रिश्तों के डूज़ एंड डोंट्स: क्या...

रिश्तों के डूज़ एंड डोंट्स: क्या करें, क्या न करें ताकि रिश्ता बना रहे… (Relationship Ideas: Do’s & Don’ts For A Happy-Successful Marriage)

रिश्तों को बनाए रखना और निभाना भी एक कला है. जिसने इसे समझ लिया, उसने रिश्तों को संभाल लिया. आप भी ये जरूर समझें कि जैसे हर बात के डूज़ एंड डोंट्स होते हैं, वैसे ही रिश्तों के भी होते हैं. ज़रूरी है इन्हें समझें और पहचानें.

– रिश्ते में कम्यूनिकेट करना किसी सबसे ज़रूरी है. कभी भी कोई समस्या हो, कोई शंका हो, तो बेहतर होगा कि आपसी बात चीत से मन का बोझ हल्का करें, अपनी परेशानियों को साझा करें.
– इसी तरह पार्टनर की परेशानियों को भी जानें और समझने की कोशिश करें, इससे आपकी बॉन्डिंग बेहतर होगी. 
– बातचीत ना करना किसी समस्या का हल नहीं बल्कि यह रिश्तों को और उलझा देता है.
– एक-दूसरे से शिकायत हो या विवाद हो गया हो तो मन शांत होते ही उस पर बात करें. 
– बात करना ही समाधान है. बात ना करने की आदत धीरे धीरे दूरियाँ बढ़ने लगती हैं और रिश्ते कमज़ोर होने लगते हैं.
 – शेयर-केयर करें. रिश्तों में सिर्फ़ अपने बारे में नहीं सोचा जाता, रिश्तों का मतलब ही है एकजुट होकर सबके लिए सोचना. 
– एक समय के बाद हम खुद यह मान लेते हैं कि अब रिश्ते को अतिरिक्त समय देने की या कुछ स्पेशल करने की ज़रूरत नहीं. 
– हमको लगता है हमारा रिश्ता स्टेबल हो गया और यहीं हम ग़लती करते हैं. धीरे-धीरे रिश्ते में बोरियत पनपने लगती है और वो रूटीन सा लगने लगता है.
– शेयरिंग की भावना से रिश्ते गहरे और मज़बूत बनते हैं. सुख-दुःख हो, कामयाबी या असफलता सब कुछ शेयर करें. 
– इससे आपकी ख़ुशियां और हौसला दोनों बढ़ेंगे और रिश्ते बोझ कम संबल अधिक लगेंगे. 
– रिश्ते को ऊर्जावान बनाए रखने के लिए आपके प्रयास ज़रूरी हैं. हमेशा कुछ नया करते रहें और पार्ट्नर को स्पेशल फ़ील करवाते रहें.
– रिश्ते में स्वार्थ की भावाना से भी बचना ज़रूरी है. स्वार्थ की भावना भले ही आपको कुछ समय के लिए ख़ुशी दे देगी लेकिन आगे चलकर आप एकदम अकेले पड़ जायेंगे. 
– स्वार्थ छोड़कर देखें, आपको अपने रिश्ते ही इतने प्यारे लगेंगे कि बोझ अपने आप हल्का लगने लगेगा.
– मिलकर काम करें, घर या बाहर दोनों जगह का काम बांट लें. सब मिलकर करेंगे तो ज़िंदगी और रिश्ते दोनों आसान लगने लगेंगे. 
– रिश्तों में सबकी जिम्मेदारियां बनती हैं और जो कुछ भी निभाना होता है मिलकर ही बेहतर तरी़के से निभाया जा सकता है. जो काम आप बेहतर कर पायें वो आप लें और दूसरों को भी उनकी क्षमता के अनुसार काम दें.
– आप खुद आगे बढ़कर कहें कि यह काम मुझ पर छोड़ दें, फिर देखिए रिश्तों से बोझ अपने आप कम होगा और रिश्ते बोझिल नहीं प्यारे लगेंगे.
– ठीक इसी तरह आर्थिक ज़िम्मेदारी भी बांट लें.
– आपको कुछ ख़र्चों कीज़िम्मेदारी खुद ब खुद ख़ुशी ख़ुशी लेनी चाहिए. 
– रिश्तों में ज़रूरी है कि आर्थिक ज़िम्मेदारियों का भी बंटवारा हो. 
– आप अगर यह सोच रखेंगे कि मैं अपने पैसे बचा लूं और सामने वाला ही अकेला खर्च करे तो यह सही नहीं.
– अपना दिल बड़ा रखें. सोच छोटी न करें. दिल को खुला रखेंगे तो ज़िंदगी जी खोल के जी सकेंगे.
