क्या आप बेवजह अधिक ग़ुस्सा करने लगते हैं... कोई डर हावी होते-होते आपको टेंशन-डिप्रेशन में ले जा रही है... असमंजस वाली स्थिति है... निर्णय नहीं ले पा रहे... कहीं आप एमिग्डला हाइजैक के शिकार तो नहीं हो गए? क्या है यह और इससे कैसे बचें, आइए जानते हैं.
हमारे शरीर में भावनाओं से जुड़ी ऐसी कई बातें होती हैं, जिनके बारे में हमें पता ही नहीं होता, उन्हीं में से एक है एमिग्डला हाइजैक. हमारे शरीर में ब्रेन के बीचोंबीच एमिग्डला होता है. यह मुख्य रूप से हमारी भावनाओं पर नियंत्रण रखने का काम करता है. एक तरह से कह सकते हैं कि हमारे इमोशंस को कंट्रोल करने का कार्य करता है एमिग्डला.
लेकिन जब बहुत कुछ गड़बड़ाने लगता है, जैसे- अत्यधिक ग़ुस्सा होना, भय से हाथों में पसीना आना, बेतहाशा ख़ुशी, डर, उत्साह से रोंगटे खड़े हो जाना (गूजबंप्स), सही निर्णय नहीं ले पाते, कशमकश वाली स्थिति बनी रहती है... ये सब एमिग्डला हाइजैक की वजह से होता है. यानी इमोशंस का आउट ऑफ कंट्रोल होना एमिग्डला हाइजैक कहलाता है.
इसके बारे में डॉ. सी. केतु विस्तार से बताते हुए कहते हैं कि एमिग्डला हमारे दिमाग़ के सिस्टम का वो हिस्सा होता है, जो हमारे बिहेवियर रिएक्शन व इमोशंस को कंट्रोल करता है.
यह हमें किसी बात को लेकर घबराहट, भय का एहसास करवाता है. इसे हम इस तरह समझते हैं, जब कभी हमें किसी बात को लेकर ख़तरा महसूस होने लगता है, बेवजह का क्रोध, अपमान के कारण टेंशन व इमोशनली हर्ट होने लगते हैं, तब एमिग्डला हमारे कंट्रोल में नहीं रहता. वह हमारी इच्छा के विरुद्ध अधिक एक्टिव होने लगता है. इससे होता यह है कि सही-ग़लत सोचने वाला ब्रेन का फ्रंटल लोब्स वाला हिस्सा काम करना बंद कर देता है. ऐसे में सही फ़ैसले लेने और तर्क करने वाली स्थिति नहीं रह पाती. इससे बॉडी में कार्टिसोल, एड्रेनलाइन हार्मोन रिलीज होने लगते हैं, जिसके कारण हमारे रिएक्शन नकारात्मक, एग्रेसिव होने लगते हैं, चीखना-चिल्लाना, रोना-धोना, चिड़चिड़ापन, अधिक ग़ुस्सा जैसी भावनाएं तीव्रता से होने लगती हैं. इसमें यह भी होता है कि शख़्स को बाद में गिल्ट और पछतावा भी होता है कि आख़िर उसने ऐसा क्यों किया.
एमिग्डला हाइजैक के दुष्प्रभाव
- इस समस्या के कारण हमारे याद्दाश्त बनाने वाले हिस्से पर प्रभाव पड़ता है. उस समय अत्यधिक भावनाओं में बहकर हमने क्या कहा था, हम बाद में भूल भीे जाते हैं. इससे हमारे निर्णय लेने की क्षमता व रिश्ते पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ने लगता है.
- आज के सोशल मीडिया के दौर में अत्यधिक स्क्रीन टाइम के कारण एमिग्डला हाइजैक की समस्या एक्स्ट्रीम पर चली जाती है, क्योंकि दिनभर हम अच्छी कम पर बुरी ख़बरों से अधिक दो-चार होते रहते हैं. इससे हमारा ब्रेन तेज़ी से भावनात्मक उतार-चढ़ाव से गुज़रता रहता है, जिससे एमिग्डला अत्यधिक सक्रिय होने लगता है.
- चूंकि छोटे बच्चों में फ्रंटल लोब्स का डेवलपमेंट पूरी तरह से नहीं हो पाता है, इस वजह से उनमें एमिग्डला हाइजैक की प्रॉब्लम अधिक देखने मिलते हैं.
