बच्चों को सिखाएं शिष्टाचार

सभी पैरेंट्स चाहते हैं कि लोग उनके बच्चे के व्यवहार से प्रभावित हों, उनकी प्रशंसा करें, मगर बच्चे अक्सर लोगों के सामने ऊटपटांग हरकतें करना शुरू कर देते हैं. उनके व्यवहार के कारण कभी-कभी पैरेंट्स को शर्मिंदा भी होना पड़ता है. इसी शर्मिंदगी से बचने के लिए बच्चों को एटीकेट यानी शिष्टाचार सिखाना बहुत ज़रूरी है.

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इंट्रोडक्शन एटीकेट्स

आपके बच्चों को आपसे बेहतर कोई नहीं सिखा सकता, इसलिए यह पैरेंट्स की ज़िम्मेदारी है कि वे बच्चों को ये बातें सिखाएं-
अक्सर घर में मेहमान आने पर बच्चे अपने काम या खेल में व्यस्त रहते हैं. उन्हें यह सिखाएं कि जब भी घर पर कोई मिलने आए, तो अपनी जगह पर ही बैठे न रहें, बल्कि खड़े होकर मुस्कुराकर ‘नमस्ते’ से उनका अभिवादन करें.
कुछ बच्चे बड़ों की बातों को सुनते हुए भी अनसुना कर देते हैं, अगर घर पर कोई मेहमान आ रहा है या आप कहीं बाहर जा रहे हैं, तो बच्चों को पहले से ही समझाएं कि वे बड़ों की बातों को ध्यान से सुनें और उसमें रुचि दिखाएं. यह उनके प्रति आदर दिखाने का एक तरीक़ा है.
आजकल घर आनेवाले ज़्यादातर मेहमान छोटे बच्चों से भी हैंडशेक करना पसंद करते हैं. इसलिए आपके बच्चे को हैंडशेक करना आना चाहिए.
हैंडशेक के बाद बच्चे से ‘नाइस टू मीट यू’ या ‘आपसे मिलकर ख़ुशी हुई’ अवश्य कहलवाएं. मेहमान को यह बहुत अच्छा लगेगा और आपके द्वारा दिए गए अच्छे संस्कारों की वे प्रशंसा किए बगैर नहीं रह पाएंगे.
फोन पर किसी से कैसे बात करें, यह भी बच्चे को शुरू से ही सिखाएं. उन्हें बताएं कि जब भी अपने दोस्त के घर फोन करें, तो पहले अपना नाम बताएं. यदि फोन पर कोई बड़ा व्यक्ति हो, तो उन्हें ‘नमस्ते’ कहें और पूछें कि ‘क्या मैं अमुक व्यक्ति से बात कर सकता हूं.’

टॉकिंग एटीकेट्स

‘प्लीज़’ और ‘थैंक यू’ कहने में भले ही दो छोटे लफ़्ज़ हैं, पर ये आपके अच्छे संस्कार दर्शाते हैं. बच्चों को बचपन से ही यह सिखाएं कि जब भी किसी से कुछ मांगें तो ‘प्लीज़’ और जब भी कोई उन्हें कुछ दे, तो ‘थैंक यू’ ज़रूर कहें.
कुछ बच्चे घर में तो ख़ूब बोलते हैं, लेकिन रिश्तेदारों के सामने एकदम चुप्पी साध लेते हैं, जो ठीक नहीं है. इसलिए बच्चों को सिखाएं कि जब भी कोई उनसे पूछे “बेटा कैसे हो?” तो मुस्कुराकर जवाब दें. साथ ही उनसे भी पूछें कि वे कैसे हैं?
जब भी बच्चा अपने दोस्तों के साथ समय बिताने या अन्य किसी काम से उनके घर जाए, तो निकलते व़क्त दोस्त के पैरेंट्स को साथ में समय बिताने, ध्यान रखने और खाने-पीने की चीज़ें देने के लिए ‘धन्यवाद’ अवश्य कहना चाहिए.
बच्चों को यह सिखाना बहुत ज़रूरी है कि जब भी बड़े लोग आपस में बातें कर रहे हों, तो वे बीच में न बोलें.
ग़ुस्से में अक्सर बच्चे अपशब्दों का प्रयोेग करते हैं. ऐसे में पैरेंट्स उन्हें शुरू से ही सिखाएं कि वे गाली-गलौज न करें, क्योंकि उन्हें     गाली-गलौज करते देख दूसरे उनके बारे में ग़लत राय बनाएंगे.
बच्चों को सिखाएं कि जब भी टीचर से बात करें, तो हाथ हमेशा पीछे रखें और सीधे खड़े होकर बात करें. अगर टीचर्स उनकी कोई समस्या सुलझाएं, तो उन्हें ‘थैंक यू’ कहना न भूलें.

