आज युग पुरुष अमिताभ बच्चन (Amitabh Bachchan) 84 साल के हो गए हैं, मानो एक युग बीत गया हो उनके अभिनय को देखते, गाते, हंसते-मुस्कुराते. उम्दा कलाकार, बेजोड़ अभिनय, लाजवाब एक्शन… उनका हर रूप, हर रंग, हर अदा बेमिसाल…

सात हिंदुस्तानी से जो सफ़र शुरू हुआ, वो आज भी बरक़रार है. कितने दशक सतत काम करते रहे… हर युवा के लिए प्रेरणास्त्रोत हैं वे. उनकी ख़ूबसूरत फिल्में, सशक्त अभिनय, बहुमुखी भूमिकाएं सदा हमारा मनोरंजन करने के साथ-साथ प्रेरणा भी देती हैं कि हम सदा कर्मठ बने रहें…
वैसे कौन बनेगा करोड़पति टीवी शो के ज़रिए आज भी वे उतने ही जवां, हरफनमौला परफॉर्मेंस को अंजाम दे रहे हैं और करोड़ों दिलों पर राज़ कर रहे हैं. वे यूं ही ताउम्र अभिनय करते रहें, यही दुआ और शुभकामनाएं!

एबी जर्नी…
* अमिताभ बच्चन का जन्म प्रयागराज (इलाहाबाद) में 11 अक्टूबर को हुआ था.
* उनके पिता हरिवंश राय बच्चन हिंदी के जाने-माने लेखक थे और मां तेजी बच्चन भी बहुमुखी प्रतिभा की धनी थीं.
* पहले उनका नाम इंकलाब रखा गया था, पर बाद में अमिताभ रखा गया, जिसका मतलब ऐसा प्रकाश जो कभी नहीं बुझेगा.
* बहुत कम लोग जानते हैं कि अमिताभ बच्चनजी का सरनेम श्रीवास्तव है, पर चूंकि उनके पिता कवि हरिवंश रायजी उपनाम बच्चन लगाते थे, उन्होंने भी अपने नाम के साथ यही उपनाम रहने दिया.
* अमितजी ने दो बार एमए किया था.प्रयागराज और नैनीताल में अपनी शिक्षा पूरी की.
* करियर के शुरुआती दौर में उन्होंने कोलकता की एक शिपिंग कंपनी में जॉब भी किया था.
* 3 जून 1973 को अपनी साथी कलाकार जया भादुड़ी के साथ उन्होंने विवाह किया. उनके दो बच्चे अभिषेक और श्वेता हैं.
* अपनी पहली ही फिल्म सात हिंदुस्तानी के लिए उन्हें न्यूकमर का नेशनल अवॉर्ड मिला था.
* ‘आनंद’ फिल्म में उनके बेहतरीन परफॉर्मेंस के लिए उन्होंने बेस्ट सर्पोेंटिंग एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड जीता था.
* फिल्मी करियर के शुरुआती दिनों में उन्होंने ‘परवाना’ फिल्म में खलनायक की भी भूमिका निभाई थी.
* वे अपने संघर्ष के दिनों में कई सालों तक हास्य कलाकार महमूद के घर भी रहे थे.
* ‘ज़ंजीर’ फिल्म उनके करियर का टर्निंग प्वॉइंट रहा. यही से उनके एंग्री यंग मैन का क़िरदार मशहूर हुआ.
* इसी दौर में उनके ‘अभिमान’ और ‘नमक हराम’ फिल्म को काफ़ी पसंद किया गया. राजेश खन्ना और रेखा के साथ की ‘नमक हराम’ के लिए तो उन्हें फिल्मफेयर का बेस्ट सर्पोंटिंग एक्टर का अवॉर्ड भी मिला.
* फिर चुपके-चुपके, दीवार, शोले, अमर अकबर एंथोनी, कभी-कभी फिल्मों से जो कामयाबी का सिलसिला चल पड़ा, वो अब तक बरक़रार है.
* रेखा के साथ की फिल्म मि. नटवरलाल के गाने मेरे पास आओ मेरे दोस्तों एक क़िस्सा सुनाऊ… गाने से उन्होंने पहली बार फिल्मों में अपनी आवाज़ दी. इसके लिए उन्हें पुरस्कार भी मिला.
* साल 1982 में ‘कुली’ फिल्म की शूटिंग के दौरान लगे चोट और गंभीर स्थिति होने, फैन्स व लोगों के प्यार, दुआओं के सिलसिले ने यह साबित कर दिया कि अमिताभ बच्चन कितने बड़े स्टार बन गए थे और दर्शकों के लिए उनके दिल में किस कदर प्यार है.
* साथ ही फिल्म के निर्देशक मनमोहन देसाई पर भी इसका ऐसा असर हुआ कि उन्होंने फिल्म का अंत बदल दिया. उनका कहना था कि यह महान शख़्स मौत को जीतकर वापस आया है, तो भला मैं फिल्म में ऐसे कैसे दिखा सकता था. आज भी ‘कुली’ फिल्म के उस फाइट सीन में जिसमें अमिताभ बच्चन घायल हुए थे, फिल्म देखते समय पॉज़ करके नीचे इसके बारे में कैप्शन दिखाया जाता है.
* उन्हें राजनीति में भी न चाहते हुए दोस्ती की ख़ातिर आना पड़ा, पर आख़िरकार इसे उन्होंने अलविदा कह दिया.
* राजनीति, फिल्म से जुड़े तमाम विवादों के चलते उन्होंने काफ़ी लंबे समय तक मीडिया से भी दूरी बनाए रखी.
* ‘शहंशाह’ से उनकी ज़बर्दस्त दूसरी इनिंग शुरू हुई. फिर हम, अग्निपथ फिल्मों की सफलता ने उन्हें फिर से स्थापित किया. ‘अग्निपथ’ के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार भी मिला.
* एबीसीएल के बैनर तले उन्होंने कई फिल्में भी बनाई.

* साल 2000 में टीवी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ उनके करियर का मील का पत्थर साबित हुई. इस शो के ज़रिए अमितजी को लोगों का भरपूर प्यार, सराहना, मान-सम्मान मिला. जो अब तक बरक़रार है.

* वे आज भी हर रविवार को मुंबई के अपने घर के बाहर आकर अपने प्रशंसकों से मिलते हैं, तब उनके प्रति फैंस का प्यार और उत्साह देखते ही बनता है.
मेरी सहेली की तरफ़ से अमिताभ बच्चन जी को जन्मदिन की बधाइयां और शुभकामनाएं!..
– ऊषा गुप्ता