- यह सब हम जानबूझकर नहीं करते, भावनाओं का अनियंत्रित हो जाना अक्सर हमारे हाथ में नहीं रहता, परंतु कुछ टिप्स अपनाकर आप इस तरह की स्थितियों से बच सकते हैं.
- जब कभी आपको लगे कि अब आपका ख़ुद पर कंट्रोल नहीं रह पा रहा या फिर आप बेवजह क्रोध करने वाले हैं, घबराहट, बेचैनी, अनजाना सा डर लग रहा है, तब थोड़ी देर ख़ुद को रोकें. शरीर में हो रही हलचल को महसूस करें. धीरे-धीरे गहरी सांसें लें. पल भर रुकें. फिर सांसों को धीरे-धीरे छोड़ें. इसका लाभ यह होता है कि ब्रेन को संदेश मिलने लगता है कि ऑल इज़ वेल यानी आपका फ्रंटल कॉर्टेक्स एक्टिव होने लगता है.

- अपनी भावनाओं पर ध्यान दें. आपके साथ ऐसा क्यों हो रहा है?.. आख़िर क्यों बेमतलब का क्रोध आप पर हावी होने लगता है..? इन पहलुओं पर गौर करें. धीरे-धीरे आप समझने लगेंगे कि कौन सी बातें अपमान, नाकामयाबी, आलोचना आपको ट्रिगर करती है. फिर उसे गहराई से समझते हुए आप अपने रिएक्शन सोच-समझ कर देने लगेंगे.
- एकबारगी अपनी बेवजह की प्रतिक्रियाओं पर शांत मन से सोच-विचार करें. अपने फियर, रिएक्शन की जांच-पड़ताल करें. इससे न केवल आप एमिग्डला हाइजैक से उबरते जाएंगे, बल्कि आपका ब्रेन का एमिग्डला वाला हिस्सा भी स्ट्रॉन्ग होता जाएगा.
- इस बात को भी जानना होगा कि एमिग्डला हाइजैक असुरक्षा, टेंशन, डिप्रेशन, शर्मिंदगी, भय, अपमान जैसे इमोशनल एक्साइटमेंट के अत्यधिक होने से होता है. यदि कोई बात आपको लंबे समय से खाए जा रही है, भले ही वो कोई छोटी सी बात ही क्यों न हो, तो आगे चलकर उसे बड़ा ट्रिगर बनते देर नहीं लगती. इसलिए यह ज़रूरी है कि आप छोटी-छोटी बातों को दिल पर न लें. लोगों को माफ़ करना सीखें. किसी के प्रति में मन में खटास है तो उसे दूर करने पर काम करें. इससे मन भी खाली होता जाएगा और वो पुरानी बातें परेशान भी नहीं करेंगी.
- यदि बच्चों में यह समस्या दिखे, तो उन्हें शांति से समझाएं. उन्हें प्यार-दुलार करें. ध्यान रहे उन्हें डांट-डपट कर नहीं, बल्कि मीठी-मीठी अच्छी बातों व उदाहरणों द्वारा प्रोत्साहित करते हुए समझाना होगा.
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मेंटल हेल्थ नहीं, परंतु...
अक्सर लोग एमिग्डला हाइजैक को मेंटल हेल्थ से भी जोड़ लेते हैं, जबकि ऐसा बिल्कुल भी नहीं है. दरअसल, यह हमारे ब्रेन सेफ्टी से जुड़ा एक नेचुरल न्यूरोलॉजिकल रिएक्शन है. लेकिन यह भी गौर करने वाली बात है कि ऐसा लगातार होने लगे, तो आगे चलकर ख़तरनाक सिचुएशन का सामना करना पड़ सकता है. तब आपको एक्सपर्ट से थेरेपी की आवश्यकता भी पड़ सकती है.
यदि आपको एमिग्डला हाइजैक या यूं कहें कि इमोशनली हाइजैक अक्सर होते रहते हैं, तब ख़ास केसेस में मूड स्टेबल करने के लिए एंटी एंग्याजटी की मेडिसिन लेने की सलाह दी जाती है. लेकिन इसमें माइंडफुलनेस व कॉग्निटिव बिहेवियरल थेरेपी ही सबसे कारगर साबित होती है.
- ऊषा गुप्ता

