“आप लोग समझते क्यों नहीं? एक ही बात बार-बार क्यों पूछते हैं? मेरी समझ में यह नहीं आता कि लोग दो प्रेमियों की भावनाओं को पैसों से क्यों तौलते हैं? प्रेम का संबंध मन से होता है, पैसे से नहीं. प्रेम क्या होता है, यह वही समझ सकता है, जिसने प्रेम किया हो. जो केवल पैसे को समझते हैं, उन्हें प्रेम की क्या समझ?”
जब भी नीनाद और नताशा मिलते, कुछ रोमांटिक बातें करने के बाद नीनाद अनिवार्य रूप से थोड़ा गंभीर और वास्तविक हो जाता. नीनाद कहता कि वह बहुत साधारण इंसान है, इसलिए नताशा उसके साथ पता नहीं ख़ुश रह पाएगी या नहीं?
नीनाद मध्यमवर्गीय परिवार का साधारण लड़का था, हर तरह से सामान्य. जबकि नताशा एक समृद्ध घर की लड़की थी. कुछ मुलाक़ातों के बाद एक दिन नताशा ने नीनाद से पूछा, “हम कब एक-दूसरे के इतने क़रीब आ गए, पता ही नहीं चला?”
“हां, सब कुछ अचानक हो गया, वरना कहां तुम और कहां मैं.”
“ऐसा क्यों कह रहे हो?” नताशा बीली.
“ठीक ही तो कह रहा हूं. तुम्हारे और मेरे बीच कितना अंतर है.”
“किस बात का अंतर, पैसों का?”
“हां, वही.”
नताशा थोड़ा झुंझलाकर बोली, “तुम मिलने पर हर बार ऐसी बातें क्यों करते हो? हमारे विचारों में कहां कोई अंतर है? हमारे मन कितने अच्छे से मिल गए हैं. प्रेम कोई पैसे देखकर थोड़े ही होता है. पैसे से प्रेम ख़रीदा नहीं जा सकता नीनाद और प्रेम की दौलत के सामने पैसों की दौलत कम पड़ जाती है.”
यह भी पढ़ें: शादी के लिए 36 गुणों में से कौन से गुण मिलने ज़रूरी? (Which of the 36 qualities are necessary for marriage)
नीनाद चुप रहा तो नताशा फिर बोली, “तुम बार-बार हमारे बीच पैसों के अंतर की बात मत किया करो. तुम्हारी इस बात से मुझे बहुत तकलीफ़ होती है. ऐसा लगता है, जैसे मेरे प्रेम में कोई कमी है, तभी तुम्हें ऐसी चिंता होती है. अगर हमारा प्रेम सच्चा है तो उसके बीच कोई रुकावट नहीं आएगी.”
नताशा को घर में काफ़ी स्वतंत्रता मिली हुई थी. जब उसने घरवालों से नीनाद के बारे में बात की तो शुरुआत में किसी ने उसे गंभीरता से नहीं लिया. लेकिन जब उसने दोबारा ज़ोर देकर यह बात की, तब सभी ने उसकी बात पर ध्यान दिया.
नताशा से सीधा यही सवाल पूछा गया, “लड़का कितना कमाता है?”
घरवालों का यह पहला सवाल ही उसे बुरी तरह चुभ गया. उसने कहा, “आप लोग सीधे यही क्यों पूछ रहे हैं? यह क्यों नहीं पूछा कि मुझे नीनाद क्यों पसंद है? आपकी बेटी ने हमेशा श्रेष्ठ को ही चुना है. आप यह बात अच्छी तरह जानते हैं. पहले यह तो पूछिए कि मुझे वह क्यों अच्छा लगता है, फिर पैसों से जुड़े सवाल पूछिए.”
घरवालों ने कहा, “यह सब तो ठीक है नताशा. तुमने जो लड़का चुना है, वह अच्छा ही होगा, लेकिन पैसा आदमी की पहली योग्यता और ज़रूरत है.”
नताशा हर तरह से अपने प्रेम को समझाना चाहती थी, पर घरवालों के लिए वे बातें महत्वहीन थीं. उनके लिए सबसे महत्वपूर्ण चीज़ पैसा था. पिता बार-बार पैसों से जुड़े सवाल पूछते रहे.
आख़िरकार तंग आकर नताशा बोली, “आप लोग समझते क्यों नहीं? एक ही बात बार-बार क्यों पूछते हैं? मेरी समझ में यह नहीं आता कि लोग दो प्रेमियों की भावनाओं को पैसों से क्यों तौलते हैं? प्रेम का संबंध मन से होता है, पैसे से नहीं. प्रेम क्या होता है, यह वही समझ सकता है, जिसने प्रेम किया हो. जो केवल पैसे को समझते हैं, उन्हें प्रेम की क्या समझ?”
घरवाले अपनी जगह सही थे. कोई भी नहीं चाहता कि उसकी बेटी दुखी हो. लेकिन नताशा को यह बात खलती थी कि अपने ही लोग यह नहीं समझ पा रहे थे कि उसका सुख किस में है या शायद समझना ही नहीं चाहते थे. वे सुख की गणना पैसों के आधार पर करते थे, जबकि नताशा उन्हें समझाना चाहती थी कि ज़रूरत भर का पैसा हो तो भी इंसान सुख से रह सकता है. शायद सब अपनी-अपनी जगह सही थे.
कुछ दिनों बाद नीनाद ने नताशा की पूरी बात सुनकर कहा, “मुझे इसी बात का डर था नताशा. मैंने अपने मन को पहले से ही तैयार कर लिया था. हमारे बीच पैसों का अंतर तो है ही. उसे कैसे कम किया जाए, यह शायद मेरे जैसे इंसान की समझ में भी न आए, लेकिन एक बात की बहुत ख़ुशी है कि हमारे प्रेम में कोई दूरी नहीं है.”
नताशा बोली, “अरे, कैसी बातें कर रहे हो नीनाद. मैं तुमसे अलग होने वाली नहीं हूं. अगर वे अपनी जगह सही हैं, तो हम भी ग़लत नहीं हैं.”
दो प्रेमी दिल एक-दूसरे को मन से समझने की कोशिश कर रहे थे, जबकि शायद उसी समय दुनिया में पैसे और लेन-देन का हिसाब रखने वाले लोग पैसों की गणना में ही व्यस्त रहे होंगे, क्योंकि पैसा भी इंसान की एक ज़रूरत है.

वीरेंद्र बहादुर सिंह

अधिक कहानियां/शॉर्ट स्टोरीज़ के लिए यहां क्लिक करें – SHORT STORIES
Photo Courtesy: Freepik
