?)

बचपन से ही हमारी कंडीशनिंग इस तरह की जाती है कि हमें लगता है कि प्यार केवल युवा दिलों का एहसास होता है और समय के साथ-साथ उसका एहसास फीका पड़ता जाता है. जबकि प्यार करने की और उसे महसूस करने की कोई उम्र नहीं होती. वह हमेशा दिल में बसा होता है, बस, उसे देखने की नज़र होनी चाहिए. इसीलिए यह कहा जा सकता है कि प्यार की कोई एक्सपायरी डेट नहीं होती. love

Does Love Have An Expiry Date

माया और मनहर लॉन में बैठे चाय पी रहे थे. चाय पीते-पीते वे एक-दूसरे की तरफ़ इस तरह देख रहे थे मानो कोई युवा जोड़ा हो. उनकी बहू नेहा को अपने सास-ससुर को देख हमेशा हैरानी होती थी. वे दोनों घंटों बैठे बातें करते रहते और अगर चुप भी रहते, तो उनके बीच की ख़ामोशी भी इस तरह बातें करती, मानो वे बिना कहे एक-दूसरे की बातें समझ रहे हों. उसे अजीब लगता कि इस उम्र में जब उनके नाती-पोते हो चुके हैं, उनका इस तरह प्यार में डूबे रहना, एक-दूसरे की छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना क्या शोभा देता है? जहां जाते एक-दूसरे के साथ जाते और हमेशा एक साथ ही खाना खाते. ऐसा नहीं था कि उनमें बहस नहीं होती थी, पर इसके बावजूद उनके रिश्ते में न तो नेहा ने कभी कोई तनाव देखा था, न ही किसी तरह की झुंझलाहट. उनके आपसी प्यार को देख अक्सर उसे जलन ही होती थी कि आख़िर बुढ़ापे में ये लोग कैसे इस तरह अपने प्यार के एहसास को जीते हैं. बुढ़ापे तक आते-आते क्या प्यार  इतना गहरा रह सकता है?

उम्र नहीं रखती मायने
प्यार में तो वह शक्ति होती है, जो आम आदमी को भी शायर बना देती है. प्यार की ताक़त तमाम चुनौतियों को झेलने की क्षमता देती है. प्यार समर्पण है, त्याग है और हर पल जीने का प्रतीक है. सब जानते हैं कि प्यार के अलग-अलग चेहरे और पहलू होते हैं, यही वजह है कि दुनिया के चाहे किसी भी कोने में चले जाएं, एक प्रेम कहानी पल्लवित होती दिखाई व सुनाई देती है. उस कहानी के लोगों को उम्र से कोई सरोकार नहीं होता है. वे बस प्यार करते हैं और उसी में डूबे रहते हैं.

रिमझिम बरसती बूंदें, चिड़ियों का चहचहाना, कोयल की कूक, पपीहे की गूंज, मोर का नृत्य, हवा की गुनगुनाहट से शरीर में उपजती सिहरन, फूलों की कोमल पंखुड़ियों का रेशमी एहसास, हर वह चीज़ जो दिल के तारों को छेड़कर मस्त बयार के साथ अठखेलियां करती हुई जब मन में समाती है, तो प्यार के असंख्य तार झनझना उठते हैं. समुद्र की लहरों पर नौका पर मंद हवाओं के झोंकों के साथ डूबते-उतराते एक दूसरे किनारे पर पहुंचने की ख़्वाहिश है प्यार. फिर ऐसे ख़ूबसूरत एहसास की भी भला क्या एक्सपायरी डेट हो सकती है? वह तो दिल में हमेशा बसा रहता है, दिमाग़ पर हमेशा छाया रहता है. बेशक जीवन की विभिन्न प्राथमिकताओं के चलते उस पर ज़िम्मेदारियों के बादल छा जाते हैं, पर इसका अर्थ कदापि नहीं कि वह धुंधला जाता है. बादलों के नीचे भी हौले-हौले तैरता प्यार कायम रहता है.

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ज़िम्मेेदारियों के बीच खिल सकता है प्यार
प्यार एक हवा की तरह होता है, जिसे न तो किसी ने देखा है, न छुआ है, स़िर्फ उसे महसूस किया है. वह न तो किसी तरह की इच्छाओं पर निर्भर करता है, न चाह पर. हां, केवल अपने साथी के लिए कुछ करने की भावना या समर्पित हो जाने का एहसास अवश्य बना रहता है.
हालांकि कुछ लोग मानते हैं कि बच्चे हो जाने के बाद प्यार के लिए समय ही कहां बचता है? उन्हीं की ख़्वाहिशें पूरी करने के चक्कर में प्यार कहीं हवा हो जाता है. रह जाती हैं, तो बस ज़िम्मेदारियां. लेकिन यह सच नहीं है. दरअसल साथी तब ख़ुद ही प्यार के इस एहसास से अपने को दूर कर लेते हैं. उन्हें लगता है कि बच्चों के बाद उनकी ज़िंदगी पर केवल बच्चों का हक़ रह जाता है और केवल कर्त्तव्य और ज़िम्मेदारियां ही ज़िंदगी का लक्ष्य. प्यार के लिए समय निकालना उन्हें या तो मूर्खता लगती है या बचकानी बात. अक्सर आपने पति-पत्नी को यह कहते सुना होगा कि अब ये चोंचले अच्छे नहीं लगते, बच्चे बड़े हो गए हैं, वे क्या सोचेंगे कि मम्मी-पापा इश्क़ फरमा रहे हैं.

एक ख़ुशबू है प्यार
जब आप आपस में विश्‍वास का रिश्ता कायम कर साथ चल सकते हैं, तो समय-समय पर प्यार का इज़हार करने में क्या बुराई है? बिना प्यार के जीवन मृत समान है. आप जीवित भी हों और आपके चेहरे पर कोई हंसी-ख़ुशी न हो, किसी के साथ आप अपने दुख-सुख न बांट सकेें, कोई आपके आंसू न पोंछ सके, किसी के साथ आप चल न सकेें, रात को आसमान के नीचे बैठ तारे न गिन सकेें या चांदनी रात का मज़ा न ले सकें, तो जीवन में रिक्तता ही रहेगी.

ज़िम्मेदारियां निभाते हुए भी आप सारी ज़िंदगी प्यार के मीठे एहसास को जी सकते हैं. स़िर्फ एक बार दिल के भीतरी कोनों में झांकने की आवश्यकता है. फिर उम्र की लंबी-लंबी सीढ़ियां आपसे आकर यह नहीं कहेंगी कि तुम इस पर चल नहीं सकते, क्योंकि तुम बूढ़े हो गए हो. प्यार का हाथ थामकर तो बीहड़ रास्तों को भी पार किया जा सकता है.

क्या प्रकृति ने प्यार को कभी किसी सीमा या उम्र में बांधा है? तो फिर इंसान क्यों सोचता है कि वह बूढ़ा हो रहा है या अब बच्चे बड़े हो गए हैं, इसलिए प्यार करने का हक़ उनसे छिन गया है. हाथों का मीठा स्पर्श या आंखों में प्रिय को देखते ही मन में उमड़ते चाहत के भाव किसी उम्र के मोहताज  नहीं होते.

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