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बढ़ती उम्र में होनेवाले स्किन प्रॉब्लम्स… (The Effects Of Aging On Skin)

त्वचा उम्र के साथ बदलती है. यह पतली हो जाती है, वसा खो देती है और उतना मोटा और चिकना नहीं दिखती, जितनी पहले दिखती थी. उम्र बढ़ने पर सबसे ज़्यादा स्किन से संबंधित प्रॉब्लम्स का सामना महिलाओं को करना पड़ता है. दरअसल, उम्र बढ़ने पर खरोंच, कट्स या धक्कों को ठीक होने में अधिक समय लगता है. स्किन प्रॉब्लम्स के बारे में डर्मेटोलॉजिस्ट और एस्थेटिक फिजिशियन डॉ. अजय राणा ने हमें विस्तार से बताया.
सन टैनिंग या लंबे समय तक सूरज की रोशनी में बाहर रहने के कारण झुर्रियां, सूखापन, उम्र के धब्बे हो सकते हैं.
कई वृद्ध महिलाएं अपनी त्वचा पर, अपने निचले पैरों, कोहनी और निचले हाथों पर सूखे धब्बों से पीड़ित होती हैं.

ड्राई स्किन के पैच खुरदरे लगते हैं…
ड्राई स्किन बहुत सारे गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं के कारण हो सकती है, जैसे- मधुमेह या गुर्दे की बीमारी. बहुत अधिक साबुन, एंटीपर्सपिरेंट या परफ्यूम का उपयोग करना और गर्म पानी से स्नान करने से ड्राई स्किन ख़राब हो सकती है. स्किन डिसऑर्डर के लक्षण बहुत भिन्न होते हैं. वे अस्थायी या स्थायी हो सकते हैं और दर्दरहित या दर्दनाक हो सकते हैं.

चोटें
बूढ़े लोगों को युवाओं की तुलना में अधिक आसानी से चोटें लगती हैं. इन घावों को ठीक होने में अधिक समय लगता है. दरअसल, उम्र के साथ महिलाओं की इम्युनिटी सिस्टम काफ़ी कमज़ोर हो जाती है, जिससे इन घावों को ठीक होने में काफ़ी समय लगता है. कुछ दवाओं या बीमारियों के कारण भी चोट लग सकती है, जो और गंभीर होती है.

लीवर स्पॉट
उम्र बढ़ने पर अक्सर महिलाओं में लीवर स्पॉट कहे जानेवाले स्पाॅट होने लगते हैं. ये भूरे रंग के धब्बे होते हैं, जो अक्सर धूप में ज़्यादा समय तक रहने पर होते हैं. ये आमतौर पर चेहरे, हाथ, पीठ और पैरों जैसे क्षेत्रों पर होते हैं. ऐसे धब्बों को कम करने के लिए महिलाओं को ब्रॉड-स्पेक्ट्रम सनस्क्रीन का उपयोग करना फ़ायदेमंद है, जो सूरज की किरणों के दोनों प्रकारों (यूवीए और यूवीबी) से बचाने में मदद करता है और अधिक उम्र के कारण होनेवाले धब्बों को
आसानी से रोक सकता है.

झुर्रियां
समय के साथ, त्वचा पर झुर्रियां पड़ने लगती हैं. सूर्य की यूवी किरणें, त्वचा को कम लचीला बना सकती हैं. उम्र बढ़ने पर महिलाओं की स्किन में बहुत सारे परिवर्तन होते है, ख़ासकर झुर्रियां. यह एपिडर्मिस और डर्मिस के पतले होने, कोलेजन और लचीले फाइबर के विखंडन और सेल हीलिंग और डीएनए की मरम्मत में कमी के कारण होते हैं.
उम्र के साथ-साथ महिलाओं के स्किन में मेलानोसाइट्स की कमी होने लगती है और वसामय ग्लैंड के कम होने के साथ त्वचा की सहायक संरचनाओं में भी कमी होने लगती है.
उम्र बढ़ना त्वचा में संरचनात्मक और कार्यात्मक परिवर्तनों के साथ जुड़ा हुआ है, जो इसे त्वचा रोग के लिए अधिक संवेदनशील बनाता है. वृद्ध त्वचा में जेरोसिस सबसे आम प्रॉब्लम है. बुज़ुर्ग मरीज़ों को भी त्वचा में संक्रमण होने का ख़तरा होता है और त्वचा की ख़राबी बढ़ जाती है, जिसके कारण महिलाओं में झुर्रियों की समस्या बहुत आम है.

