पहला अफ़ेयर: … और फिर प्यार हो ग...

पहला अफ़ेयर: … और फिर प्यार हो गया! (Pahla Affair… Love Story: Aur Phir Pyar Ho Gaya)

चांदनी… दूधिया सफ़ेद… न सिर्फ़ उसका रंग बल्कि उसके कपड़े भी… वो हमेशा सफ़ेद रंग ही पहनती है… उस पर खूब फबता भी है… एकदम पाक… मासूम रंग जैसे सुबह-सुबह की नर्म-नाज़ुक ओस… उसकी भोली मुस्कान उसके गुलाबी होंठों पर हमेशा बिखरी रहतीहै… अभी-अभी हमारे मोहल्ले में रहने आई है और रोज़ सुबह-शाम मेरी गली से गुजरती है, उसके साथ उस वक्त एक छोटी बच्ची भीरहती है, उसकी छोटी बहन होगी, उसी को स्कूल छोड़ने-ले जाने जाती है…

जब भी वो मेरे घर के सामने से गुजरती है मैं ज़ोर से वो गाना मोबाइल पे लगा देता हूं… चांद मेरा दिल, चांदनी हो तुम… और वो एकनज़र मेरी खिड़की की तरफ़ डालकर निकल जाती है. यही सिलसिला चल रहा था कि एक रोज़ उसे बस स्टॉप पर देखा. मैंने बाइकरोकी और उसके पास जाकर बात करने की कोशिश की…

“आपको रोज़ देखता हूं मैं, नई आई हैं आप इस मोहल्ले में?”

“जी हां.”

उसकी मीठी आवाज़  आज पहली बार सुनी. खुद को खुशक़िस्मत समझ रहा था मैं उसके इतना क़रीब जाकर.

“कहीं जा रही हैं? आइए मैं छोड़ दूं…” मैंने उसकी मदद करने के इरादे से पूछा, तो उसने नो, थैंक यू कहकर टाल दिया… 

अब अक्सर उससे यूं ही मुलाक़ात होने लगी, कभी मार्केट में, तो कभी बस स्टॉप पर, क्योंकि मैंने बाइक छोड़ बस से जाना शुरू करदिया. 

“एक रोज़ हमें बस में साथ बैठने का मौक़ा मिला, तो उसने सवाल किया, “आप तो बाइक से जाते थे ना?”

“जी, लेकिन सोचा बाइक से पेट्रोल बर्बाद करने से बेहतर है पब्लिक ट्रांसपोर्ट यूज़ करूं…”

“वैसे आपका नाम जान सकता हूं…?” मैंने हिम्मत करके पूछ ही लिया. 

“मैं चांदनी हूं. वैसे आपका नाम क्या है?”

“मैं वियान हूं…”

फिर हम दोनों चुप रहे और इतने में ही मेरा स्टॉप आ गया… अरे, ये क्या चांदनी भी यहीं उतर रही है? मैं सोच में पड़ गया. वो आगे चलरही थी, मेरे ही बैंक के गेट की ओर वो जाने लगी. मैंने सोचा कोई काम होगा. मैं भी अंदर चला गया और काम में जुट गया. वैसे मेरीनज़रें चांदनी को ही ढूंढ़ रही थीं, पर वो कहीं नज़र ही नहीं आ रही थी. इतने में ही डेस्क पर रखा फ़ोन बजा और हमको कॉन्फ़्रेन्स रूम मेंबुलाया गया. 

“हेलो एवरीवन, मैं चांदनी… आपकी नई ब्रांच मैनेजर…” 

उसको यूं देखकर मेरे तो होश ही उड़ गए थे.जिसे मैं एक घरेलू लड़की समझ रहा था, उसका एक अलग ही रूप और अंदाज़ आज मेरेसामने था. 

ख़ैर, मीटिंग ख़त्म हुई और मैं अपने डेस्क पर लौट आया. 

“वियान सर, आपको मैम ने बुलाया है…” मुझे ऑफ़िस बॉय ने आकर कहा तो मैंने केबिन में जाकर कहा- “मैम आपने बुलाया?”

“हां, मैंने सोचा बैंक के सभी सीनियर पोस्ट वालों से वन ऑन वन बात करके अपडेट ले लेती हूं ताकि हम मिलकर बतौर एक टीम कामकरें और अपने बैंक को फिर से नंबर वन बनाएं.”

चांदनी की बातें सुनकर मेरी जान में जान आई, वरना मुझे लगा वो मुझे फटकार लगाएगी. जिस तरह से मैं उसके क़रीब जाने और दोस्तीकरने की कोशिश कर रहा था, लेकिन वो काफ़ी प्रोफेशनल थी. 