– अगर आप अपने रिश्तों का ख़याल रखेंगे तो बुरे समय में रिश्ते आपका ख़याल रखेंगे. 
– अपनी सोच बदलें, फ़ायदे-नुक़सान के तराज़ू में रिश्तों को ना तोलें. 
– अगर आपको किसी चीज़ की कमी भी होगी तो अपनों के साथ वो कमी महसूस नहीं होगी. 
– चाहे पैसों की कमी हो या सुविधाओं की अगर अपने साथ हैं तो ज़िंदगी की राह आसान हो जाती है. 
– रिश्तों में कभी भी फ़ायदा या नुक़सान की सोच के साथ आगे नहीं बढ़ा जा सकता. रिश्तों को सिर्फ़ प्यार से ही सींचा जा सकता है.
– ईगो ना रखें. अहंकार हर रिश्ते को मिटा देता है. 
– खुद को समझदार और दूसरों को मूर्ख समझने की गलती ना करें. 
– अपनों से भला कैसा ईगो?

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बेहतर है सबको साथ लेकर चलें. नकारात्मक सोच और भावनाओं को त्याग दें.
– ईगो किसी भी रिश्ते के लिए ये सबसे ज़हरीला तत्व है. 
– ईगो आपको कुछ पलों के लिए तो एक जीत का एहसास ज़रूर दिला सकता है लेकिन इसके बदले आप क्या कुछ हार जाते हैं यह बाद में पता चलता है. 
– रिश्तों में हमेशा झुककर चलन ेकी, एडजेस्ट करने की और एक-दूसरे को सपोर्ट करने की ज़रूरत होती है लेकिन आपका ईगो आपको यह सब करने से रोकता है.
– ईगो आपके रिश्ते को खोखला कर सकता है क्योंकि धीरे धीरे आपके अपने भी आपसे दूर होने लगते हैं.
– धोखा न दें. पार्टनर को 
चीट ना करें. मर्यादा भी रिश्ते का दूरसा नाम है. रिश्ते बंधन होते हैं, लेकिन ये बंधन ख़ूबसूरत होता है. इसमें अगर धोखा या स्वार्थ आ जाए, तो रिश्ता बोझ लगता है. 
– चीटिंग की रिश्तों में कोई जगह नहीं होती. पार्टनर को धोखा ना दें. 
– इसी तरह ख़ुद भी रिश्ते में बेईमानी बर्दाश्त न करें. 
– यदि कोई आपके भरोसे का फ़ायदा उठाता रहे और गलती  दोहराए, तो आपको आंखें खोल लेनी चाहिए, क्योंकि अगर कभी कोई भूल हो जाए या इंसान भटक जाए, तो माफ़ किया जा सकता है, लेकिन  अगर आप सहते जाएंगे तो पार्टनर की यह सोच बन जाएगी कि मैं चाहे जो भी करूं, उसे बर्दाश्तकर लिया जाएगा. 
– आपके लिए अगर पार्टनर के मन में प्यार और सम्मान नहीं तो उस रिश्ते को भी वो सम्मान नहीं देगा जिसमें आप दोनों बंधे हैं. अच्छा होगा ख़ुद को भी भ्रमित होने से रोकें. 
– अगर सम्मान चाहते हैं, तो आपको भी सम्मान देना होगा. 
– किसी को कम ना आंके. घर में भी सबकी राय को महत्व दें. सबसे राय लें. कई बार एक बच्चा भी बड़ी से बड़ी समस्या का आसान रास्ता सुझा देता है.
– गुस्से और व्यर्थ के विवादों में न उलझें. कपल यह ग़लती करते हैं कि विवादों के चलते अपने ग़ुस्से पर क़ाबू नहीं कर पाते. 
– ग़ुस्से पति-पत्नी दोनों ही एक-दूसरे के घर-परिवार, परवरिश और आदतों पर उस वक़्त तो उल्टा-सीधा बोल जाते हैं, लेकिन बाद में उन्हें एहसास होता है कि कुछ ज़्यादा ही बोल गए. 
– इसलिए बेहतर होगा कि विवाद के बाद जब आप दोनों का ही ग़ुस्सा शांत हो जाए तब उस पर बात की जाए. समस्या कीजड़ तक जाना ज़रूरी है ताकि उसको सुलझाया जा सके. 
– पर अक्सार होता यह है कि विवाद को सुलझाने की बजाय और माफ़ी मांगने की बजाय कपल बात को टालना शुरू कर देते हैं. लेकिन वो बात वहीं की वहीं रह जाती है, जो कभी ना कभी बैकफ़ायर कर सकती है और दूसरे विवाद को जन्म दे सकती है. 