इन्फेक्शन
महिलाओं को उम्र बढ़ने पर अनेक प्रकार के स्किन से संबंधित इन्फेक्शन होने का भी डर होता है. आम स्किन इन्फेक्शन में कैंडिडिआसिस, डर्माटोफाइटिस, बैक्टीरियल और वायरल इन्फेक्शन शामिल हैं. इन फंगल इन्फेक्शन के लिए जांच में माइकोलॉजी (त्वचा के टुकड़े, बाल शाफ्ट, नाख़ून के टुकड़े) के लिए प्रत्यक्ष माइक्रोस्कोपी (पोटेशियम हाइड्रॉक्साइड के साथ) के नमूने शामिल होने चाहिए. इन सारे जांच से महिलाओं को स्किन से जुड़ी सभी प्रकार के इन्फेक्शन से राहत मिल सकती है.

जेरोसिस/एस्टेटोटिक एक्जिमा
उम्र के साथ स्किन ड्राई होने लगती है और आसानी से झड़ने लगती है, क्योंकि उम्र के साथ स्किन में जो तेल की मात्रा होती है वह कम होने लगती है. खुजली होती है, ड्राई स्किन में खुरदरी और बारीक परत या पपड़ीदार सतह होती है. कभी-कभी ड्राई स्किन के क्षेत्रों में एस्टेटोटिक एक्जिमा होता है. जब शरीर की इम्युनिटी सिस्टम कमज़ोर होने लगती है, तब ये गोल लाल पैच के रूप में दिखाई देते हैं. महिलाओं के स्किन पर भूरे रंग के धब्बे, जो झाई की तरह दिखते हैं अक्सर देखे जाते हैं. ये फ्रेकल्स की तुलना में बड़े और अधिक अनियमित हैं. उन्हें सीनील फ्रीकल्स कहा जाता है. वे अक्सर सूर्य के प्रकाश की वजह से त्वचा को नुक़सान पहुंचाते हैं. यदि फ्रेकल्स बड़ा या मोटा हो जाता है या क्रस्ट विकसित करता है.

दवाओं के साइडइफेक्ट्स
जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, तब तक हमारी बॉडी कई तरह की दवाओं और मेडिसिन से ग्रस्त हो चुकी होती है, क्यूंकि महिलाएं शारीरिक रूप से पुरुषों से कमज़ोर होती है, जिसके कारण वे दवाओं के प्रतिकूल प्रतिक्रिया विकसित करने की कम संभावनाएं रखती है. दवाओं के लिए आम प्रतिकूल प्रतिक्रिया उनकी त्वचा में देखी जाती है, जहां यह लाल, खुजली या फफोले के रूप में होते है. यह महत्वपूर्ण है कि इस तरह के खुजली या फफोले को जल्दी पहचाना जाए, ताकि नुक़सानदायक दवा को बंद किया जा सके, जिससे दवा से होनेवाले नुक़सान को भी
गंभीर होने से रोका जा सके. ताकि मुख्य रूप से महिलाओं के स्किन पर इसका विपरीत प्रभाव न पड़े.

उम्र बढ़ने से महिलाओं में होनेवाली स्किन प्रॉब्लम्स को कम करने के लिए कुछ उपयोगी टिप्स…
● महिलाओं को नियमित रूप से अपने स्किन पर मॉइश्चराइज़र का इस्तेमाल करना चाहिए. मॉइश्चराइज़र ड्राई स्किन सेल्स को मुलायम बनाता है.
● बाहर निकलने से पहले सनस्क्रीन लगाना न भूलें.
● विटामिन ई का नियमित उपयोग करे. विटामिन ई आपको सनबर्न से सुरक्षित रहने में भी मदद करता है.
● स्वस्थ भोजन की आदतें और ढेर सारा पानी आपकी त्वचा की गुणवत्ता में सुधार करता है.
● स्किन पर रैशेज, एक्जिमा, ड्राईनेस और खुजली होने पर मॉइश्चराइज़र और हाइड्रोकार्टिसोन क्रीम का
उपयोग करें.
● हमेशा नाइट क्रीम का उपयोग ग्लाइकोलिक एसिड ओ के साथ करें.

– ऊषा गुप्ता

Skin Aging