शादीशुदा से प्यार अब परहेज़ नहीं (Having An Affair With Married Man?)

बदलते ज़माने के दौर में बहुत कुछ बदला है. पर सबसे अधिक जीने के नज़रिए में बदलाव आया है. एक व़क़्त था, जब शादीशुदा के प्यार (Having An Affair With Married Man) के बारे में ख़्याल को भी ग़लत माना जाता था, पर अब ऐसा नहीं रहा. आइए, इससे जुड़े विभिन्न पहलुओं पर एक नज़र डालें.

Having An Affair With Married Man

  • एक का हो गया, वह दूसरे का नहीं हो सकता. एक ज़माने में लोग ऐसा ही सोचते थे. इसीलिए एकदो दशक पहले तक ऐसी घटनाएं कम ही देखने को मिलती थीं कि किसी लड़की को शादीशुदा पुरुष से प्यार हो जाए. उस ज़माने में लड़कियों के बुनियादी स्त्रियोचित गुणों में सौतिया डाह का स्थान सर्वोपरि था. यह कल्पना करना मुश्किल था कि अविवाहित लड़की किसी अन्य स्त्री के पति के साथ प्यार की पींगे बढ़ा सकती है.
  • लेकिन स्त्री और पुरुष की इस बनावट और उनके संबंधों की बुनावट में पिछले कुछ अरसे से काफ़ी बदलाव आया है. आज लड़कियां न केवल शादीशुदा पुरुष को प्यार के क़ाबिल समझ रही हैं, बल्कि समाज भी ऐसे संबंधों पर ऐतराज़ करता नज़र नहीं आ रहा. समाज और जीवन के ये फ़लस़फे यूं ही नहीं बदल गए. इनके लिए देशदुनिया में हो रहे तमाम परिवर्तन ज़िम्मेदार हैं.

लड़कियों का कामकाजी होनाः शादीशुदा पुरुष के प्रति लड़की के झुकाव, लगाव और प्यार की सबसे बड़ी वजह आज के ज़माने में लड़कियों का कामकाजी होना है. किसी ऑफ़िस में काम करती लड़की सुबह 10 से शाम 5 बजे तक का समय अपने पुरुष सहकर्मी के साथ बिताती है. लंबे समय तक साथ काम करना, चाय पीना, लंच करना, हंसीमज़ाक जैसी रोज़मर्रा की घटनाएं चाहेअनचाहे दिलों को क़रीब लाती हैं. काम के दौरान एकदूसरे का सहयोग करने, सीखनेसिखाने, सुखदुख बांटने का सिलसिला कब प्यार में तब्दील हो जाता है, पता ही नहीं चलता. इसके अलावा करियर की सीढ़ियां चढ़ने की चाहत भी प्यार का चोला पहनकर आती है.

सीरियल, हॉलीवुड व बॉलीवुड का असरः भारतीय महिलाओं की मनःस्थिति में आए इस बदलाव में धारावाहिकों की भी ख़ास भूमिका रही है. आजकल हर धारावाहिक में मसाला डालने के लिए जो तानेबाने बुने जाते हैं, उनमें विवाहित पुरुषों से रिश्ते बनानेवाली नायिकाओं ने आम युवतियों को भी प्रेरित किया है. आज लड़कियां शादी से पहले अथवा शादी के बाद भी अपनी मर्ज़ी से ऐसा कोई क़दम उठाने में नहीं झिझक रही हैं.

भारतीय महिलाओं के मन को इस रूप में ढालने में दूसरी सबसे अहम् भूमिका बॉलीवुड और हॉलीवुड के सितारों की भी रही है. नायकनायिकाओं को अपनी पसंद की ज़िंदगी जीने और अपनी पसंद की स्त्री/पुरुष को चुनने की आज़ादी ने धारावाहिकों में चल रही काल्पनिक कहानियों पर सच्चाई की मुहर लगा दी है. बदलाव आपके सामने है. आज से दो दशक पहले कोई युवती शादीशुदा पुरुष के साथ संबंध बनाकर अपने घर तो क्या, दूर किसी शहर में भी रहने की नहीं सोच सकती थी जबकि आज ऐसे रिश्ते के बावजूद लड़कियां अपने परिवार में ही रह रही हैं और कहीं से भी विरोध के स्वर उठते नहीं दिखते.