– भविष्य में फिर ऐसा विवाद ना हो, इसके लिए अपनी गलती की माफी मांगे और धैर्य व संयम से काम लें.
– अगर पार्टनर कभी ग़ुस्सा करे तो उस बात को लंबा न खींचें, क्योंकि ये सामान्य सी बात है. कभी आप तो कभी वोग़ुस्सा करेंगे ही, आख़िर इंसानी फ़ितरत है ये.
 – बदले की भावान न रखें, क्योंकि अक्सर झगड़ने के बाद पति-पतनी एक दूसरे की भावनाओं को जानबूझकर आहत करते हैं.
– उन्हें लगता है कि अगर पार्टनर उन्हें हर्ट करता है तो वो भी बदला लेंगे. 
– एक दूसरे को ताना देना या कोई ऐसी बात करना जिससे पार्टनर आहत हो ऐसा ना करें. इससे आपका रिश्ता कमज़ोर होगा और विवाद भी बढ़ेंगे. 
– बेहतर होगा कि एक दूसरे की कमज़ोरियों को स्वीकारें और फिर आगे बढ़ें. 
– सभी को सम्मान दें और आपसी झगड़े में घरवालों को बीच में ना लायें.
– एक दूसरे के घरवालों को लेकर कोई ताना ना दें और ना ही उनका अपमान करें. 
– दूसरों के सामने भी पार्टनर को नीचा ना दिखायें, वरना आपका रिश्ता ज़्यादा नहीं चल पाएगा.
– इमोशनल ब्लैकमेलिंग से बचें. क्योंकि ऐसा करने पर पार्टनर आप अपना सम्मान खो देंगे. आपकी इन धमकियों को पार्टनर एक समय के बाद नज़रअंदाज़ करने लगता है. 
– कभी सेक्स को लेकर तो कभी बच्चों के नाम पर, धमकियां देने की गलती महिलाएं खासतौर से करती हैं. इससे बचें.
– अपनी फ़िज़ूल की ख़्वाहिशों को पूरा करने के लिए ब्लैक मेलिंग न करें और न ही एक-दूसरे को ताना दें.
– कई छोटी-छोटी बातें हैं जो रिश्ते में आपको सहनी ही चाहिए और उनको आधार बनाकर अपने रिश्ते की बलि न चढ़ाएं.
– झूठ बालने से बचें. चाहे पैसों को लेकर हो या किसी आरैर बात पर, झूठ रिश्ते की बुनियाद हिला सकता है.
– यह किसी भी रिश्ते को कमज़ोर कर सकता है. 
– झूठ चाहे कितना भी मीठा हो लेकिन वो सच की जगह कभी नहीं ले सकता.  बेहतर होगा कि सच के साथ रहें और अपने रिश्तों को भी सच्चा बनाए  
– अपनी समस्यायएं शेयर करें, छिपाएं नहीं, शेयर करने से उनका हल निकल सकता है. 
– कोशिश करें कि रिश्तों में ईमानदार बने रहें और झूठ को पनपने ही ना दें.  
– एक झूठ को छुपाने के लिए आपको झूठ पर झूठ भी बोलने पड़ते हैं, जिनका खुलासा होने पर आप पर से अपनों का ही भरोसा उठ जाता है. 
– पार्टनर से द्वेष या जलन की भावना न रखें, उसकी कामयाबी पर ख़ुशी मनाएं, उसे मोटिवेट करें, क्योंकि आप पार्टनर है, प्रतियोगी नहीं. 
– लेकिन अक्सर कपल ये भूल जाते हैं कि वो साथी हैं और एक दूसरे का सहारा भी. 
– आपस में प्रतियोगिता न करें. अक्सर ऐसा देखा गया है कि घर के सदस्य आपस में ही प्रतियोगिता करने लग जाते हैं यह जताने के लिए कि वो श्रेष्ठ हैं. 
– ऐसे में दूसरे की ज़रा सी गलती पर भी वो उसे नीचा दिखाने से बाज़ नहीं आते और ताने देने लगते हैं. इससे निगेटिविटी फैलते हैं और रिश्ता कमज़ोर पड़ता है. इसलिए ये न करें.
– छोटे-मोटे झगड़े हर रिश्ते में होते हैं तो उनको आधार बनाकर कभी अपने रिश्ते को न बिगाड़ें.
– इसी तरह सामनेवाले को अपने जैसा बनाने या बदलने की कोशिश न करें, इससे रिश्ते ख़राब होंगे.
– अगर पार्टनर की कुछ आदतें आपको नापसंद हों तो यही सोचें कि कोई भी परफेक्ट नहीं होता. 
