कैसे रहें ऑफिस में स्ट्रेस फ्री? (how to keep yourself stress free in the office?)

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वर्कप्लेस पर स्ट्रेस न हो, ये तो संभव नहीं है, मगर आप थोड़ी कोशिश करके ख़ुद को स्ट्रेस फ्री ज़रूर रख सकते हैं. आज के दौर में जब तनाव कई बीमारियों को जन्म दे रहा है, इससे बचना बहुत ज़रूरी है. ऑफिस में स्ट्रेस फ्री रहने के लिए आज़माइए ये आसान तरी़के.

डेस्क पर रखें ग्रीन प्लांट
अपने डेस्क को साफ़-सुथरा रखने के साथ ही उस पर हरा पौधा लगा छोटा-सा गमला रखें. एक्सपर्ट्स के मुताबिक़, हरा पौधा देखने से आप अच्छा महसूस करते हैं और मन को शांति मिलती है. अब से जब भी ऑफिस में आपको किसी बात पर ग़ुुस्सा आए या फिर थकान महसूस हो, तो डेस्क पर रखे ग्रीन प्लांट को देखकर कुछ अच्छा सोचने की कोशिश करें. आप रिलैक्स महसूस करेंगे.

थोड़ी चहलक़दमी है ज़रूरी
यदि आपकी अपने सहकर्मी या बॉस से किसी बात पर अनबन हो गई है, तो ग़ुस्से को शांत करने के लिए अपनी चेयर से उठकर थोड़ी देर के लिए बाहर टहलें. इससे तनाव कम होगा. चलने से मांसपेशियां फैलती हैं और मन में सकारात्मक विचार आते हैं.

बॉडी को स्ट्रेच करें
लगातार कई घंटों तक बैठकर काम करते रहने से मांसपेशियां अकड़ जाती हैं. साथ ही फ्रस्ट्रेशन भी होता है. अतः काम के बीच-बीच में अपनी चेयर पर बैठकर या फिर खड़े होकर बॉडी को स्ट्रेच करें. साथ ही थोड़ा समय निकालकर कुछ आसान एक्सरसाइज़ भी कर लें ताकि मसल्स अकड़े नहीं.

ड्राईफ्रूट्स खाएं
ऑफिस में हल्की भूख लगने पर चिप्स, नमकीन खाने की बजाय ड्राईफ्रूट्स खाएं. काम के बीच-बीच में ड्राईफ्रूट्स खाने से तनाव कम होता है, साथ ही इससे मेंटल प्रेशर कम करने में भी मदद मिलती है और ग़ुस्सा जल्दी शांत हो जाता है.

मनपंसद लंच करें
काम का तनाव हो या किसी से अनबन हुई हो, मूड अच्छा करना चाहते हैं, तो उस दिन अपनी पसंद का खाना खाएं. इससे संतुष्टि मिलेगी और मूड भी अच्छा हो जाएगा. फिर आपका बाकी दिन स्ट्रेस फ्री रहेगा.

मेडिटेशन करें
ऑफिस के माहौल से यदि आपको ज़्यादा तनाव हो रहा हो, तो कुछ देर के लिए मेडिटेशन करें. 5 मिनट के लिए अपनी कुर्सी पर बैठकर आंखें बंद करके कुछ सकारात्मक सोचें. ऐसा करने से ग़ुस्सा और तनाव दूर हो जाएगा.

पसंदीदा म्यूज़िक सुनें
स्ट्रेस दूर करने का सबसे आसान तरीक़ा है म्यूज़िक. यदि ऑफिस में मनाही न हो, तो कुछ समय के लिए अपना पसंदीदा म्यूज़िक सुनें. इससे स्ट्रेस कम होता है और दिमाग़ की नसों को भी आराम पहुंचता है.

 – कंचन सिंह