एक रोज़ मैंने चांदनी से पूछा, “मैम, आपकी बहन को स्कूल अब कौन लाता-ले जाता है?”

“मुस्कान मेरी बहन नहीं, बेटी है और मैंने केयरटेकर रख ली है. मैं नई थी इस जगह इसलिए थोड़ा वक्त लगा और अब तो मुझे बैंक कीओर से घर भी एलॉट हो गया है, तो शिफ़्ट हो जाऊंगी…”

मेरे पैरों तले ज़मीन खिसक गई, ये शादीशुदा है? कभी लगा नहीं, इसके पति को भी नहीं देखा… इतने में ही वो बोली…

“वैसे तुम मुझे चांदनी बुला सकते हो, आख़िर हम एक ही मोहल्ले में जो रहते हैं… वैसे आजकल तुम्हारा फ़ोन एनर्जी सेविंग मोड़ में हैक्या? वो गाना प्ले नहीं होता…”

“सॉरी मैम, मुझे पता नहीं था आप यहां मैनेजर के तौर पर जॉइन करनेवाली हो और आपकी शादी हो चुकी है ये भी अभी पता चला… मैंमाफ़ी चाहता हूं…” 

“कोई बात नहीं, इतना घबरा क्यों रहे हो, मैं अपनी पर्सनल और प्रोफेशनल लाइफ़ मिक्स नहीं करती…”

उसके बाद मैं थोड़ा सहज हो गया पर दुःख इस बात का था कि पहली बार किसी से प्यार हुआ लेकिन अब ये अधूरा ही रह जाएगा… चांदनी और मैं अच्छे दोस्त बन रहे थे. वो बैंक के दिए बड़े घर में शिफ़्ट भी हो गई थी. मुझे लगा अपनी फ़ैमिली के साथ खुश होगी वो. इसी बीच मैंने उससे एक रोज़ पूछ लिया- “चांदनी, अपने पतिदेव से भी तो मिलवाओ कभी. अब तो हम दोस्त हैं.”

“वियान, शादी के एक साल बाद ही उनका एक्सिडेंट हो गया था. हमारी लव मैरिज़ हुई थी. मेरा नाम भी शादी के बाद उन्होंने बदलकरचांदनी रख दिया था, उनको मुझ पर सफ़ेद रंग बहुत अच्छा लगता था, पर क्या पता था कि ये सफ़ेद रंग वो मुझे हमेशा के लिए देजाएंगे…”

उसकी खूबसूरत आंखें उदास लग रही थीं… मैंने उसे सम्भालते हुए कहा, “तुमने दोबारा शादी करने की नहीं सोची कभी…?”

“मुझे हमेशा ही लगता था कि प्यार एक ही बार होता… रोहित की यादें और मेरी बेटी मुस्कान का साथ काफ़ी हैं ज़िंदगी गुज़ारने केलिए… “

“पर चांदनी, प्यार के और प्यार के लिए कोई रूल्स थोड़ी होते हैं कि ये बस एक ही बार किया जा सकता है… या पहला प्यार हीआख़िरी प्यार होता है… प्यार तो एक खूबसूरत एहसास है… जो दिल और रूह को छूता है… इसकी शुरुआत भले ही शारीरिक आकर्षणसे होती हो पर जब ये परवान चढ़ता है तो सीधे आत्मा में उतरता है… तुमको भी जब लगे कि प्यार दोबारा हो रहा है तो बस खुद कोरोकना मत…”

उससे ये सब एक ही झटके में कहकर मैं घर चला आया… अगले दिन छुट्टी थी. मैं सुबह उठकर खिड़की के पास आया तो लगा कोईसपना देख रहा हूं… सामने चांदनी थी… मैं खुद को रोक नहीं पाया और झट से उसके पास जाकर कहा- “तुम यहां क्या कर रही हो?”

“बस आज मेरा मन हुआ किसी के शांत पड़े मोबाइल से म्यूज़िक सुनूं… वो एक ख़ास गाना है ना- चांद मेरा दिल…चांदनी हो तुम… औरकल ही किसी ने मुझसे ये भी कहा था कि जब फिर प्यार हो जाए तो खुद को रोकना मत… तो मैं चली आई इसी मोहल्ले में रहने, जहांमेरा भी कोई अपना रहता है… “

हम दोनों ही हंस पड़े और मेरा प्यार मुकम्मल हो गया… 

  • गीता शर्मा 
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