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फिल्म समीक्षा: मिस्टर एंड मिसेज माही- क्रिकेट के जुनून के साथ राजकुमार राव-जाह्नवी कपूर की लाजवाब केमिस्ट्री.. (Movie Review: Mr. & Mrs. Mahi)

रेटिंग: ३ ***

हर कोई जानता है कि भारत में क्रिकेट का जुनून किस कदर सिर चढ़ बोलता है. इस बार उसे ही आधार बना कर शरण शर्मा ने 'मिस्टर एंड मिसेज माही' फिल्म निर्देशित की है. फिल्म की कहानी ख़ास नहीं होने के बावजूद राजकुमार राव और जाह्नवी कपूर की बेहतरीन परफॉर्मेंस इसे लाजवाब बना देती है. हीरू यश जौहर, करण जौहर व अपूर्व मेहता निर्मित यह फिल्म खेल, इससे जुड़े पति-पत्नी के रिश्ते, पैरेंट्स की इच्छाएं, बच्चों की महत्वाकांक्षाएं इन सभी पहलुओं पर प्रकाश डालती है.


महेंद्र, राजकुमार राव बहुत बढ़िया क्रिकेट खेलते हैं, लेकिन नेशनल टीम में सिलेक्ट न होने पर उनका दिल टूट जाता है. इस पर उन्हें पिता द्वारा ज़बरदस्ती जयपुर की अपनी स्पोर्ट्स की दुकान पर बैठा दिया जाता है. जबकि महेंद्र बिज़नेस नहीं, बल्कि क्रिकेट में करियर बनाने की इच्छा रखते हैं. वही उनका छोटा भाई टीवी सेलिब्रिटी है, जिसे पिता का उनसे ज़्यादा प्यार मिलता है.
पिता की भूमिका में कुमुद मिश्रा ने उम्दा अभिनय किया है. पिता-पुत्र के सीन्स ख़ास बन पड़े हैं. वे महेंद्र की  शादी डॉक्टर महिमा से तय कर देते हैं. अपने बेटे के बिज़नेस हुनर की बढ़-चढ़कर तारीफ़ करते हैं, लेकिन यह बात महेंद्र को पसंद नहीं आती और वह महिमा से सच्चाई बता देते हैं. उनकी यही बात महिमा को प्रभावित करती है और वो शादी के लिए हां कह देती है. मेन ड्रामा शादी के बाद शुरू होता है, जब महेंद्र को पता चलता है की महिमा भी क्रिकेट को बहुत पसंद करती है और वह भी क्रिकेट में ही करियर बनाना चाहती थी. लेकिन पिता की इच्छा के कारण मजबूरन एमबीबीएस करना पड़ता है.

तब महेंद्र अपनी पत्नी को खेल के लिए प्रोत्साहित करते हैं और कोच की भूमिका निभाते हुए क्रिकेट में करियर बनाने के लिए राज़ी करते हैं. यही से शुरू होती है खेल और पति-पत्नी के रिश्ते में तनाव की शुरुआत. फिल्म की विशेष बात यह है कि महेंद्र-महिमा दोनों को उनके घर में 'माही' के नाम से पुकारते हैं. शायद इस कारण फिल्म का टाइटल भी मिस्टर एंड मिसेज माही रखा गया है. क्या महेंद्र अपनी पत्नी को सफल क्रिकेटर बना पाते हैं?.. खेल कपल्स के रिश्तों में दरार का कारण तो नहीं बनती..? इन सब‌ को जानने के लिए फिल्म देखनी पड़ेगी.


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इन दिनों क्रिकेट का माहौल चारों तरफ़ छाया हुआ है. आईपीएल के बाद टी20 वर्ल्ड कप क्रिकेट की खुमारी छाई हुई है. ऐसे में निर्माता-निर्देशक का इस विषय पर फिल्म बनाना और अभी रिलीज़ करना बिज़नेस के नज़रिए से प्रॉफिट वाला सौदा है.
'श्रीकांत' फिल्म के बाद एक बार फिर राजकुमार राव ने अपने सशक्त अभिनय से दिल जीता है. वह इस बात का ख़्याल नहीं रखते कि उनका हीरो वाला इमेज है या निगेटिव शेड्स, अपने हर क़िरदार को वह शिद्दत से जीते हैं और यहां पर भी उन्होंने वही कमाल दिखाया है.
जाह्नवी कपूर के करियर में निर्देशक शरण शर्मा की भी अहम भूमिका रही है, क्योंकि 'गुंजन सक्सेना- द करगिल गर्ल' फिल्म उन्होंने ही निर्देशित की थी, जिसे दर्शकों का अच्छा प्रतिसाद मिला था. इस फिल्म में भी जाह्नवी के काम की ख़ूब तारीफ़ हो रही है. वे अपनी एक्टिंग को एक अलग लेवल पर ले गई हैं. राजकुमार राव के साथ उनकी केमिस्ट्री देखते ही बनती है.


अन्य कलाकारों की बात करें, तो जरीना वहाब से लेकर कुमुद मिश्रा, राजेश शर्मा, अभिषेक बनर्जी, पुणेंद्र भट्टाचार्य सभी ने अपना बेस्ट दिया है. संगीत में आदेश श्रीवास्तव, तनिष्क बातचीत व विशाल मिश्रा की तिकड़ी ने मधुर संगीत देने की कोशिश की है.‌ देखा तेनु पहली बार… गाना तो सुनने और देखना दोनों में ही अच्छा लगता है.
फिल्म की कहानी शरण शर्मा ने निखिल मल्होत्रा के साथ मिलकर लिखी है. ज़ी स्टूडियो और धर्मा प्रोडक्शन के बैनर तले बनी  मिस्टर एंड मिसेज माही वन टाइम वॉच फिल्म है. फिल्म में हर तरह की भावनाओं को दिखाने की कोशिश की गई है. इसके बावजूद फिल्म इतना इंपैक्ट नहीं दे पाती, जितना इस तरह के विषय की फिल्मों में होनी चाहिए. और यह जरूरी नहीं की क्रिकेट पर बनी हर फिल्म को दर्शक पसंद ही करें.


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जयपुर जैसे गुलाबी शहर की ख़ूबसूरती को बख़ूबी दिखाया है सिनेमाटोग्राफर अयन गोस्वामी ने. नितिन बैद की एडिटिंग ठीक-ठाक है. फिल्म में उन पैरेंट्स पर भी कटाक्ष किया गया है, जो अपनी इच्छा पूरी करने के लिए अपने बच्चों पर इसका ठीकरा फोड़ते हैं. उन्हें मजबूर करते हैं कि वह उनकी जो ख़्वाहिशें पूरी ना हो सकी, उसे पूरा करें.
क्रिकेट के साथ-साथ रिश्तों के ताने-बाने को समझना और देखना भी ज़रूरी है. अगर आपकी सोच भी ऐसी है, तो यह फिल्म ज़रूर देखें. वैसे भी t20 वर्ल्ड कप का माहौल चल ही रहा है, तो मौक़ा भी है, दस्तूर भी है.

Photo Courtesy: Social Media

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