मुझे यूं भावुक होता देख मम्मी जी ने आगे बढ़कर मुझे गले से लगा लिया. वह कोई साधारण आलिंगन नही था, वह तो जैसे एक 'जादू की झप्पी' थी. वह झप्पी मेरे भीतर के सारे डर को सोखती हुई, मेरे मन की गहराई में मम्मी जी की एक नई छवि बना रही थी.
जीवन की दो अलग-अलग राहों पर सवार आज का दिन किसी द्रौपदी के चीर की तरह अंतहीन परीक्षा जैसा लग रहा था. सुबह के सूरज की पहली किरण के साथ जब मैं अपने कमरे से बाहर निकली ही थी कि फोन पर घंटी बजी. फोन उठाते ही मां की कांपती, नर्म आवाज़ ने मुझे झंझोड़ दिया, “कविता, तेरे पापा को अस्पताल लेकर आई हूं. कल रात उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई थी तो घर के पास वाले अस्पताल में उनको एडमिट कर दिया है. तुम जल्दी आ जाओ."
मां का इतना कहना हुआ ही था कि मैं फोन हाथ में लिए सन्न सी खड़ी रह गई. तभी आकाश ने मुझे संभाला और फोन श रखते हुए कहने लगे, "धैर्य खोने से कुछ भी नही होगा, तुम तैयार हो जाओ फिर हम अस्पताल चलते है."
आकाश के इतना कहते ही मैं जल्दी से तैयार होने चली गई. तभी अचानक मुझे ख़्याल आया कि आज तो पिंकी की सगाई है और घर पर काफ़ी मेहमान आने वाले हैं, मम्मी जी अकेले क्या-क्या संभालेंगी.
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यह सोचकर मैं आकाश के पास गई और रुकते हुए कहा, “आकाश, आज पिंकी की सगाई है. बहुत सारे मेहमान आएंगे, ऐसे में मैं हॉस्पिटल कैसे जा सकती हूं. यहां मम्मी जी को भी मेरी ज़रूरत होगी, वह अकेली पड़ जाएंगी."
तभी पीछे से एक ममतामयी आवाज़ आई, “तू चिन्ता क्यों करती है बहू, यहां मैं सब सम्भाल लूंगी. अगर ज़रूरत पड़ेगी तो मासी को मदद के लिए बुला लूंगी.“ इतना सुनते ही मैं आवाज़ की दिशा में पलटी तो देखा की मम्मी जी मेरे पीछे ही खड़ी थीं. मैं ख़ुद को संभाल न पाई और मेरी आंखों से आंसू बह निकले.
मुझे यूं भावुक होता देख मम्मी जी ने आगे बढ़कर मुझे गले से लगा लिया. वह कोई साधारण आलिंगन नही था, वह तो जैसे एक 'जादू की झप्पी' थी. वह झप्पी मेरे भीतर के सारे डर को सोखती हुई, मेरे मन की गहराई में मम्मी जी की एक नई छवि बना रही थी. जिन्हें मैं अब तक सिर्फ़ अपनी सास समझती थी, आज वह मेरी अपनी मां की जगह ले रही थीं.
तभी मम्मी जी मेरे सिर पर हाथ रखकर कहने लगीं, “तुम्हारे पिताजी क्या हमारे कुछ नही लगते? हमने बेटी ली है तो बेटा भी दिया है. आकाश की भी उतनी ही ज़िम्मेदारी है अपने पिता (ससुर) का ध्यान रखने की. तुम अब देर मत करो, जल्दी ही अस्पताल के लिए निकलो. यहां पर सब कुछ मैं देख लूंगी और अगर ज़रूरत पड़ी तो तुम्हें फोन कर दूंगी."
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इतना सुनते ही हम दोनों अस्पताल के लिए रवाना हो गए. आज संकट की इस घड़ी में मम्मी जी का साथ मुझे मिला, मैं उसे जीवनभर नहीं भूल पाऊंगी.
ज़रूरी नहीं की हर सास बुरी होती है, बस उन्हें समझ कर अपनाने की देर है, वह समय आने पर एक अच्छी मां साबित होती हैं.
- रितू जाजू
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