कहीं आपके बच्चे को नशे की लत तो नहीं? (Does Your Child Have An Addiction Problem?)

Child Addiction Problems

बच्चों की परवरिश करना किसी चुनौती से कम नहीं है. जैसे-जैसे बच्चे बड़े होने लगते हैं, उनके स्वभाव और व्यवहार में बदलाव आने लगता है. ये बदलाव इतने साधारण होते हैं कि पैरेंट्स इन्हें समझ ही नहीं पाते हैं या फिर किशोरावस्था का कारण समझकर चुप रह जाते हैं और इन संकेतों को नज़रअंदाज़ करने लगते हैं. पर क्या पैरेंट्स यह जानते हैं कि उनकी यह अनदेखी उनके बच्चों को नशे का शिकार बना रही है.

पता लगाएं कि बच्चा नशा तो नहीं करता

किशोर बच्चे अपना अधिकतर समय स्कूल-कॉलेज और कोचिंग क्लासों में अपने दोस्तों के साथ बिताते हैं. उनके साथ समय बिताते हुए कई बार वे ग़लत संगत में पड़ जाते हैं और नशा करने लगते हैं, जिसका पैरेंट्स को अंदाज़ा भी नहीं होता. हम यहां पर कुछ ऐसे संकेत दे रहे हैं, जिनसे पैरेंट्स यह अंदाज़ा लगा सकते हैं कि कहीं उनका बच्चा नशे के शिकंजे में तो नहीं फंस रहा है.

* बच्चा यदि स्कूल-कॉलेज और कोचिंग क्लास ख़त्म होने के बाद घर आने की बजाय इधर-उधर चला जाए.

* जब बच्चा देरी से घर आने लगे.

* अगर वह रात को अपने दोस्तों के घर रुकने के लिए पैरेंट्स पर दबाव बनाने लगे.

* बच्चा जब ज़रूरत से ज़्यादा पॉकेटमनी मांगने लगे.

* जब वह अधिकतर समय अकेले बिताने लगे या फिर आपकी उपस्थिति उसे खलने लगे.

* नशे की तलब लगने पर पैरेंट्स को बिना बताए घर से चला जाए.

* घर के ज़रूरी कामों को छोड़कर बच्चा जब अचानक उठकर बाहर चला जाए.

* जो बच्चा पहले कभी माउथफ्रेशनर इस्तेमाल नहीं करता था और अब अचानक च्युंगम, टॉफी, सौंफ, हरी इलायची आदि खाना शुरू कर दे, तो पैरेंट्स को इस बात को हल्के में नहीं लेना चाहिए. हो सकता है उनका बच्चा नशे की दुर्गंध को छिपाने के लिए माउथफ्रेशनर इस्तेमाल कर रहा हो.

* बच्चे के स्कूल-कॉलेज आदि जगहों से आने के बाद अगर उसके मुंह से माउथफ्रेशनर की ख़ुशबू आए, तो भी पैरेंट्स सावधान हो जाएं.

* जब बच्चा पैंरेट्स से दूर से बात करे, इसका अर्थ है कि बच्चा आपसे मुंह की दुर्गंध को छिपाने की कोशिश कर रहा है.

* बच्चे के पॉकेट या बैग से माचिस, लाइटर या रोल किया हुआ कोई काग़ज़ मिले.

* उसके चेहरे को, विशेष रूप से उसकी आंखों को ग़ौर से देखें.

* अगर बच्चा दिन-प्रतिदिन कमज़ोर होता जा रहा हो या फिर अपनी डायट से ज़्यादा खा रहा हो.

उपरोक्त बताई गई बातें स़िर्फ एक संकेत हैं, ज़रूरी नहीं कि आपका बच्चा नशे की गिरफ़्त में हो. बच्चे से पूरी बात जानने-पूछने के बाद ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचें.

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पैरेंट्स कैसे करें तहकीकात?

* अगर आपको शक है कि आपका बच्चा नशे का आदी हो रहा है, तो सबसे पहले उसके फ्रेंड्स और टीचर्स आदि से संपर्क करें.

* बिना बताए उसके स्कूल, कॉलेज और कोचिंग सेंटर में पहुंच जाएं.

* वहां पर बच्चा आपको देख ले, तो उससे छिपने की बजाय बात करें.

* ऐसा कोई बहाना बनाएं, जिससे उसको असलियत का पता न चले.

* इस बात का विशेष ध्यान रखें कि सोशल मीडिया में वह किस तरह की पोस्ट करता है.

* आजकल के बच्चे सोशल मीडिया पर  सबसे ज़्यादा एक्टिव रहते हैं, इसलिए उनके सोशल मीडिया अकाउंट पर पैनी नज़र रखें.

* अगर बच्चा हॉस्टल में रहता है, तो वहां के वॉर्डन, टीचर्स, फें्रड्स आदि से बच्चे की गतिविधियों के बारे में पूछें.