– कभी भी अपने मायके वालों से तुलना करके अपने ससुराल की बुराई करना और फिर उसको आधार बनाकर झगड़ने से बचें. 
– रिश्ते में हिंसा को जगह न दें. न हिंसा करें, न सहें.  पर अधिकांश महिलाएं रिश्ते को बचाए रखने के लिए रिश्ते में हिंसा व मारपीट तक बर्दाश्त करती हैं. 
– एक सर्वे के मुताबिक़ भारत में घरेलू हिंसा के कारण काफ़ी मौतें होती हैं. 
– लेकिन बावजूद इसके न स़िर्फ पढ़ी-लिखी महिलाएं बल्कि उनके घरवाले भी उन्हें चुपचाप सब सहने के लिए कहते हैं, क्योंकि वो घर की इज़्जत या रिश्ते को बचाए रखने की दुहाई देने लगते हैं. 
– किसी भी रिश्ते में हिंसा की कोई जगह नहीं होती है और ये बात सभी को समझनी ज़रूरी है.  
– इसी तरह महिलाएं भी होती हैं, जो अपने पति को प्रताड़ित करती हैं. दहेज या कोई भी इलज़ाम लगाने की धमकी भी देती हैं.
– अपने सास-ससुर को भी वो प्रताड़ित करती हैं, ताकि उनकी हर बात मान ली जाए, लेकिन ऐसा करके वो न स़िर्फ कानूनू का दुरुपयोग करती हैं, बल्कि अपने रिश्तों को खोखला भी करती हैं.
– शारीरिक प्रताड़ना के साथ-साथ मानसिक प्रताड़ना भी बेहद घातक होती है. 
– यदि आपको यह महसूस हो रहा है कि रिश्ते में आपका शोषण हो रहा है, तो पार्टनर से बात करें और अपने करीबियों से भी, बिना ये सोचे कि आप पर कोई भरोसा करेगा या नहीं. 
– आप ख़ुद पर भरोसा रखें और अपने हक़ के लिए आवाज़ उठाएं.
– इसी तरह सेक्स लाइफ के भी कुछ डूज़ और डोंट्स हैं, जिन्हें जानना ज़रूरी है, क्योंकि शादी में सेक्स को इग्नोर नहीं किया जा सकता. 
– सेक्स में दोनों की भावनाओं और इच्छाओं का सम्मान बेहद ज़रूरी है. अगर सेक्स में पार्टनर बस अपनी ही ज़रूरत का ख़याल रखता है तो वो मशीनी प्रक्रिया होती है. 
– अगर पार्टनर आपको समय नहीं देता, रोमांस, शेयरिंग व केयरिंग की आपकी ज़िंदगी व बेडरूम में जगह नहीं, तो बात करना ज़रूरी है. 
– आपके रिश्ते में ये नौबत न आए, इसलिए सेक्स को भी प्यार का एक अहम् हिस्सा मानें और रोमांस को गायब न होने दें. 
– इसके लिए दोनों तरफ़ से प्रयास हों. कभी रोमांटिक डेट, कभी मैसेज, कभी सरप्राइज़…
– कभी थके-हारे पार्टनर के बालों में प्यार से हाथ फेरनाभर ही काफ़ी होता है रिश्तों में गर्माहट बनाए रखने के लिए. 
– परेशानियों को साझा करें. अगर पार्टनर का मूड ठीक नहीं, तो उस पर सेक्स के लिए दबाव न बानएं.  बल्कि उसका मूड ठीक करने के उपाय करें. कैंडल्स जलाएं. पास बैठकर हाथ पकड़ें और एहसास दिलाएं कि हम दोनों हमेशा एक-दूसरे के साथ हैं. 
– पार्टनर ख़ुद को अकेला न समझे. ऐसे में उसका मन और मूड दोनों ठीक होंगे. 
– पार्टनर पर अपनी इच्छाएं न थोपें.  अगर आपका पार्टनर कंफर्टेबल नहीं है, तो उस पर दबाव न डालना ही बेहतर होगा. 
– जब पार्टनर का मूड ठीक हो जाए, तो आपस में बात करें, सेक्स में और भी कई तरह के फ़न और एक्सपेरिमेंट किए जा सकते हैं ताकि बोरियत न हो 
– सेक्स में दोनों का सहज रहना ज़रूरी है. इसी तरह यदि पार्टनर थका हुआ है या उसकी तबीयत ठीक नहीं, तब भी सेक्स के लिए ज़बर्दस्ती न करके उसकी तबीयत का ध्यान रखें. थके शरीर के साथ सेक्स करना न आपको सुख देगा और न ही आपके पार्टनर को.

– गोल्डी शर्मा 

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