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सोशल एटीकेट्स

बच्चों को बचपन से ही सिखाएं कि जब भी छींक या खांसी आ रही हो, तो अपने मुंह पर हाथ या रूमाल रखें. सबके सामने नाक या मुंह में उंगली ना डालें.
अक्सर स्कूल के कार्यक्रम या असेंबली में बच्चे अपने दोस्तों के साथ मिलकर शोर-शराबा करते हैं, उन्हें समझाएं कि ये कार्यक्रम ख़ास उनके लिए ही बहुत मेहनत से तैयार किए जाते हैं, इसलिए ख़ुद भी एंजॉय करें और दूसरों को भी करने दें.
अक्सर शरारती बच्चे कमज़ोर या शांत रहनेवाले बच्चों को डराते हैं या उन्हें टारगेट बनाकर तंग करते हैं. जैसे ही आपको इस बारे में पता चले, तो बच्चों को प्यार से समझाएं कि यह ग़लत है. कभी किसी का मज़ाक न उड़ाएं और न ही बेवजह सताएं.
बचपन से ही बच्चों में दूसरों की मदद करने की आदत डालें. उन्हें सिखाएं कि घर या बाहर जब भी कोई उनसे मदद मांगे, तो मुस्कुराते हुए उनकी मदद करें.
बच्चों को यह सिखाना भी बहुत ज़रूरी है कि जब भी वो किसी के घर जाएं, तो हमेशा दरवाज़े पर ‘दस्तक’ ज़रूर दें. बिना दस्तक दिए या कॉलबेल बजाए किसी के घर में न जाएं.
शेयरिंग बहुत अच्छी आदत है. चाहे घर पर हों या बाहर बच्चों को अपने दोस्तों और दूसरे बच्चों के साथ खिलौने शेयर करने की आदत डालें.
बच्चों को शिष्टाचार सिखाते व़क्त यह भी ध्यान रखें कि आप जो बातें उन्हें सिखा रहे हैं, उन्हें पहले ख़ुद अमल में लाएं, क्योंकि बच्चे देखकर जल्दी सीखते हैं.

ईटिंग एटीकेट्स

बच्चों को सिखाएं कि खाना खाते समय गर्दन के नीचे नैपकिन अवश्य लगाएं. बीच-बीच में मुंह पोंछें. कई बार खाना मुंह पर लग जाता है और पता ही नहीं चलता, जो देखने में बहुत बुरा लगता है. बड़े बच्चे पेपर नैपकिन्स का इस्तेमाल कर सकते हैं.
बच्चों को खाना छोटे-छोटे कौर लेकर धीरे-धीरे चबाकर खाने के लिए कहें. ध्यान रखें कि खाना खाते समय चबाने की आवाज़ न आए और न ही खाना खाते समय वो बात करें.
यदि बच्चे की पसंदवाली खाने की चीज़ें नहीं हैं, तो बच्चे को समझाएं कि उसका इश्यू न बनाएं. इससे पैरेंट्स को शर्मिंदगी उठानी पड़ेगी.

पार्टी एटीकेट्स

बच्चे पार्टी में अपने दोस्तों के साथ मस्ती करने में इतने खो जाते हैं कि कई बार सारे मैनर्स भूल जाते हैं. दूसरों की बर्थडे पार्टी के गिफ्ट्स उत्सुकतावश खोलकर देखना शुरू कर देते हैं. पार्टी में जाने से पहले उन्हें अच्छी तरह समझाएं कि वहां ऐसा न करें.
कई बार बच्चे शर्म व संकोच के कारण बर्थडे पार्टी में खेले जानेवाले गेम्स में भाग नहीं लेते. बच्चे को वहीं डांटने की बजाय पार्टी में ले जाने से पहले ही उसे बताएं कि ये गेम्स उन्हीं के लिए रखे गए हैं और अगर वे भाग नहीं लेंगे, तो उनके दोस्त को बुरा लगेगा.
यदि आपके घर में बर्थडे पार्टी है, तो बच्चे को मेहमानों के साथ सही व्यवहार का तरीक़ा सिखाएं, यह भी बताएं कि मिलनेवाले गिफ्ट्स सबके सामने न खोलें.
अपनी बर्थडे पार्टी में गिफ्ट मिलने पर ‘थैंक यू’ कहें. यदि आप पार्टी में रिटर्न गिफ्ट दे रहे हैं, तो उस पर ‘थैंक यू’ नोट लगाकर दें. बड़े बच्चे सोशल नेटवर्किंग साइट्स या मैसेजिंग के ज़रिए भी ‘थैंक यू नोट’ भेज सकते हैं. इससे सामनेवाले पर बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है.
                                                                                                                                                             – डॉ. सुषमा श्रीराव