ग्लोबलाइज़ेशन व सूचना क्रांतिः सूचना क्रांति और वैश्‍वीकरण ने सारी दुनिया को एक गांव की शक्ल दे डाली है. दुनिया की सारी संस्कृतियां एकदूसरे को काफ़ी नज़दीक से देख रही हैं. टीवी चैनलों पर दूरदराज़ की ख़बरें पलभर में हर जगह पहुंच जाती हैं. ऐसे में पश्‍चिमी सभ्यता के खुलेपन का असर भारतीय समाज पर भी पड़ा है और भारतीय युवाओं और युवतियों के मन में भी खुली हवा में सांस लेने की चाहत जागी है. वह अपनी पसंद के पुरुष के साथ जीवन जीना चाहती है. वह पुरुष अविवाहित है या विवाहित, इससे उसे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता.

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Having An Affair With Married Man
बड़े धोखे हैं इस राह में

नोएडा की एक मल्टीनेशनल कंपनी में कार्यरत जयचंद विवाहित है. उसकी पत्नी और बच्चे गांव में हैं. वह और उसके साथ काम करनेवाली वर्षा एक ही बिल्डिंग में रहते हैं. एक ही ऑफ़िस में साथसाथ काम करते हुए और एक ही बिल्डिंग में रहते हुए वर्षा न जाने कब जयचंद के मोहपाश में बंधकर उससे प्रेम करने लगी, वह जयचंद को अपना सर्वस्व मानने लगी. लेकिन क्या ऐसा जयचंद के साथ भी है? क्या वह भी वर्षा को उसी शिद्दत के साथ चाहता है? नहीं! वर्षा अब यह अच्छी तरह जान चुकी है. जिस प्रेम ने उसके अंदर कभी उमंगें भरी थीं, वह अब एक बोझ बनकर रह गया है. वर्षा इस असहनीय स्थिति से छुटकारा पाना तो चाहती है, लेकिन जयचंद से अलग होकर जीने की कल्पना भी नहीं कर सकती. इसलिए इस कशमकश भरे रिश्ते को प्यार के नाम पर निभाए जा रही है.

यह मात्र एक वर्षा और जयचंद की कहानी नहीं है. ऐसी न जाने कितनी वर्षाएं अपने प्यार से न जाने कितने जयचंदों की दुनिया हरीभरी कर रही हैं. लेकिन क्या उनकी अपनी दुनिया हरीभरी है, वे ख़ुद भी आश्‍वस्त होकर नहीं कह सकती हैं.

ज़ाहिर है, शादीशुदा पुरुष से प्यार की राह पर ख़तरे तो हर क़दम पर हैं, लेकिन ज़िंदगी की अजीब दास्तां का क्या ठिकाना? वह ऐसे मोड़ पर पहुंच सकती है, जहां कोई ऐसा मिल जाए, जो हो तो चुका हो किसी और का, पर बना आपके लिए है. ऐसे में क्या करेंगी आप? क्या ज़िंदगी जीने के लिए कभीकभी ख़तरों से नहीं खेलना पड़ता?

भ्रमित जीवन की शिकार

दरअसल अविवाहित लड़कियां अपने प्यार को चाहे जितना सच्चा मानें, ख़ुद को चाहे जितना स्मार्ट समझें, शादीशुदा पुरुष की निगाह में वे बस इच्छाओं की पूर्ति का एक साधन होती हैं. अपनी समझ से जब वे प्यार कर रही होती हैं, तब वस्तुतः वे शिकार बन रही होती हैं. इसके कई कारण हैं

कम उम्र वाली लड़कियों की चाहत होती है कि पुरुष उन पर ध्यान दें, उनके काम की प्रशंसा करें, उनकी ख़ूबसूरती की तारीफ़ करें. शादीशुदा पुरुष की अनुभवी आंखें उनकी इन चाहतों को बख़ूबी भांप जाती हैं. मन में तरहतरह के मंसूबे बांधे हुए पुरुष बाहरी तौर पर तो अच्छा बनते हुए व मदद करते हुए बड़े सहज भाव से लड़की की इच्छाएं पूरी करता है, पर साथ ही प्यार के नाम पर इसकी क़ीमत भी वसूलता जाता है.