* अगर पैरेंट्स को यह संदेह है कि उनका बच्चा नशे के शिकंजे में फंसता जा रहा है, तो उसे डांटने-मारने की बजाय प्यार से समझाएं.

* उसे इस बात का एहसास कराएं, ‘आपको उसकी ज़रूरत है, आप उससे बहुत प्यार करते हैं’.

* पैरेंट्स को भी समझना चाहिए कि उम्र बढ़ने के साथ-साथ बच्चों को आज़ादी ज़रूर दें, लेकिन वे इस आज़ादी का नाजायज़ फ़ायदा न उठाएं. आज़ादी देने के साथ-साथ उन पर पैनी नज़र भी रखें.

बच्चे में दिखें ये लक्षण, तो पैरेंट्स हो जाएं सावधान

इन लक्षणों को ध्यान में रखकर पैरेंट्स अंदाज़ा लगा सकते हैं कि उनका बच्चा कहीं नशे का आदी तो नहीं हो रहा है-

* चिड़चिड़ापन, बेचैनी, घबराहट, पसीना और ग़ुस्सा आना.

* नींद न आना, शरीर में ऐंठन होना, सिर में तेज़ दर्द होना, भूख कम लगना.

* अचानक मूड स्विंग होना, छोटी-छोटी बातों पर कंफ्यूज़ होना, मानसिक तनाव होना आदि.

बच्चे में अगर उपरोक्त लक्षण दिखाई दें, तो ज़रूरी नहीं कि वह नशे का शिकार हो. ये लक्षण किसी अन्य बीमारी के भी हो सकते हैं, पर पैरेंट्स का अलर्ट होना बहुत ज़रूरी है.

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बच्चे क्यों फंस जाते हैं नशे के शिकंजे में?

बाल मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि-

* अधिकतर बच्चे अपने दोस्तों के उकसाने पर नशे की शुरुआत करते हैं. जब बच्चा अपने दोस्तों को नशा करते हुए देखता है, तो उसके मन में भी नशे को टेस्ट करने की जिज्ञासा उठने लगती है और धीरे-धीरे वह नशे के शिकंजे में फंसता चला जाता है.

* जब बच्चा परिवार में अपने किसी बड़े को नशा (स्मोकिंग या ड्रिंक) करते हुए देखता है, तो उसके मन में भी नशे का स्वाद चखने की इच्छा उठने लगती है.

* नशे के मायाजाल में फंसने का एक कारण फिल्में और टेलीविज़न भी है. दरअसल, जब बच्चे फिल्म और टीवी कलाकारों को नशा करते हुए देखते हैं, तो वे भी उनकी नकल करने की कोशिश करने लगते हैं.

* वर्किंग पैरेंट्स होने के कारण बच्चों के साथ  क्वालिटी टाइम न बिताना, मार्गदर्शन न करना, अनचाही डिमांड को पूरी करना, दोस्तों की तरफ़ ध्यान न देना आदि ऐसे अनेक कारण हैं, जिनके कारण बच्चे ग़लत संगति में पड़ जाते हैं.

पैरेंट्स कैसे करें नशे की गिरफ़्त में फंसे बच्चे की मदद?

* अगर बच्चा नशे का आदी है, तो सबसे पहले उसे ख़ुद पर नियंत्रण रखना सिखाएं.

* उसे समझाएं कि जब भी उसका मन नशा करने का करे, तो अपना ध्यान वहां से हटाकर कहीं और लगाने का प्रयास करे.

* जैसे-जैसे बच्चे बड़े होने लगते हैं, उनके दोस्तों का दायरा भी बढ़ने लगता है. अत: ग़लत संगति से बचाने के लिए ज़रूरी है कि उसे बिना बताए उसके दोस्तों पर कड़ी नज़र रखें.

* नशे की गिरफ़्त से बचाने के लिए ज़रूरी है कि बच्चे को नशे के दुष्परिणामों के बारे में विस्तार से बताएं.

* किसी ऐसे व्यक्ति का उदाहरण देकर समझाएं,  जिसका जीवन नशे के कारण बर्बाद हो गया हो.

* पैरेंट्स को भी ध्यान रखना चाहिए कि बच्चों से कभी भी नशेवाली चीज़ें न मंगवाएं.

* घर में होनेवाली पार्टियों और घर आए मेहमान के सामने नशेवाली चीज़ें सर्व न करें.

* कभी भी बच्चे के सामने नशा न करें. इससे उसके मन में इन चीज़ों के प्रति जिज्ञासा पनपने लगती है.

* अगर घर में कॉकटेल पार्टियां होती हैं, तो बच्चे को वहां से हटाकर अन्य गेम्स आदि में व्यस्त रखें.

* यदि बच्चा नशे की आदत नहीं छोड़ पा रहा है, तो बिना समय बर्बाद किए काउंसलर और एक्सपर्ट्स की सलाह लें.

* यदि स्थिति दिन-प्रतिदिन गंभीर होती जा रही हो, तो बच्चे को नशा मुक्ति केंद्र ले जाएं.

                            – पूनम नागेंद्र शर्मा

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