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कहानी- करेले (Short Story- Karele)

“शिखर को करेले बहुत पसंद हैं मम्मी, लेकिन मुझसे तो… इसलिए मम्मी जी ही बनाती हैं.”‌ अंकिता करेले छीलकर प्लेट में रख रही थी.  “इनको आप ही बनाना मुझसे बिगड़ जाएंगे.”

“अंकिता, करेले फ़ायदेमंद हैं और उनका कसैलापन आसानी से हटाया जा सकता है. आओ मैं बताती हूं कैसे…”

“मुझसे तो करेले ठीक बनते ही नहीं मम्मी, कड़वाहट रह जाती है. आप पता नहीं कैसे बनाती हो!” सब्ज़ी के थैले से करेले निकालकर टोकरी में रखकर धोते हुए अंकिता ने कहा.

अंकिता की शादी कुछ माह पूर्व ही हुई थी. तीन दिन पहले ही वह ससुराल से पहली बार मायके आई थी. इन तीन दिनों में उसकी ज़्यादातर बातों का अर्थ यही था कि वह कितनी भी कोशिश कर ले, लेकिन उसके ससुराल वाले हमेशा नाख़ुश ही रहते हैं.

उस दिन अंकिता जब अपनी सहेली से बात कर रही थी तब उसकी बातें मम्मी ने भी सुनी थीं.

“मुझे बिल्कुल पसंद नहीं आता जब मेरी ननद कॉलेज जाने के पहले मेरे कमरे में तैयार होने आ जाती है. उसकाभी अपना कमरा है, पर यहां मेरे कॉस्मेटिक प्रयोग करने को जो मिल जाते हैं उसे… मैने तो एक दिन साफ़ कह दिया था कि कभी–कभी ठीक है ऐसे रोज़–रोज़ सही नहीं लगता, तभी से मुंह फुलाए है.”

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“तेरी सास ने कुछ नहीं कहा क्या? उनसे बात कर लेती.” सहेली ने सुझाव दिया.

“उनको क्या कहती. उनको अपने आप ही सोचना चाहिए था, पर उनकी लाडली को टोक दिया तो उनका मुंह भी सूज गया. मैं परवाह नहीं करती. पीठ पीछे कुढ़ने की जगह‌मुझे तो जो कहना है आमने-सामने साफ़ कह देती हूं.”

अंकिता ने मुंह तो बना लिया था, लेकिन उसके चेहरे पर एक दर्द भी घिर आया था ससुराल में अपनी जगह न बना पाने का, जो उसकी मम्मी से छिपा नहीं रह सका था.

“शिखर को करेले बहुत पसंद हैं मम्मी, लेकिन मुझसे तो… इसलिए मम्मी जी ही बनाती हैं.”‌ अंकिता करेले छीलकर प्लेट में रख रही थी.

“इनको आप ही बनाना मुझसे बिगड़ जाएंगे.”

“अंकिता, करेले फ़ायदेमंद हैं और उनका कसैलापन आसानी से हटाया जा सकता है. आओ मैं बताती हूं कैसे… करेले साफ़ करने के बाद इनको नमक लगाकर कुछ देर के लिए छोड़ दो. नमक सारी कड़वाहट को पानी में बदल देगा. फिर निचोड़ कर सारे मसाले भरकर सब्ज़ी बना लो.”

अंकिता ने वैसा ही किया. रात में खाना खाते हुए सभी ने करेले की तारीफ़ की. अंकिता ने चखा, सचमुच… करेलों की कड़वाहट ख़त्म हो चुकी थी.

“अरे वाह मम्मी, यह तरीक़ा तो बहुत अच्छा बताया आपने. अब मैं ऐसे ही बनाऊंगी पर… मेरी ससुराल में तो कोई तारीफ़ ही नही करता.” अंकिता का मुंह लटक गया.

“अंकिता, रिश्ते भी करेले जैसे ही हैं. उन पर भी स्नेह का नमक लगाना ज़रूरी होता है. जब रिश्तों पर प्रेम की परत चढ़ा कर छोड़ दोगी तो कुछ समय में उनकी कड़वाहट भी ख़त्म हो जाएगी और जो बचेगा वह एक ख़ूबसूरत रिश्ता होगा.” मम्मी की बात सुनकर अंकिता सोचमें पड़ गई फिर उसके होंठों पर मुस्कुराहट आ गई.

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“थैंक यू मम्मी, मैं भी अब करेले की तरह ही अपने रिश्तों को भी अच्छा बनाऊंगी.” अंकिता की आंखों में चमक आ गई.

“तो इसी बात पर एक और करेला हो जाए!” कहते हुए मम्मी ने करेले का एक कौर अंकिता के मुंह में रख दिया.

– मेघा राठी

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Photo Courtesy: freepik

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