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किचन के लिए Effective वास्तु टिप्स, जो रखेगा आपको हेल्दी(Super Effective Vastu Tips For Your Kitchen For Healthy Life)

अगर किचन का डेकोर करते समय वास्तु शास्त्र के कुछ रूल्स फॉलो किए जाएं तो न सिर्फ आप और आपका परिवार हेल्दी रहेगा. बल्कि आपके परिवार में सुख-समृद्धि भी बनी रहेगी.  Why-Vastu
क्यों ज़रूरी है रसोई का वास्तु?
रसोईघर भोजन निर्माण का केंद्र है और भोजन ही हमारे शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य का आधार है. अतः यदि रसोईघर सही एवं शुभ दिशा में स्थित हो तथा उसकी संयोजना वास्तुशास्त्र के नियमों के अनुकूल की गई हो, तो न केवल उसमें खाना बनानेवाला, बल्कि उस भोजन को ग्रहण करनेवाले परिवार के सभी सदस्यों पर भी गहरा प्रभाव पड़ता है. यदि रसोईघर में हवा और प्रकाश आने की पर्याप्त व्यवस्था हो तथा सामग्री इत्यादि रखने की संयोजना वास्तु के अनुसार हो, तो आपको थकान का अनुभव नहीं होता, मन प्रफुल्लित रहता है, जिसका सूक्ष्म प्रभाव भोजन में प्रविष्ट होकर भोजन करनेवालों को शारीरिक पुष्टि एवं मानसिक संतुष्टि प्रदान करता है. इससे वे निरोगी रहते हैं, मन प्रसन्न रहता है और उनकी कार्यक्षमता में वृद्धि होती है, जिससे घर में सुख-समृद्धि बढ़ती है. promo292881448 यह भी पढ़ें: बेडरूम में पॉज़िटीविटी बनाए रखने के लिए फॉलो करें ये 9 वास्तु रूल्स * घर के प्रत्येक सदस्य को किचन के प्रति एक पवित्र श्रद्धा होनी चाहिए. * किचन हमेशा स्वच्छ रहना चाहिए, किसी भी परिस्थिति में किचन को अस्त-व्यस्त और अस्वच्छ नहीं रखना चाहिए. * रात को जूठे बर्तन किचन में नहीं छोड़ने चाहिए. * गंदगी और कचरा आदि जितनी जल्दी हो सके, सुविधानुसार हटा देना चाहिए. * मकड़ी के जाले, कॉक्रोच व अन्य जीव-जंतु रसोई में अपना घर न बना लें, इस पर ध्यान देना चाहिए. * बर्तन व अन्य समस्त उपकरण साफ़ और व्यवस्थित होने चाहिए. * टूटे-फूटे बर्तन व ऐसे बर्तन जिन्हें देखकर मन प्रसन्न नहीं होता हो, उन्हें हटा देना चाहिए. * छत, दीवार और फर्श पर कहीं भी दरार या टूट-फूट नहीं रहनी चाहिए. * चलने पर टाइल्स हिलनी नहीं चाहिए. * फर्नीचर आदि सुंदर व व्यवस्थित होना चाहिए यानी ड्रॉअर या ट्रॉली आदि खोलने पर किसी भी तरह की कर्कश आवाज़ नहीं आनी चाहिए. * प्रकाश और हवा का आवागमन बेरोकटोक रहे. * बासी, अपवित्र, दुर्गंधयुक्त खान-पान नहीं रखना चाहिए. * पवित्र व प्रसन्न मन से रसोईघर में प्रवेश करना चाहिए. वहां की गई हर गतिविधि मां अन्नपूर्णा की उपासना है. * देखा जाता है कि घर के ड्रॉइंग रूम के सौंदर्य पर ही विशेष ध्यान दिया जाता है, जबकि उससे भी ज़्यादा ध्यान किचन पर होना चाहिए, ताकि किचन को देखते ही हमारे अंदर आनंद और ऊर्जा का संचार हो. * रसोईघर में रोना, चीखना-चिल्लाना व हाथापाई भूलकर भी नहीं होनी चाहिए. * रसोईघर में स्नान करके प्रवेश करना चाहिए. * यहां नौकर-चाकर या सेवक को नहीं सोना चाहिए. * संभव हो, तो रसोईघर में भोजन नहीं करना चाहिए. * रसोईघर में लीकेज नहीं होना चाहिए. * मटके में कांच के बर्तन या ग्लास आदि नहीं डालने चाहिए. * यदि आपके यहां भोजन कोई रसोइया बनाता है, तो उसे ख़ुश रखें. * किचन में फोन आदि पर बात करते समय कभी भी झूठा वादा न करें. यह भी पढ़ें:  धन प्राप्ति के लिए 25 Effective वास्तु टिप्स इन बातों का भी रखें ख़्याल * किचन हमेशा दक्षिण-पूर्व अर्थात् आग्नेय कोण में होना चाहिए. * भोजन बनाते समय हमारा मुंह पूर्व में होना चाहिए. * किचन में चूल्हा दक्षिण-पूर्व में बने प्लेटफॉर्म पर रखना चाहिए. जहां तक संभव हो दक्षिण की तरफ़ होना चाहिए. * त्योहार, पर्व या विशेष दिनों में, जैसे- जन्मदिन या शादी की वर्षगांठ के दिन रसोई को ख़ास ढंग से सजाना व साफ़-सुथरा रखना चाहिए. * प्रतिदिन किसी न किसी को निमित्त मानकर दीपक जलाना चाहिए. * रसोईघर में पूजा घर न बनाएं, लाचारी वश बनाना भी हो, तो विशेष नियमों का पालन करें. * रसोईघर में सफ़ाई के उपकरण रखने ही हों, तो रसोईघर के उत्तर-पश्‍चिम में रखें, यदि वहां भी संभव न हो, तो दक्षिण-पश्‍चिम में भी रख सकते हैं. * फूल, सुगंध, संगीत, स्वच्छता व पवित्रता रसोईघर के लिए जुटा पाएं, तो आपके सौभाग्य को बेहद बल मिलता है. आप प्रगति और उन्नति करेंगे. * रसोईघर के लिए दक्षिण-पूर्व क्षेत्र का प्रयोग उत्तम है, किंतु जहां सुविधा न हो, वहां विकल्प के रूप में उत्तर-पश्‍चिम क्षेत्र का प्रयोग किया जा सकता है. किंतु उत्तर-पूर्व मध्य व दक्षिण-पश्‍चिम क्षेत्र में किचन नहीं होना चाहिए.

- डॉ. प्रेम गुप्ता

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