स्त्री पुरुष से अपना पूरा वजूद, सारी भावनाएं जोड़ लेती है, लेकिन पुरुष इसका बस दिखावा करता है. स्त्री के दिल व भावनाओं से खेलते हुए पुरुष की असल ज़रूरत महज जिस्मानी होती है. स्त्री को इसका पता तब चलता है, जब बहुत देर हो चुकी होती है. उसके सारे सपने चूरचूर हो जाते हैं और वह डिप्रेशन से घिर जाती है.

अपने प्रेम या यूं कहें कि प्रेमी की ख़ातिर स्त्री को जितना सहना पड़ता है, उसके मुक़ाबले शादीशुदा पुरुष को कोई त्याग नहीं करना पड़ता. प्रेम का खुलासा होने पर लड़की को परिवार, पैरेंट्स की नाराज़गी के साथ समाज की तोहमत और बदनामी भी झेलनी पड़ती है, जिससे आगे चलकर शादी में अड़चनें भी आती हैं. इतना सब कुछ झेलने के बाद आख़िर स्त्री को मिलता क्या है? दोहरी ज़िंदगी जीनेवाले फरेबी पुरुष का दिखावटी और झूठा प्रेम. ऐसा प्रेम जो दूर से तो नज़र आता है, लेकिन नज़दीक जाने पर मृगमरीचिका साबित होता है.

इंडियन साइको सोशल फ़ाउंडेशन की सायकोलॉजिस्ट डॉ. समीक्षा कौर शादीशुदा पुरुषों से बढ़ते प्यार के लिए करियर को लेकर आई जागरूकता और इसके कारण शादी में देर, दहेज व वैवाहिक जीवन की समस्याओं से भागने की प्रवृत्ति को मानती हैं. वे इसे परिस्थितिवश हुआ समझौता करार देती हैं और कहती हैं, ”जहां तक पुरुषों की बात है, तो पार्टनर से विचारों में तालमेल का अभाव, पत्नी का गैरज़िम्मेदाराना रवैया जैसी चीज़ें उन्हें दूसरी स्त्री, ख़ासकर अपनी कलीग की ओर खींचते है. वहीं युवतियों में करियर को लेकर आई जागरूकता व वैवाहिक जीवन के झंझटों से दूर स्वच्छंद जीवन जीने की चाह ने ऐसी परिस्थितियां पैदा की हैं. करियर की भागमभाग में युवतियों को मानसिक, शारीरिक तृप्ति के लिए सुरक्षित बांहों की तलाश होती है, जहां उनकी महत्वाकांक्षाएं प्रभावित न होती हों. ऐसे में उन्हें साथ में काम करनेवाले विवाहित पुरुष ज़्यादा उपयुक्त दिखते हैं.”

डॉ. कौर ऐसे संबंधों में ठगे जाने की बात को भी स्वीकारती हैं. ”स्त्री पहले प्यार करती है और बाद में शारीरिक संबंधों के लिए तैयार होती है, जबकि पुरुष पहले शारीरिक संबंध बनाता है और बाद में वह भावनात्मक रूप से जुड़ भी सकता है, नहीं भी. ऐसी युवतियां ऐसे क़दम उठा तो लेती हैं, लेकिन उनकी सुख की तलाश ख़त्म नहीं होती, क्योंकि उनकी कल्पना में जो प्रेम होता है, वह दूसरी स्त्री के रूप में कभी हासिल नहीं होता. उन्हें सौतिया डाह तो नहीं होता, मगर अपने साथी की पत्नी को नीचा दिखाने की चाह ज़रूर होती है. ऐसे संबंधों को अब मौन सामाजिक स्वीकृति भी मिल चुकी है. अभिभावक तो नहीं, पर भाईबहन ऐसी बातें आपस में शेयर कर ही लेते हैं. कुछ मामलों में मांबाप भी इन संबंधों को स्वीकार कर लेते हैं.”

संजय श्रीवास्तव

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