
अनिल कपूर ने अपने अभिनय और फिटनेस से यह साबित कर दिखाया कि कलाकार की कोई उम्र नहीं होती... वह अपनी अदाकारी और काम के जज़्बे व जुनून के चलते ताउम्र सदाबहार अभिनेता बना रह सकता है. एक व़क्त था जब अनिल कपूर का स्टारडम इस कदर लोगों पर हावी था, जो बोल रहा था- ऐ जी ओ जी लो जी सुनो जी मैं हू मनमौजी... यही कुछ उन्होंने एक्टिंग की धार व मस्तमौलापन मि. इंडिया, तेजाब, राम लखन, नायक, साहेब, जाबांज... में दिखाया भी है.

लेकिन उनका आगाज़ तो ‘वो 7 दिन’ फिल्म में ही देखने मिल गया था. एक भोलाभाल शख़्स जो अपने संगीत से तहलका मचाना चाहता था. जिसमें पद्मिनी कोल्हापुरे की शरारत व शोखियां थीं तो मास्टर राजू का मज़ेदार मास्टर स्ट्रोक्स भी था. वहीं नसरुद्दीन शाह की संजीदगी गज़ब की रही. आज इसी फिल्म के 43 साल होने पर अनिल कपूर ने इमोशनल होकर कहा-
‘वो 7 दिन’ के 43 साल! कुछ फिल्में हमेशा आपके साथ रहती हैं. मेरे लिए यह हमेशा उन्हीं में से एक रहेगी. मैंने पहले भी कहा है और हमेशा कहता रहूंगा कि मैं पदमिनी कोल्हापुरे और नसरुद्दीन शाह का शुक्रगुज़ार हूं. ‘वो 7 दिन’ का जश्न मनाते समय मुझे उनकी हमेशा बहुत याद आती है. अगर वे न होते, तो मुझे नहीं लगता कि मैं आज इन 43 सालों का जश्न मना रहा होता. उन्होंने मुझ जैसे नए कलाकार का स्वागत किया और मुझे दर्शकों से जुड़ने का ज़रूरी आत्मविश्वास दिया.
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महान और दिवंगत निर्देशक बापू का भी बहुत-बहुत धन्यवाद, जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया और मुझे डायरेक्ट किया. के. भाग्यराज का भी आभार, जिन्होंने इतनी ख़ूबसूरत कहानी लिखी. मेरे पिता सुरेंद्र कपूर और भाई बोनी कपूर का भी शुक्रिया, जिन्होंने मुझ पर भरोसा किया और फिल्म को प्रोड्यूस किया.

‘वो 7 दिन’ से पहले मैंने कुछ फिल्में की थीं, लेकिन इसी फिल्म ने असल में मुझे आप सभी से मिलवाया. इसने मुझे पहचाने जाने, स्वाकार किए जाने और इस शानदार सफ़र को शुरू करने का पहला असली मौक़ा दिया. हमेशा आभारी रहूंगा.
इसी के साथ उन्होंने लव इमोजी दिया. सोशल मीडिया के इंस्टाग्राम पर अनिल कपूर के इस पोस्ट पर उनके प्रशंसकों का भरपूर प्यार मिल रहा है.

सच में अनिल कपूर की फिल्म ‘वो 7 दिन’ आज भी उतनी ही एवरग्रीन और मास्टरपीस है, जितनी 1983 में थी, जिसे देखते हुए उतना ही आनंद आता है. गीत-संगीत में आनंद बख्शी और लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल के समधुर म्यूज़िक ने धूम मचाया था. इसके गाने प्यार किया नहीं जाता... अनाड़ी का खेल... कंगना ओए होए... मेरे दिल से दिल्लगी न कर... बेहद पसंद किए गए थे.
अनिल कपूर के इस पोस्ट पर उनके फैंस ने जमकर प्यारी-प्यारी प्रतिक्रियाएं भी दे रहे हैं. किसी ने इसे अपनी फेवरेट फिल्म बताया तो एक ने तो इतना मज़ेदार कमेंट्स कर दिया कि आप तो अभी 43 के ही लगते हो, उस समय ही हुए थे आप...
एक फैंस ने तो यहां तक कह दिया कि ‘हम दिल दे चुके सनम’ मूवी इस फिल्म की कॉपी थी. और उसे इसका क्रेडिट भी नहीं दिया गया.

अनिल कपूर द्वारा प्रेम प्रताप पटियाला वाले क़िरदार में “मैं अक्ल का कोल्हू हूं उल्लू हूं घोंचू हूं घोंचू हूं, उल्लू हूं उल्लू का पट्ठा हूं याहूं याहूं...” वाला सीन न जाने कितनों का ऑलटाइम फेवरेट सीन है. उस पर मि. इंडिया की एक्टिंग तो मानो सोने पे सुहागा.

जल्द ही आलिया भट्ट, बॉबी देओल और शरवरी वाघ से सजी ‘अल्फा’ फिल्म में अनिल कपूर ख़ास अंदाज़ में नज़र आएंगे.
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