कभी-कभी लगता है दुनिया कितनी छोटी है. मुकेश जी के लिए तो यही कहा जा सकता है. कठुआ, जम्मू-कश्मीर में जन्मे मुकेश ऋषि ने चंडीगढ़ से एम.ए. की पढ़ाई पूरी करने के बाद फिजी व न्यूजीलैंड में भी काम किया. साथ ही मॉडलिंग भी की. वैसे कॉलेज के दिनों में वे एक बेहतरीन क्रिकेटर भी रहे थे.
भला उन्होंने कहा सोचा था कि भाई-पिता के साथ काम करने के बाद क़िस्मत उन्हें विदेश की यात्रा कराएगी. वहीं जीवनसाथी भी मिल जाएगा.

लेकिन एक बार फिर भाग्य का चक्र कुछ यूं चलेगा कि वे भारत लौटेंगे. और बिज़नेस, खेल, मॉडलिंग से अलहदा अभिनय की दुनिया में अपनी नई पारी शुरू करेंगे.
इच्छा तो उनकी भी थी फिल्मों में काम करने की. आख़िरकार इसके लिए उन्होंने रोशन तनेजा के एक्टिंग स्कूल से अभिनय की बारीकियां सीखने के साथ-साथ एक्टिंग से जुड़े कई छोटे-छोटे पहलुओं पर काम किया.
यदि उनके फिल्मी करियर की बात करें तो इसकी शुरुआत तो उन्होंने साउथ से ही की, जो आज भी बदस्तूर बरकरार है. साल 1992 में मलयालम फिल्म ‘गंधर्वम’ से उन्होंने अपने अभिनय का सफ़र शुरू किया. यदि ज़िक्र करें हिंदी फिल्मों का तो जैकी श्रॉफ, अमरीश पुरी स्टारर ‘गर्दिश’ उनके लिए मिल का पत्थर साबित हुई. आज भी इस फिल्म के उनके क़िरदार को सराहा जाता है. इसके बाद तो उन्होंने एक से बढ़कर एक फिल्मों में अपने अलग-अलग भूमिकाओं से प्रभावित किया. फिल्मों में उनका रोल भले ही छोटा रहा हो. लेकिन अपने सशक्त अभिनय से वे उन्हें प्रभावशाली बना देते थे. ‘सरफ़रो’ मूवी में उनका इंस्पेक्टर सलीम वाला क़िरदार भला कौन भूल सकता है. ‘गुंडा’ फिल्म के बुल्ला विलेन के रूप में तो उन्होंने अपनी अलग ही छाप छोड़ी. इसके बाद सूर्यवंशम, गुप्त, कोई मिल गया जैसी फिल्मों ने उन्हें हिंदी फिल्मों में ख़ास पहचान दी. लेकिन उनका दिल पंजाबी और साउथ की फिल्मों में बसता है. उन्होंने पंजाबी फिल्मों के अलावा दक्षिण भारत की तमिल, तेलुगु व मलयालम फिल्मों में अपने अभिनय का लोहा मनवाया.
मुकेश ऋषि को क़रीब से जानने वालों के लिए वे आज एक नेकदिल और प्यारे इंसान है. मेरी सहेली के इस पॉडकास्ट को देखने और सुनने के बाद आप भी इस बात से ज़रूर सहमत होंगे. तो देर किस बात की अभी देखें-सुनें और अपनी स्पष्ट राय भी ज़रूर दें कि आपको मुकेश ऋषि सबसे अधिक किस भूमिका में प्रभावित करते हैं. शेष फिर…
Photo Courtesy: Social Media
